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उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिला कारागार में बंदियों के पुनर्वास और कौशल विकास के लिए सराहनीय पहल की जा रही है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अल्मोड़ा के निर्देशन में यहां विभिन्न व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम लगातार संचालित किए जा रहे हैं, ताकि बंदी रिहाई के बाद आत्मनिर्भर बन सकें। इस पहल का उद्देश्य बंदियों को केवल सजा तक सीमित न रखकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
पांच दिवसीय अचार निर्माण प्रशिक्षण सफल
इसी क्रम में हाल ही में पांच दिवसीय “अचार निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम” आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण का संचालन श्रीमती गीतांजली भोज द्वारा किया गया। प्रशिक्षण के दौरान बंदियों को स्वच्छ और वैज्ञानिक तरीके से अचार बनाने की विधि सिखाई गई। उन्हें गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, भंडारण और विपणन से जुड़ी व्यवहारिक जानकारी भी दी गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि कम लागत में अचार निर्माण का कार्य शुरू किया जा सकता है, जिससे रिहाई के बाद बंदी स्वयं का छोटा व्यवसाय शुरू कर सकें। यह प्रशिक्षण बंदियों के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नर्सरी एवं सब्जी पौध उत्पादन पर विशेष प्रशिक्षण
अचार निर्माण के बाद अब “नर्सरी एवं सब्जी पौध उत्पादन : स्वरोजगार का सशक्त माध्यम” विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। यह प्रशिक्षण कृषि विज्ञान केंद्र, मटेला के कृषि विशेषज्ञ डॉ. राजेश कुमार द्वारा दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण में बंदियों को नर्सरी प्रबंधन, उन्नत पौध उत्पादन तकनीक, गुणवत्तायुक्त बीज चयन, जैविक खेती की विधियां और विपणन रणनीतियों की जानकारी दी जा रही है। विशेषज्ञों ने बताया कि कम भूमि और सीमित संसाधनों में भी नर्सरी व्यवसाय शुरू किया जा सकता है।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान अधिकार मित्र नीता नेगी कड़ाकोटी भी मौजूद रहीं। उन्होंने बंदियों को कानूनी जागरूकता और पुनर्वास से जुड़ी जानकारी दी। कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि सरकारी योजनाओं और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्वरोजगार के लिए सहायता प्राप्त की जा सकती है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का मानना है कि बंदियों का सामाजिक पुनर्स्थापन बेहद जरूरी है। यदि उन्हें कौशल और रोजगार के अवसर दिए जाएं तो वे दोबारा अपराध की ओर नहीं लौटते और समाज में सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं। इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम सुधारात्मक न्याय प्रणाली को मजबूत करते हैं। बंदियों को आत्मविश्वास और नई शुरुआत का अवसर मिलता है।
अधिकारियों के अनुसार, इन कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल कौशल सिखाना नहीं, बल्कि बंदियों में आत्मसम्मान और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है। रिहाई के बाद यदि बंदी स्वरोजगार अपनाते हैं तो वे आर्थिक रूप से मजबूत बन सकते हैं और अपने परिवार का बेहतर पालन-पोषण कर सकते हैं।
अल्मोड़ा में चल रहे इन कार्यक्रमों की सराहना की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस तरह के प्रशिक्षण नियमित रूप से चलते रहें तो कारागारों को सुधार गृह के रूप में विकसित किया जा सकता है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आगे भी ऐसे पुनर्वासोन्मुख कार्यक्रम जारी रखने की योजना है।
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