रिपोर्टर (सचिन शर्मा)
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हरिद्वार 2026। राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर शुक्रवार को हरिद्वार में ‘नमामि भारतम्—एक समय, एक लय, एक स्वर’ अभियान के तहत सामूहिक गायन कार्यक्रम आयोजित किए गए। सरस्वती विद्या मंदिर मायापुर और सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज बीएचईएल सेक्टर-2 में हुए आयोजनों में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और अतिथियों ने एक साथ वंदे मातरम् का गायन किया।
विद्या भारती के आह्वान पर देशभर में 25 सितंबर को सुबह 11 बजे सामूहिक वंदे मातरम् गायन का आयोजन किया गया। इससे पहले हरिद्वार में भी कार्यक्रम की तैयारियां की गई थीं। संबंधित रिपोर्टों के अनुसार, विद्या भारती ने देशभर में बड़ी संख्या में विद्यालयों और अन्य स्थानों पर आयोजन की योजना बनाई थी तथा एक करोड़ से अधिक लोगों को जोड़ने का लक्ष्य बताया था। हरिद्वार के मायापुर और बीएचईएल सेक्टर-2 में हुए कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के सामूहिक गायन के साथ विद्यार्थियों और उपस्थित लोगों ने इसकी ऐतिहासिक यात्रा और राष्ट्रीय महत्व को याद किया।
मायापुर में 11 बजे हुआ मुख्य सामूहिक गायन
सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, मायापुर में शुक्रवार सुबह 11 बजे मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उछाली आश्रम, हरिद्वार के परमाध्यक्ष विष्णुदास महाराज का सानिध्य रहा, जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पश्चिमी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्र प्रचार प्रमुख पदम जी ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया। कार्यक्रम में विद्या भारती उत्तराखंड के प्रदेश निरीक्षक डॉ. विजयपाल सिंह, विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष जगपाल सिंह, प्रबंधक डॉ. कपिल गोयल, कोषाध्यक्ष प्रभुदयाल अग्रवाल, सदस्य रमेश भाटिया और प्रकाश जोशी समेत कई अतिथि मौजूद रहे।

इसके अलावा इंडियन बैंक हरिद्वार के शाखा प्रबंधक दीपक कुमार रस्तोगी, विद्या भारती के प्रांत प्रमुख हेमराज सिंह, शिशु मंदिर के प्रधानाचार्य करणेश सैनी और विद्यालय के प्रधानाचार्य अजय सिंह सहित अन्य लोग भी कार्यक्रम में शामिल हुए। सामूहिक गायन शुरू होने के साथ ही विद्यालय परिसर में विद्यार्थियों और आचार्यों ने एक साथ वंदे मातरम् का गायन किया। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों और समाज के अन्य वर्गों को वंदे मातरम् के ऐतिहासिक महत्व से जोड़ना था।
मुख्य वक्ता पदम जी ने अपने संबोधन में वंदे मातरम् को भारत की राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा महत्वपूर्ण गीत बताया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् का इतिहास भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और मातृभूमि के प्रति सम्मान की भावना से जुड़ा रहा है। उन्होंने विद्या भारती की ओर से आयोजित राष्ट्रव्यापी अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि देशभर में हजारों स्थानों पर विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और नागरिकों ने सामूहिक गायन में भाग लिया। आयोजकों की ओर से बताया गया कि इस अभियान के तहत देशभर में एक करोड़ से अधिक लोगों को एक साथ जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में भी विद्या भारती के इस राष्ट्रव्यापी आयोजन और 25 सितंबर को सामूहिक गायन की जानकारी प्रकाशित हुई है।
कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि उत्तराखंड में भी बड़ी संख्या में विद्यालयों और अन्य स्थानों पर सामूहिक वंदे मातरम् गायन का आयोजन किया गया। आयोजकों के अनुसार, प्रदेश में 552 स्थानों पर लगभग दो लाख लोगों की भागीदारी रही। हालांकि यह आंकड़ा आयोजकों द्वारा बताया गया है और स्वतंत्र रूप से प्रत्येक स्थान के आंकड़ों का अलग सत्यापन इस खबर में नहीं किया गया है। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता के बावजूद एक ही समय में अलग-अलग स्थानों पर वंदे मातरम् का सामूहिक गायन राष्ट्रीय एकता की भावना को सामने रखने वाला आयोजन रहा।
विद्या भारती उत्तराखंड के प्रदेश निरीक्षक डॉ. विजयपाल सिंह ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम विद्यार्थियों को देश के इतिहास, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का माध्यम बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि सामूहिक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में अनुशासन, सहभागिता और देश की ऐतिहासिक परंपराओं के प्रति जानकारी विकसित करने का प्रयास किया जाता है। आयोजकों ने यह भी बताया कि सामूहिक गायन के आयोजन को एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज कराने के लिए प्रमाणन की प्रक्रिया की जा रही है। रिकॉर्ड से संबंधित अंतिम स्थिति संबंधित संस्थाओं के सत्यापन और प्रमाणन के बाद ही स्पष्ट होगी।
बीएचईएल सेक्टर-2 में भी हुआ बड़ा आयोजन
हरिद्वार के सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, सेक्टर-2, बीएचईएल रानीपुर में भी ‘नमामि भारतम्’ के तहत सामूहिक वंदे मातरम् गायन आयोजित किया गया। आयोजकों के अनुसार, यहां कुल 3,930 लोगों ने कार्यक्रम में भाग लिया। इनमें 2,773 छात्र-छात्राएं, 981 अभिभावक, 161 शिक्षक-शिक्षिकाएं और 15 अतिथिगण शामिल रहे। कार्यक्रम में विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों और अभिभावकों ने भी एक साथ खड़े होकर राष्ट्रगीत का सामूहिक गायन किया। आयोजन से जुड़े लोगों ने इसे विद्यार्थियों और अभिभावकों की संयुक्त भागीदारी वाला कार्यक्रम बताया।
बीएचईएल सेक्टर-2 में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह करीब 10:30 बजे किया गया। कार्यक्रम में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज, विद्या भारती उत्तराखंड के मंत्री डॉ. रजनीकांत शुक्ल, संघ के विभाग प्रचारक राकेश जी, पूर्व भेल नगर प्रशासक संजय पवार, जिला संघ चालक डॉ. यतीन्द्र नागियान और पार्षद अनुज सिंह ने दीप प्रज्ज्वलन एवं वंदना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। अतिथि परिचय शिशु मंदिर के प्रधानाचार्य कमल सिंह रावत ने कराया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों और अन्य प्रतिभागियों ने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सामूहिक गायन में हिस्सा लिया।

वंदे मातरम् के इतिहास पर डॉ. रजनीकांत शुक्ल ने रखे विचार
कार्यक्रम में डॉ. रजनीकांत शुक्ल ने वंदे मातरम् के 150 वर्षों के इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन में इसके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों में राष्ट्रप्रेम और स्वाभिमान की भावना को अभिव्यक्ति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने विद्यार्थियों को राष्ट्रगीत के इतिहास और उसके राष्ट्रीय जीवन में महत्व के बारे में जानकारी दी। इस दौरान आचार्य कमलेश जी की ओर से प्रस्तुत एकल गीत भी कार्यक्रम का हिस्सा रहा। आयोजकों के अनुसार, सांस्कृतिक प्रस्तुति ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
संघ के विभाग प्रचारक राकेश जी ने कहा कि वंदे मातरम् मातृभूमि के प्रति श्रद्धा और समर्पण की भावना से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि देश के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी केवल आयोजनों तक सीमित न रहकर दैनिक व्यवहार में भी दिखाई देनी चाहिए। मुख्य अतिथि श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के एक साथ वंदे मातरम् गायन को भारत की विविधता और एकता से जोड़कर बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों को देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना से जोड़ने में भूमिका निभा सकते हैं। कार्यक्रम में सत्यापन अधिकारी संजय पवार ने आयोजन से संबंधित सत्यापन प्रक्रिया पूरी की।
कार्यक्रम के समापन पर सरस्वती विद्या मंदिर बीएचईएल के प्रधानाचार्य लोकेंद्र अंथवाल और मायापुर के प्रधानाचार्य अजय सिंह ने अतिथियों, विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और आयोजन से जुड़े सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। विद्यालय प्रबंधन की ओर से कहा गया कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में अनुशासन, सहभागिता और भारतीय संस्कृति एवं ऐतिहासिक विरासत के प्रति जानकारी विकसित करने में सहायक हो सकते हैं।
हरिद्वार के दोनों विद्यालयों में आयोजित कार्यक्रमों के साथ शहर में ‘नमामि भारतम्’ अभियान के तहत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने का आयोजन किया गया। सामूहिक गायन में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों की भागीदारी रही और आयोजकों की ओर से इसे राष्ट्रगीत के ऐतिहासिक महत्व को याद करने का अवसर बताया गया।
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