पंतनगर में आदिग्राम लाभार्थी संवाद एवं सम्मान समारोह के दौरान जनजातीय महिलाओं और ग्राम प्रधानों को सम्मानित करते अतिथिपंतनगर में आदिग्राम लाभार्थी संवाद एवं सम्मान समारोह के दौरान जनजातीय महिलाओं और ग्राम प्रधानों को सम्मानित करते अतिथि

रिपोर्टर (सचिन शर्मा)

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पंतनगर (ऊधम सिंह नगर), 4 अक्टूबर। उत्तराखंड के जनजातीय बहुल गांवों में डिजिटल तकनीक और सरकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित ‘टेक्नो-सक्षम आदिग्राम’ परियोजना के तहत 17 हजार से अधिक परिवारों को लाभ पहुंचाने का दावा किया गया है। इस परियोजना के माध्यम से करीब 65 हजार जनजातीय नागरिकों का डिजिटल और जियो-टैग्ड डेटाबेस तैयार किया गया। परियोजना की उपलब्धियों और लाभार्थियों के अनुभव साझा करने के लिए रविवार को गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के डॉ. रतन सिंह सभागार में ‘आदिग्राम: लाभार्थी संवाद एवं सम्मान समारोह’ आयोजित किया गया।

समारोह की अध्यक्षता पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आचार्य बालकृष्ण ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) शिवेंद्र कुमार कश्यप उपस्थित रहे। कार्यक्रम में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 300 लाभार्थी महिलाओं, 42 ग्राम प्रधानों और पतंजलि की 20 से अधिक योग शिक्षिकाओं को सम्मानित किया गया। आयोजन में परियोजना के तहत हुए कार्यों, डिजिटल सुविधाओं और जनजातीय क्षेत्रों में आजीविका के अवसरों पर चर्चा की गई।

उत्तराखंड के 64 जनजातीय बहुल गांवों में संचालित हुई परियोजना

‘टेक्नो-सक्षम आदिग्राम’ परियोजना को जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार और जनजाति कल्याण निदेशालय, उत्तराखंड के सहयोग से दिव्य योग मंदिर न्यास द्वारा संचालित किया गया। परियोजना के अंतर्गत उत्तराखंड के 64 जनजातीय बहुल गांवों का चयन किया गया था। इनमें ऊधम सिंह नगर जिले के 42 गांव शामिल रहे।

पंतनगर में आदिग्राम लाभार्थी संवाद एवं सम्मान समारोह के दौरान जनजातीय महिलाओं और ग्राम प्रधानों को सम्मानित करते अतिथि

परियोजना का मुख्य उद्देश्य डिजिटल तकनीक, आंकड़ों और स्थानीय समुदाय की भागीदारी के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों में समावेशी विकास को बढ़ावा देना था। इसके लिए गांवों में परिवारों की जानकारी जुटाने, सरकारी योजनाओं की पात्रता पहचानने और कृषि तथा आजीविका से जुड़ी डिजिटल सुविधाओं तक पहुंच बनाने पर काम किया गया। आयोजकों के अनुसार, सभी चयनित गांवों में परिवारों और प्रमुख ग्राम परिसंपत्तियों की जियो-टैगिंग पूरी की गई। इससे गांवों की जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों से जुड़ा डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिली।

17 हजार से अधिक परिवारों और 65 हजार नागरिकों का डिजिटल रिकॉर्ड

परियोजना की प्रमुख उपलब्धियों में 17 हजार से अधिक परिवारों और लगभग 65 हजार जनजातीय नागरिकों का डिजिटल एवं जियो-टैग्ड डेटाबेस तैयार करना शामिल है। परियोजना से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, चयनित गांवों के परिवारों और प्रमुख ग्राम परिसंपत्तियों की 100 प्रतिशत जियो-टैगिंग पूरी की गई।

इस डिजिटल रिकॉर्ड का उद्देश्य गांवों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को समझने तथा विकास योजनाओं को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप तैयार करने में सहायता देना है। परियोजना के अंतर्गत सभी 64 गांवों के लिए साक्ष्य-आधारित विकास योजनाएं भी तैयार की गईं। आयोजकों की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस पहल से सरकारी योजनाओं के संभावित लाभार्थियों की पहचान और गांवों के विकास से जुड़े कार्यों की योजना बनाने में मदद मिली है।

आदिग्राम परियोजना के तहत कृषि क्षेत्र में भी डिजिटल सुविधाओं का विस्तार किया गया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पांच हजार से अधिक किसानों को डिजिटल कृषि प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया। इसका उद्देश्य किसानों को कृषि से जुड़ी जानकारी और बाजार तक पहुंच के लिए तकनीक का इस्तेमाल करने में मदद देना था।

परियोजना में ‘अन्नदाता’ ऐप को भी शामिल किया गया। यह ऐप किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने की सुविधा देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसके माध्यम से किसानों को अपने उत्पादों के विपणन के लिए डिजिटल मंच उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में कृषि से संबंधित तकनीकी पहलों पर भी चर्चा हुई। पतंजलि अनुसंधान संस्थान, हरिद्वार की ओर से विकसित ‘धरती का डॉक्टर’ मृदा परीक्षण यंत्र का प्रदर्शन किया गया। इस उपकरण और संस्थान की पुस्तकों को किसानों, शोधकर्ताओं तथा विशेषज्ञों ने देखा।

परियोजना के अंतर्गत 15 हजार से अधिक लोगों को आजीविका और कौशल विकास से संबंधित प्रशिक्षण दिए जाने की जानकारी साझा की गई। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना तथा लोगों को अपनी क्षमताओं के अनुसार आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना रहा।

स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को डिजिटल मार्केटिंग के साथ अन्नदाता, इरुला और सेवा सर्विस ऐप के उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में सम्मानित की गई 300 लाभार्थी महिलाओं की भागीदारी को परियोजना के सामुदायिक प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया। परियोजना के आंकड़ों के अनुसार, 200 से अधिक जनजातीय शिल्पकारों को ‘इरुला’ ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया। इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य स्थानीय हस्तशिल्प और उत्पादों को डिजिटल बाजार तक पहुंचाने में मदद करना है। वहीं, सेवा सर्विस ऐप को सेवा प्रबंधन की प्रक्रिया सरल बनाने के लिए शामिल किया गया।

आदिग्राम परियोजना के लाभार्थी संवाद एवं सम्मान समारोह का आयोजन

सरकारी योजनाओं से जोड़ने और डिजिटल साक्षरता में सुधार का दावा

आदिग्राम परियोजना के तहत जनजातीय परिवारों को पात्र सरकारी योजनाओं से जोड़ने पर भी काम किया गया। आयोजकों के अनुसार, 50 प्रतिशत से अधिक परिवारों को उनकी पात्रता के अनुरूप सरकारी योजनाओं से जोड़ा गया। परियोजना से जुड़े आंकड़ों में डिजिटल साक्षरता में 30 से 40 प्रतिशत सुधार और लाभार्थियों की आय में 20 से 30 प्रतिशत वृद्धि दर्ज किए जाने की जानकारी भी दी गई। ये आंकड़े परियोजना की ओर से साझा किए गए हैं। इनके आधार, आकलन की अवधि और मापन की पद्धति का विस्तृत विवरण उपलब्ध प्रेस विज्ञप्ति में नहीं दिया गया है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आचार्य बालकृष्ण ने संस्थान की कृषि संबंधी पहलों की समीक्षा की और नई संभावनाओं पर प्रकाश डाला। समारोह में कृषि, शोध और तकनीक से जुड़े विषयों को भी स्थान दिया गया। पतंजलि अनुसंधान संस्थान की ओर से विकसित मृदा परीक्षण यंत्र ‘धरती का डॉक्टर’ का प्रदर्शन कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहा। इसके साथ संस्थान की पुस्तकों को भी प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम में पतंजलि के वैज्ञानिक और साध्वी बहनें भी मौजूद रहीं।

आदिग्राम परियोजना के अनुभवों और उपलब्धियों को साझा करने के लिए आयोजित यह समारोह जनजातीय क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं, कौशल प्रशिक्षण और सामुदायिक भागीदारी के महत्व को सामने लाने का अवसर बना। परियोजना के तहत तैयार डिजिटल रिकॉर्ड, कृषि प्लेटफॉर्म और आजीविका से जुड़े प्रयासों का उद्देश्य गांवों की जरूरतों के अनुरूप विकास योजनाओं को आगे बढ़ाना है।

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By ATHAR

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