रिपोर्टर (सचिन शर्मा)
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हरिद्वार 2026। जनपद में सरकारी संस्थानों की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए प्रभारी जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र ने शुक्रवार को औरंगाबाद स्थित आंगनबाड़ी केंद्र, आयुष्मान आरोग्यम मंदिर और प्राथमिक विद्यालय आन्नेकी प्रथम का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उपस्थिति अभिलेखों, स्वास्थ्य केंद्र के संचालन, मध्याह्न भोजन व्यवस्था और विद्यार्थियों को मिलने वाली शैक्षणिक सामग्री से संबंधित कमियां सामने आईं। इस पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान आंगनबाड़ी केंद्र में 18 अक्टूबर से बच्चों की उपस्थिति दर्ज नहीं मिली। आयुष्मान आरोग्यम मंदिर बंद पाया गया। वहीं, प्राथमिक विद्यालय आन्नेकी प्रथम के स्टोर में एक्सपायरी डेट का मिल्क पाउडर और बिना वितरण के रखी लगभग 500 किताबें मिलीं। विद्यालय में मध्याह्न भोजन चूल्हे पर बनता पाया गया, जबकि वहां गैस कनेक्शन उपलब्ध नहीं था। भोजन माता भी निरीक्षण के समय अनुपस्थित मिलीं।
आंगनबाड़ी केंद्र में 18 अक्टूबर से उपस्थिति दर्ज नहीं
प्रभारी जिलाधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र ने सबसे पहले औरंगाबाद स्थित आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण किया। यहां अभिलेखों की जांच के दौरान पाया गया कि 18 अक्टूबर से बच्चों की उपस्थिति दर्ज नहीं की गई थी। सरकारी केंद्र में उपस्थिति रिकॉर्ड नियमित रूप से अद्यतन नहीं मिलने पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की।
उन्होंने संबंधित आंगनबाड़ी कार्यकत्री का वेतन रोकने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि सरकारी योजनाओं के संचालन में लापरवाही नहीं होनी चाहिए और सभी जरूरी अभिलेख नियमानुसार नियमित रूप से अपडेट रखे जाने चाहिए।
आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के पोषण, प्रारंभिक देखभाल और संबंधित सरकारी सेवाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में केंद्र की नियमित गतिविधियों और रिकॉर्ड का सही तरीके से संधारण जरूरी है। निरीक्षण के दौरान सामने आई कमी को देखते हुए संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
बंद मिला आयुष्मान आरोग्यम मंदिर, सीएमओ से मांगा स्पष्टीकरण
आंगनबाड़ी केंद्र के बाद प्रभारी जिलाधिकारी ने औरंगाबाद स्थित आयुष्मान आरोग्यम मंदिर का निरीक्षण किया। निरीक्षण के समय केंद्र बंद पाया गया। इस पर डॉ. मिश्र ने नाराजगी व्यक्त करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) से स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से यह स्पष्ट करने को कहा कि केंद्र किन कारणों से बंद था। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाए रखने और आम लोगों को निर्धारित सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

स्वास्थ्य केंद्रों का नियमित संचालन ग्रामीण और स्थानीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण होता है। निर्धारित समय पर केंद्र खुलने और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होने से नागरिकों को जरूरी परामर्श और सुविधाएं प्राप्त करने में मदद मिलती है। निरीक्षण के दौरान केंद्र बंद मिलने के मामले में सीएमओ से स्पष्टीकरण मांगा गया है। उपलब्ध जानकारी में केंद्र बंद रहने के कारणों का विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए इस संबंध में स्थिति स्पष्टीकरण और आगे की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
इसके बाद प्रभारी जिलाधिकारी ने प्राथमिक विद्यालय आन्नेकी प्रथम का निरीक्षण किया। उन्होंने विद्यालय में शिक्षा की गुणवत्ता, मध्याह्न भोजन की व्यवस्था और उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान विद्यालय के स्टोर में एक्सपायरी डेट का मिल्क पाउडर पाया गया। इस पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए खाद्य सामग्री के रखरखाव और उपयोग में निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। विद्यालयों में बच्चों के लिए रखी जाने वाली खाद्य सामग्री की समय-समय पर जांच और सुरक्षित भंडारण महत्वपूर्ण है। एक्सपायरी डेट पार कर चुकी सामग्री को बच्चों के भोजन में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
डॉ. मिश्र ने संबंधित अधिकारियों को व्यवस्था में सुधार करने और विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जाने वाली सामग्री के संबंध में जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान सामने आई इस कमी ने विद्यालय में खाद्य सामग्री के रखरखाव और रिकॉर्ड की नियमित निगरानी की आवश्यकता को भी सामने रखा।
विद्यालय के स्टोर की जांच के दौरान लगभग 500 किताबें बिना वितरण के रखी मिलीं। किताबें विद्यार्थियों तक नहीं पहुंचने की स्थिति पर प्रभारी जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई और संबंधित व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए।
विद्यार्थियों को समय पर पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराना शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। किताबें स्टोर में रखी रहने के बजाय जरूरतमंद विद्यार्थियों तक समय पर पहुंचनी चाहिए, ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो। डॉ. मिश्र ने निर्देश दिए कि विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराई गई सामग्री का वितरण सुनिश्चित किया जाए। किताबों के वितरण में देरी या अन्य कमियों के कारणों की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों को निर्देशों के अनुरूप व्यवस्था दुरुस्त करनी होगी।
ल्हे पर बन रहा था मध्याह्न भोजन, गैस कनेक्शन नहीं मिला
विद्यालय में मध्याह्न भोजन व्यवस्था की जांच के दौरान पाया गया कि विद्यार्थियों के लिए भोजन चूल्हे पर तैयार किया जा रहा था और विद्यालय में गैस कनेक्शन उपलब्ध नहीं था। इस स्थिति पर प्रभारी जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की। विद्यालयों में मध्याह्न भोजन की व्यवस्था को सुरक्षित और निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित करना जरूरी है। इसके लिए भोजन तैयार करने की व्यवस्था, रसोई की स्थिति, खाद्य सामग्री का सुरक्षित रखरखाव और जिम्मेदार कर्मचारियों की उपस्थिति जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया जाना आवश्यक है।
निरीक्षण के दौरान भोजन माता भी अनुपस्थित पाई गईं। इस पर प्रभारी जिलाधिकारी ने भोजन माता और प्रधानाचार्य का वेतन रोकने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यालय में मध्याह्न भोजन की व्यवस्था और आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी है।

निरीक्षण के दौरान डॉ. ललित नारायण मिश्र ने विद्यालय के छात्र-छात्राओं से बातचीत भी की। उन्होंने बच्चों से उनकी पढ़ाई और शिक्षण व्यवस्था के बारे में जानकारी ली तथा सवाल पूछकर उनकी शैक्षणिक समझ का आकलन किया।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता बेहतर पाई गई। इससे स्पष्ट हुआ कि निरीक्षण में सामने आई व्यवस्थागत कमियों के साथ पढ़ाई की स्थिति का भी जायजा लिया गया। विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए शिक्षकों की नियमित उपस्थिति, विद्यार्थियों को समय पर पाठ्यसामग्री उपलब्ध कराना और जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था करना महत्वपूर्ण है। निरीक्षण के दौरान इन सभी पहलुओं की समीक्षा की गई।
प्रभारी जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकारी संस्थानों में व्यवस्थाएं नियमित रूप से दुरुस्त रखी जाएं और आमजन तथा विद्यार्थियों को निर्धारित सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि निरीक्षण का उद्देश्य व्यवस्थाओं में सुधार लाना और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक सुनिश्चित करना है।
निरीक्षण में सामने आई कमियों के बाद आंगनबाड़ी कार्यकत्री का वेतन रोकने, आयुष्मान आरोग्यम मंदिर बंद मिलने पर सीएमओ से स्पष्टीकरण लेने तथा विद्यालय में भोजन माता और प्रधानाचार्य का वेतन रोकने के निर्देश दिए गए। इन निर्देशों के बाद संबंधित विभागों की जिम्मेदारी होगी कि वे सामने आई कमियों की समीक्षा करें और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार आवश्यक कदम उठाएं। सरकारी संस्थानों में नियमित निरीक्षण और निगरानी से सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
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