सबसे सटीक ज्वालापुर टाइम्स न्यूज़…
उत्तरकाशी जनपद के बड़कोट में आयोजित सात दिवसीय रवांई शरदोत्सव का गुरुवार को पारंपरिक उत्साह और सांस्कृतिक धूमधाम के साथ शुभारंभ हुआ। मां भगवती की देव डोली की अगवानी, लोकनृत्यों की लय और पहाड़ी वाद्यों की गूंज ने पूरे क्षेत्र में पर्व जैसा माहौल बना दिया। मेले के पहले दिन हजारों लोग आकर्षक प्रस्तुतियों को देखने पहुंचे।
दशक पुरानी सांस्कृतिक विरासत
रवांई शरदोत्सव उत्तराखंड की पर्वतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण आयोजन है। यह मेला बरसों से रवांई घाटी की कला, परंपरा, लोकसंगीत, पर्यटन और सामाजिक सहभागिता का प्रतीक माना जाता है।
इस आयोजन का मूल उद्देश्य क्षेत्र की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करना, स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देना और पर्यटन को नई दिशा देना है। हर वर्ष यह मेला बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों, पर्यटकों और सांस्कृतिक प्रेमियों को आकर्षित करता है। पिछले वर्षों की तुलना में इस बार आयोजन को और अधिक भव्य तथा व्यवस्थित रूप दिया गया है।
सात दिवसीय रवांई शरदोत्सव का शुभारंभ गुरुवार को बड़कोट के हेलीपैड मैदान में हुआ। उद्घाटन समारोह की शुरुआत मां भगवती की देव डोली की अगवानी के साथ हुई, जिसने वातावरण को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ऊर्जा से भर दिया। इसके बाद यमुनोत्री विधायक संजय डोभाल, ब्लॉक प्रमुख सरोज पंवार, बाबा बौख देवता एवं भद्रकाली के देव पश्वाओं ने संयुक्त रूप से पूजा-अर्चना की और मेले की औपचारिक शुरुआत की।
मेले के मुख्य आकर्षण
- पारंपरिक लोक नृत्य और लोक संगीत
- स्थानीय कला और हस्तशिल्प की प्रदर्शनी
- पहाड़ी व्यंजन, परंपरागत खिलौने और ग्रामीण उत्पाद
- सरकारी और गैर-सरकारी विभागों के जागरूकता स्टॉल
- मनोरंजन, खेलकूद और सांस्कृतिक संध्या
- उद्घाटन दिवस पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, वहीं स्थानीय कलाकारों की भागीदारी ने मेले को जमीनी पहचान दी।
उद्घाटन अवसर पर उपस्थित प्रतिनिधियों ने क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखने पर बल दिया।
संजय डोभाल ने कहा—
“रवांई शरदोत्सव न केवल हमारी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है, बल्कि पर्यटन और स्थानीय व्यापार को भी नई गति देता है।”
ब्लॉक प्रमुख सरोज पंवार ने भी मेले को क्षेत्र के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताया
मेले के आयोजन से स्थानीय जनता में उत्साह और आर्थिक गतिविधियों में उल्लेखनीय बढ़त देखने को मिलती है।
हस्तशिल्पकारों, स्थानीय उत्पाद बेचने वालों, पहाड़ी व्यंजन स्टॉल और छोटे व्यापारियों के लिए यह मेला बड़े अवसर के तौर पर उभरता है।
H3: शिक्षा व युवा सहभागिता
मेले में युवाओं और छात्रों की विशेष भागीदारी रहती है, जिससे उन्हें हिमालयी संस्कृति, लोककला और क्षेत्रीय इतिहास को समझने में मदद मिलती है।
स्कूलों ने भी छात्रों को लोकनृत्यों और सांस्कृतिक टीमों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया। bहर वर्ष की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में पर्यटकों के आने की संभावना है।
होटलों, होमस्टे और स्थानीय व्यवसायों को इससे प्रत्यक्ष लाभ मिलता है।
सांस्कृतिक संध्याओं की विशेष प्रस्तुति कार्यक्रम दिनवार
मेले की खास पहचान इसकी रंगारंग सांस्कृतिक संध्याएँ रहती हैं।
इस वर्ष कार्यक्रम का शेड्यूल इस प्रकार है—
- 27 नवंबर: जागर गायक प्रीतम भरतवाण
- 28 नवंबर: हिमाचली लोक गायक अरुण जस्टा, मनोज सागर एवं दीपक चौहान
- 29 नवंबर: जौनसारी लोक गायक अज्जू तोमर और अजय चौहान
- 30 नवंबर: लोक गायिका रेशमा शाह और राजनीकांत सेमवाल
- 1 दिसंबर: हिमाचली नाटी किंग कुलदीप शर्मा
- 2 दिसंबर: प्रसिद्ध गढ़वाली लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी
- 3 दिसंबर: समापन दिवस पर लोकप्रिय पांडवाज बैंड की प्रस्तुति
- ये सभी प्रस्तुतियाँ मेले को उत्तराखंड की बहुरंगी सांस्कृतिक पहचान के रूप में स्थापित करती हैं।
उद्घाटन समारोह में पूर्व चेयरमैन हरिमोहन नेगी, अजवीन पंवार, ललिता भंडारी, नगर पालिकाध्यक्ष विनोद डोभाल, अधिशासी अधिकारी जया नंद सेमवाल,
साथ ही ध्यान सिंह रावत, प्रमोद रावत, कपिल रावत, रविन्द्र रावत, रोहित रावत, पदमेंद्र राणा, अमिता पंवार, सचिन राणा, संजीव राणा, प्रीति चौहान, राजकुमारी, बलबीर असवाल, जनक सिंह राणा, विनोद असवाल सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।यह व्यापक सहभागिता मेले की लोकप्रियता और क्षेत्रीय जुड़ाव को दर्शाती है।
- इस वर्ष स्टॉलों की संख्या अधिक रखी गई है ।
- सांस्कृतिक संध्याओं की लाइनअप पिछले वर्षों की तुलना में और अधिक विविध है।
- आयोजन स्थल पर सुरक्षा, ट्रैफिक व्यवस्था और बैठने की व्यवस्था को मजबूत किया गया है।
- डिजिटल प्रमोशन और सोशल मीडिया आउटरीच से मेले की पहुँच बढ़ाई गई है ।
बड़कोट में आयोजित रवांई शरदोत्सव का यह संस्करण संस्कृति, पर्यटन और स्थानीय विकास का सशक्त संगम पेश कर रहा है। मेले की गतिविधियाँ अगले सात दिनों तक लोगों के लिए मनोरंजन और सीख का अवसर बनेंगी।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सुरक्षित ढंग से मेले का आनंद लें और स्थानीय संस्कृति को सम्मानपूर्वक प्रोत्साहन दें।
यह भी पढ़ें– संविधान दिवस पर सलेमपुर में गूंजा एकता का संकल्प राव आफाक अली ने हज़ारों छात्र–छात्राओं को..
उत्तराखंड की सभी ताज़ा और महत्वपूर्ण ख़बरों के लिए ज्वालापुर टाइम्स न्यूज़ WHATSAPP GROUP से जुड़ें और अपडेट सबसे पहले पाएं
यहां क्लिक करें एक और हर अपडेट आपकी उंगलियों पर!
यदि आप किसी विज्ञापन या अपने क्षेत्र/इलाके की खबर को हमारे न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म पर प्रकाशित कराना चाहते हैं, तो कृपया 7060131584 पर संपर्क करें। आपकी जानकारी को पूरी जिम्मेदारी और भरोसे के साथ प्रसारित किया जाएगा।”

