हरिद्वार में मत्स्य विभाग की समीक्षा बैठक, ऑर्नामेंटल फिशरीज क्लस्टरों की प्रगति पर चर्चाहरिद्वार में मत्स्य विभाग की समीक्षा बैठक, ऑर्नामेंटल फिशरीज क्लस्टरों की प्रगति पर चर्चा

रिपोर्टर (सचिन शर्मा)

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हरिद्वार 2026। जनपद में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने, सरकारी योजनाओं का लाभ अधिकाधिक लोगों तक पहुंचाने और स्वरोजगार के अवसर विकसित करने के उद्देश्य से मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में मत्स्य विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभागीय योजनाओं की प्रगति, अब तक हुए व्यय और इस वर्ष विकसित किए जा रहे ऑर्नामेंटल फिशरीज क्लस्टरों की स्थिति की समीक्षा की गई। मुख्य विकास अधिकारी ने अधिकारियों को योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करने और निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए।

बैठक में सहायक निदेशक मत्स्य सहित सभी ब्लॉक प्रभारी मौजूद रहे। सहायक निदेशक ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से विभाग की तीन प्रमुख योजनाओं, उनकी वर्तमान स्थिति और अब तक किए गए व्यय की जानकारी दी। इसके साथ ही बहादराबाद और रुड़की क्षेत्र में विकसित किए जा रहे तीन ऑर्नामेंटल फिशरीज क्लस्टरों की प्रगति से भी अधिकारियों को अवगत कराया गया।

मत्स्य विभाग की योजनाओं की हुई समीक्षा

बैठक के दौरान मत्स्य विभाग की ओर से संचालित योजनाओं और विभागीय कार्यों की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई। सहायक निदेशक मत्स्य ने पीपीटी प्रस्तुतीकरण के जरिए विभाग की तीन प्रमुख योजनाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने योजनाओं के अंतर्गत अब तक हुई प्रगति और व्यय की स्थिति से मुख्य विकास अधिकारी को अवगत कराया।

समीक्षा के दौरान योजनाओं के क्रियान्वयन, निर्धारित लक्ष्यों और पात्र लोगों तक सुविधाएं पहुंचाने जैसे विषयों पर ध्यान दिया गया। मुख्य विकास अधिकारी ने अधिकारियों से कहा कि विभागीय योजनाओं का लाभ केवल जानकारी रखने वाले लोगों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अधिकाधिक पात्र और इच्छुक लोगों को भी इनके बारे में बताया जाना चाहिए। उन्होंने योजनाओं के प्रचार-प्रसार में तेजी लाने और व्यय की प्रगति बढ़ाने के निर्देश दिए। साथ ही निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए विभागीय स्तर पर प्रभावी कार्ययोजना के साथ काम करने पर जोर दिया।

बैठक में इस वर्ष जनपद में विकसित किए जा रहे तीन ऑर्नामेंटल फिशरीज क्लस्टरों की प्रगति की जानकारी भी प्रस्तुत की गई। विभाग के अनुसार, इनमें एक क्लस्टर बहादराबाद क्षेत्र में और दो क्लस्टर रुड़की क्षेत्र में स्थापित किए जा रहे हैं।

ऑर्नामेंटल फिशरीज का संबंध सजावटी मछलियों के पालन और उनसे जुड़ी गतिविधियों से है। इस क्षेत्र में मछलियों के पालन, देखभाल और बाजार की मांग के अनुसार उत्पादन जैसी गतिविधियों के जरिए आजीविका के अवसर विकसित किए जा सकते हैं। क्लस्टर विकसित करने का उद्देश्य संबंधित क्षेत्र में मत्स्य पालन की गतिविधियों को बढ़ावा देना और इच्छुक लोगों को इस क्षेत्र से जोड़ने के प्रयासों को आगे बढ़ाना है। बैठक में इन क्लस्टरों की प्रगति की समीक्षा करते हुए विभागीय योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया गया।

सजावटी मछलियों के पालन से स्वरोजगार बढ़ाने पर जोर

मुख्य विकास अधिकारी ने ऑर्नामेंटल फिशरीज यानी सजावटी मछलियों के पालन को स्वरोजगार के एक संभावित अवसर के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के बारे में अधिकाधिक लोगों को जानकारी दी जाए, ताकि युवा और अन्य इच्छुक व्यक्ति इसे आजीविका के विकल्प के रूप में समझ सकें।

सजावटी मछलियों का पालन पारंपरिक मत्स्य पालन से अलग एक विशेष गतिविधि है। इसमें मछलियों की प्रजातियों, पालन की परिस्थितियों, देखभाल और बाजार की मांग को समझना जरूरी होता है। उचित जानकारी और प्रशिक्षण के साथ इच्छुक लोग इस क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों का आकलन कर सकते हैं। बैठक में अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि ऑर्नामेंटल फिशरीज से जुड़ी योजनाओं की जानकारी संभावित लाभार्थियों तक पहुंचाई जाए। इसका उद्देश्य लोगों को मत्स्य पालन की गतिविधियों से जोड़ना और स्वरोजगार के नए विकल्पों के बारे में जागरूक करना है।

मुख्य विकास अधिकारी ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में अच्छा कार्य कर रहे मत्स्य पालकों की सफलता की कहानियों को व्यापक स्तर पर प्रचारित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे लोगों के अनुभवों और उपलब्धियों को समाचार पत्रों तथा अन्य प्रचार माध्यमों के जरिए जनसामान्य तक पहुंचाया जाए।

सफल मत्स्य पालकों के अनुभव सामने आने से दूसरे इच्छुक लोगों को इस क्षेत्र की संभावनाओं, काम करने के तरीकों और सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में जानकारी मिल सकती है। इससे लोगों को योजनाओं के प्रति जागरूक करने और मत्स्य पालन को आजीविका के विकल्प के रूप में समझने में मदद मिल सकती है। मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि विभागीय योजनाओं का प्रचार केवल औपचारिक जानकारी देने तक सीमित नहीं होना चाहिए। योजनाओं से लाभ प्राप्त करने वाले लोगों के वास्तविक अनुभव भी सामने लाए जाने चाहिए, ताकि अन्य लोग उनसे प्रेरणा लेकर उपलब्ध अवसरों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मत्स्य विभाग की योजनाओं का लाभ अधिकाधिक पात्र और इच्छुक लोगों तक पहुंचाने के लिए समन्वित प्रयास किए जाएं। इसके लिए योजनाओं की जानकारी, पात्रता संबंधी विवरण और उपलब्ध अवसरों का प्रचार-प्रसार प्रभावी तरीके से करने पर जोर दिया गया।

उन्होंने विभागीय योजनाओं के अंतर्गत व्यय की प्रगति बढ़ाने और निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के निर्देश भी दिए। अधिकारियों से अपेक्षा की गई कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में योजनाओं की जानकारी पहुंचाने और संभावित लाभार्थियों तक संपर्क स्थापित करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं। मत्स्य पालन से संबंधित योजनाओं के बारे में जानकारी उपलब्ध होने से इच्छुक लोगों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि वे अपनी परिस्थितियों और पात्रता के अनुसार किस प्रकार लाभ उठा सकते हैं। हालांकि, किसी भी योजना का लाभ संबंधित नियमों, पात्रता और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही दिया जाता है।

बैठक में मत्स्य पालन को केवल उत्पादन गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि आजीविका और स्वरोजगार के संभावित साधन के रूप में बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। विशेष रूप से सजावटी मछलियों के पालन से जुड़ी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और इच्छुक लोगों को इनके बारे में जागरूक करने के निर्देश दिए गए। इस दिशा में योजनाओं की जानकारी, सफल मत्स्य पालकों के अनुभव और क्लस्टरों की प्रगति को जनसामान्य तक पहुंचाना महत्वपूर्ण माना गया। इससे लोगों को मत्स्य पालन के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी मिल सकती है और वे अपनी रुचि तथा संसाधनों के आधार पर इस क्षेत्र में अवसर तलाश सकते हैं। विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों को प्रचार-प्रसार, लक्ष्य पूर्ति और व्यय की प्रगति पर ध्यान देने को कहा गया।

विभागीय अधिकारियों को कार्ययोजना के साथ काम करने के निर्देश

समीक्षा बैठक के अंत में मुख्य विकास अधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं के प्रचार-प्रसार, व्यय की प्रगति और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए प्रभावी कार्ययोजना के साथ काम किया जाए। उन्होंने मत्स्य पालन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और पात्र लोगों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाने पर जोर दिया। बैठक में सहायक निदेशक मत्स्य और सभी ब्लॉक प्रभारी उपस्थित रहे। विभाग की ओर से योजनाओं की वर्तमान स्थिति और क्लस्टरों की प्रगति का विवरण प्रस्तुत किया गया।

हरिद्वार में मत्स्य विभाग की योजनाओं की समीक्षा के दौरान सजावटी मछलियों के पालन को बढ़ावा देने, सफल मत्स्य पालकों की कहानियों को सामने लाने और विभागीय लक्ष्यों को समय पर पूरा करने पर विशेष ध्यान दिया गया। अब संबंधित अधिकारियों को इन निर्देशों के अनुसार योजनाओं के प्रचार-प्रसार और क्रियान्वयन की दिशा में कार्य करना है।

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By ATHAR

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