कुंभ 2027 से पहले बदलेगा हरिद्वार के घाटों का स्वरूप! आस्था पथ के साथ बनेंगे ‘ग्रीन घाट’कुंभ 2027 से पहले बदलेगा हरिद्वार के घाटों का स्वरूप! आस्था पथ के साथ बनेंगे ‘ग्रीन घाट’

रिपोर्टर (सचिन शर्मा)

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हरिद्वार 2026। कुंभ मेला-2027 की तैयारियों के बीच हरिद्वार में गंगा तटों को अधिक स्वच्छ, हरित और पर्यावरण के अनुकूल स्वरूप देने की दिशा में पहल शुरू हो गई है। गंगा किनारे प्रस्तावित ‘ग्रीन घाट’ परियोजना को लेकर राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के साथ नीदरलैंड के तकनीकी विशेषज्ञों ने शुक्रवार को हरिद्वार पहुंचकर प्रस्तावित क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया।

नीदरलैंड के विशेषज्ञों के प्रतिनिधिमंडल ने आस्था पथ और प्रस्तावित ग्रीन घाट क्षेत्र का जायजा लिया। इस दौरान मेला प्रशासन और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ परियोजना से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। पहल का उद्देश्य कुंभ मेला-2027 के दौरान गंगा तटों और श्रद्धालुओं की आवाजाही वाले प्रमुख क्षेत्रों को पर्यावरणीय दृष्टि से बेहतर बनाने की दिशा में काम करना है। ग्रीन घाट की अवधारणा के तहत गंगा तट के आसपास हरित आवरण, स्वच्छता और नदी किनारे के क्षेत्र के बेहतर प्रबंधन से जुड़े पहलुओं पर विचार किया जा रहा है। यह कार्य भारत और नीदरलैंड के बीच तकनीकी सहयोग के तहत शहरी नदी प्रबंधन कार्यक्रम से भी जुड़ा है।

आस्था पथ के साथ ग्रीन घाट विकसित करने की योजना

कुंभ मेला-2027 के लिए हरिद्वार में विकसित की जा रही अवस्थापना सुविधाओं के साथ गंगा तटों को अधिक हरित, स्वच्छ और पर्यावरणीय दृष्टि से बेहतर बनाने की दिशा में आस्था पथ इस पहल का महत्वपूर्ण केंद्र है। हरकी पैड़ी को जोड़ने वाले धनुष पुल से बैरागी कैंप तक आस्था पथ के विस्तार की योजना के साथ इससे जुड़े गंगा घाटों को भी ग्रीन घाट के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है। इससे श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए विकसित होने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग और गंगा तट के आसपास का क्षेत्र प्रकृति एवं स्वच्छता के दृष्टिकोण से भी अधिक आकर्षक बनाया जा सकेगा।

कुंभ मेला 2027 की तैयारियों के तहत हरिद्वार में प्रस्तावित ग्रीन घाट क्षेत्र का निरीक्षण

नीदरलैंड के विशेषज्ञों ने किया स्थलीय निरीक्षण

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तत्वावधान में नीदरलैंड के तकनीकी विशेषज्ञों का प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को हरिद्वार पहुंचा। विशेषज्ञों ने प्रस्तावित ग्रीन घाट क्षेत्र और आस्था पथ से जुड़े स्थानों का स्थलीय निरीक्षण किया। इसी महत्वाकांक्षी पहल को भारत और नीदरलैंड की साझेदारी के अंतर्गत संचालित शहरी नदी प्रबंधन कार्यक्रम के माध्यम से तकनीकी सहयोग प्रदान किया जा रहा है। इसके तहत नीदरलैंड के विशेषज्ञों ने आस्था पथ क्षेत्र का भ्रमण कर ग्रीन घाट परियोजना से जुडे़ विभिन्न पहलुओं का जायजा लिया।

नीदरलैंड के तकनीकी विशेषज्ञों के प्रतिनिधिमंडल ने मेला नियंत्रण भवन में मेलाधिकारी श्रीमती सोनिका से भी मुलाकात की। इस दौरान कुंभ मेला-2027 की तैयारियों और ग्रीन घाट परियोजना को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। मेलाधिकारी ने प्रतिनिधिमंडल को कुंभ मेला-2027 की तैयारियों के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने गंगा तटों पर स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए की जा रही विभिन्न पहलों के बारे में भी बताया।

कुंभ मेला हरिद्वार के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण आयोजन है। आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान और धार्मिक गतिविधियों के लिए हरिद्वार पहुंचते हैं। ऐसे में गंगा तटों की स्वच्छता और पर्यावरणीय व्यवस्था को बेहतर बनाए रखना मेला प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है प्रतिनिधिमंडल ने मेला नियंत्रण भवन में मेलाधिकारी श्रीमती सोनिका से भेंट कर परियोजना के बारे में विचार-विमर्श किया। मेलाधिकारी ने कुंभ मेला-2027 की तैयारियों और गंगा तटों पर स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए की जा रही पहल के संबंध में जानकारी दी।

इस अवसर पर नगर आयुक्त हरिद्वार नंदन कुमार ने ग्रीन घाट परियोजना से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। नगर निगम की भूमिका शहर की स्वच्छता, सार्वजनिक सुविधाओं और नदी तट से जुड़े शहरी प्रबंधन में महत्वपूर्ण रहती है। परियोजना के दौरान स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सुविधाओं और मौजूदा व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए आगे की योजना तैयार की जाएगी। विशेषज्ञों के निरीक्षण और अधिकारियों के साथ चर्चा के आधार पर ग्रीन घाट की अवधारणा को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विकसित करने पर जोर रहेगा।

भारत-नीदरलैंड तकनीकी सहयोग से आगे बढ़ेगी पहल

ग्रीन घाट की पहल को भारत और नीदरलैंड की साझेदारी के अंतर्गत संचालित शहरी नदी प्रबंधन कार्यक्रम से तकनीकी सहयोग मिल रहा है। नदी और उसके आसपास के शहरी क्षेत्रों के बेहतर प्रबंधन को लेकर दोनों देशों के बीच तकनीकी स्तर पर सहयोग की व्यवस्था के तहत विशेषज्ञ हरिद्वार पहुंचे हैं। नीदरलैंड के विशेषज्ञों द्वारा किए गए निरीक्षण का उद्देश्य स्थानीय परिस्थितियों का आकलन करना और परियोजना से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर सुझाव देना है। गंगा तटों को हरित स्वरूप देने की योजना में नदी पर्यावरण, शहरी प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधा जैसे पहलुओं को एक साथ ध्यान में रखा जा रहा है।

कुंभ मेला-2027 की तैयारियों में केवल यातायात, सुरक्षा और अवस्थापना सुविधाओं को ही नहीं, बल्कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया जा रहा है। हरिद्वार में गंगा तट धार्मिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र हैं। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में घाटों के आसपास साफ-सफाई, हरित क्षेत्र और व्यवस्थित सार्वजनिक स्थानों का विकास आयोजन के दौरान शहर की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। ग्रीन घाट की अवधारणा इसी दिशा में एक पहल है, जिसमें गंगा तटों को अधिक व्यवस्थित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर विचार किया जा रहा है।

आस्था पथ को गंगा तटों से जोड़कर विकसित करने की योजना के पीछे श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित करने के साथ आसपास के क्षेत्र को बेहतर स्वरूप देने का उद्देश्य भी है। धनुष पुल से बैरागी कैंप तक प्रस्तावित विस्तार और इससे जुड़े घाटों के विकास के दौरान पैदल मार्ग, हरित क्षेत्र, स्वच्छता तथा सार्वजनिक सुविधाओं जैसे विषयों पर ध्यान दिया जाएगा। विशेषज्ञों के स्थलीय निरीक्षण के बाद इन पहलुओं पर आगे की तकनीकी प्रक्रिया को दिशा मिल सकती है।

स्थलीय निरीक्षण और बैठक में नीदरलैंड के तकनीकी प्रतिनिधियों के साथ राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के अधिकारी भी मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल में नई दिल्ली स्थित नीदरलैंड दूतावास के नामित प्रतिनिधि (जल) मॉरित्स बोसमैन, नीदरलैंड के जल प्रबंधन मंत्रालय के कार्यक्रम प्रबंधक सेन्डर कारपेज, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के प्रतिनिधि जय दिघे और पंकज रावत शामिल रहे। अधिकारियों और विशेषज्ञों के बीच हुई चर्चा में गंगा तटों के पर्यावरणीय प्रबंधन, आस्था पथ और प्रस्तावित ग्रीन घाट क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

प्रस्तावित ग्रीन घाट परियोजना अभी विकास और योजना के चरण में है। स्थलीय निरीक्षण के बाद स्थानीय परिस्थितियों, उपलब्ध स्थान और आवश्यक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए आगे की तकनीकी प्रक्रिया तय की जाएगी। कुंभ मेला-2027 से पहले यदि प्रस्तावित योजनाओं पर काम आगे बढ़ता है तो हरिद्वार के गंगा तटों पर स्वच्छता और हरित क्षेत्र से जुड़ी व्यवस्थाओं में बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि परियोजना के अंतिम स्वरूप और कार्यान्वयन से जुड़ी जानकारी संबंधित विभागों की आगामी कार्ययोजना और निर्णयों के आधार पर स्पष्ट होगी। फिलहाल नीदरलैंड के विशेषज्ञों का हरिद्वार पहुंचकर प्रस्तावित ग्रीन घाट क्षेत्र का निरीक्षण करना कुंभ मेला-2027 की तैयारियों में पर्यावरण और नदी तट प्रबंधन को दिए जा रहे महत्व को दर्शाता है।

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By ATHAR

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