रिपोर्टर (सचिन शर्मा)
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हरिद्वार 2026। शहर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में हरिद्वार में 37 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी तेज हो गई है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत जिले को आवंटित इन बसों के संचालन को लेकर शुक्रवार को सीसीआर भवन में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रस्तावित बस मार्गों, बसों की तैनाती, संचालन व्यवस्था, बस स्टॉप, चार्जिंग और डिपो जैसी व्यवस्थाओं पर चर्चा हुई।
बैठक की संयुक्त अध्यक्षता मेलाधिकारी सोनिका और जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने की। बैठक में अधिकारियों ने प्रस्तावित रूटों की जानकारी दी और शहर के प्रमुख क्षेत्रों को इलेक्ट्रिक बस नेटवर्क से जोड़ने को लेकर योजना पर चर्चा की। प्रस्ताव के अनुसार हरिद्वार शहर के लगभग 15 किलोमीटर मुख्य क्षेत्र में सर्कुलर बस सेवा चलाने की योजना है। इसके साथ ही सात फीडर मार्गों के माध्यम से शहर के मुख्य क्षेत्र, औद्योगिक क्षेत्रों और प्रमुख मार्गों को इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा की आधिकारिक जानकारी में भी हरिद्वार के लिए 37 ई-बसों का आवंटन दर्ज है। योजना का उद्देश्य शहरों में सार्वजनिक बस परिवहन को बढ़ाना और इलेक्ट्रिक बसों के माध्यम से स्वच्छ एवं आधुनिक परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देना है।
बैठक में सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) निखिल शर्मा ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना की प्रस्तावित व्यवस्था की जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार हरिद्वार के लिए प्रस्तावित ई-बसें 9 मीटर लंबी, 30 सीटर और वातानुकूलित होंगी। इन बसों को शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में शामिल किए जाने से यात्रियों को शहर के विभिन्न क्षेत्रों के बीच आवागमन के लिए एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध होगा।
योजना के तहत बस संचालन को केवल एक मार्ग तक सीमित रखने के बजाय सर्कुलर रूट और फीडर रूट के माध्यम से नेटवर्क तैयार करने की योजना है। इससे शहर के अलग-अलग हिस्सों को आपस में जोड़ने में मदद मिलेगी। PM-eBus Sewa के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार 9 मीटर की बसों के लिए योजना में प्रतिदिन 180 किलोमीटर के संचालन का प्रावधान बताया गया है। योजना में चार्जिंग और डिपो जैसी आधारभूत सुविधाओं को भी शामिल किया गया है।
प्रस्तावित योजना में हरिद्वार रेलवे स्टेशन को सर्कुलर बस सेवा का प्रमुख शुरुआती बिंदु रखा गया है। प्रस्तावित मार्ग रेलवे स्टेशन से शुरू होकर शहर के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों से गुजरते हुए दोबारा रेलवे स्टेशन तक पहुंचने की योजना पर आधारित है। प्रस्तावित सर्कुलर मार्ग में हरिद्वार रेलवे स्टेशन, ऋषिकुल, चंद्राचार्य चौक, भगत सिंह चौक, बीएचईएल सेक्टर-2 बैरियर, ज्वालापुर, दुर्गा चौक, शंकराचार्य चौक, सिंहद्वार, डामकोठी और तुलसी चौक शामिल हैं। इस मार्ग का उद्देश्य शहर के मुख्य हिस्से में यात्रियों को एक निरंतर बस कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। सर्कुलर सेवा के चलते यात्री शहर के अलग-अलग प्रमुख क्षेत्रों के बीच बस के माध्यम से आवागमन कर सकेंगे।
सर्कुलर मार्ग के साथ सात फीडर मार्ग प्रस्तावित किए गए हैं। इन मार्गों के माध्यम से शहर के बाहरी हिस्सों, औद्योगिक क्षेत्रों और प्रमुख संपर्क मार्गों को सर्कुलर रूट से जोड़ने की योजना है। प्रस्तावित फीडर नेटवर्क में रोशनाबाद, पेंटागन मॉल, शिवालिक नगर, बीएचईएल सेक्टर-2, पतंजलि, जटवाड़ा पुल, दुर्गा चौक, ज्वालापुर और बहादराबाद जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा धनपुरा, जगजीतपुर, सिंहद्वार, शांतिकुंज और लालढांग दिशा को भी नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। अधिकारियों के अनुसार प्रस्तावित मार्गों और बस स्टॉप का निर्धारण क्षेत्र सर्वेक्षण के आधार पर किया गया है। इसका उद्देश्य यात्रियों की आवश्यकता और प्रमुख यातायात क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए बस नेटवर्क तैयार करना है।

कनखल, पुराना आरटीओ और सप्तऋषि भी नेटवर्क में शामिल
बैठक में जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने प्रस्तावित बस नेटवर्क में कुछ संशोधन के निर्देश दिए। उन्होंने कनखल चौक, पुराना आरटीओ और सप्तऋषि क्षेत्र को भी ई-बस नेटवर्क में शामिल करने के निर्देश दिए। इन क्षेत्रों को नेटवर्क में शामिल करने का उद्देश्य अधिक यात्रियों और स्थानीय आबादी को सार्वजनिक परिवहन सुविधा से जोड़ना है। कनखल और सप्तऋषि हरिद्वार के महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं, जबकि पुराना आरटीओ क्षेत्र भी शहर के यातायात नेटवर्क का हिस्सा रहा है। डीएम के निर्देश के बाद अधिकारियों को प्रस्तावित रूट में आवश्यक संशोधन और क्षेत्रीय सर्वेक्षण के आधार पर बस स्टॉप की व्यवस्था करने की दिशा में काम करना होगा।
अधिकारियों के अनुसार शुरुआती चरण में ई-बसों के संचालन में सर्कुलर मार्ग को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ रोशनाबाद, बहादराबाद और पतंजलि क्षेत्र की ओर जाने वाले गलियारों को भी प्राथमिकता देने की योजना है। बैठक में बताया गया कि इन प्रमुख मार्गों पर बसों के बीच प्रतीक्षा समय लगभग 10 मिनट के आसपास रखने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि वास्तविक अंतराल बसों की उपलब्धता, संचालन व्यवस्था और मार्ग की स्थिति के आधार पर निर्धारित किया जाएगा। शेष प्रस्तावित मार्गों पर उपलब्ध बसों की संख्या के अनुसार सेवा संचालित किए जाने की योजना है।
ई-बस सेवा शुरू करने के साथ यात्रियों की सुविधा के लिए प्रस्तावित मार्गों पर बस स्टॉप भी तैयार किए जाएंगे। बस स्टॉप के स्थान का निर्धारण क्षेत्रीय सर्वेक्षण और यात्रियों की जरूरत को ध्यान में रखकर किया जाना प्रस्तावित है। बस स्टॉप के माध्यम से यात्रियों को निर्धारित स्थानों पर बस सेवा मिलने की सुविधा होगी। इससे सड़क पर अनियंत्रित तरीके से बस रोकने की स्थिति को कम करने में भी मदद मिल सकती है। इलेक्ट्रिक बस सेवा के साथ आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था विकसित करने की योजना में बस स्टॉप, चार्जिंग व्यवस्था और डिपो को महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
ई-बसों के संचालन के लिए केवल बसों की उपलब्धता पर्याप्त नहीं होगी। इसके लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और डिपो की व्यवस्था भी जरूरी होगी। इसी को देखते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को चार्जिंग और डिपो से जुड़ी व्यवस्थाएं समय पर पूरी करने के निर्देश दिए। PM-eBus Sewa की आधिकारिक जानकारी के अनुसार योजना में इलेक्ट्रिक बसों के लिए डिपो और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर को भी शामिल किया गया है। योजना में पीछे के मीटर यानी Behind-the-Meter पावर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए केंद्रीय सहायता का प्रावधान बताया गया है। हरिद्वार में ई-बस संचालन की तैयारी के साथ चार्जिंग व्यवस्था को समय पर तैयार करना इसलिए भी महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि बसों का नियमित संचालन इसी बुनियादी ढांचे पर निर्भर करेगा।
हरिद्वार धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों के कारण बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही वाला शहर है। शहर के भीतर सार्वजनिक परिवहन की जरूरत को देखते हुए इलेक्ट्रिक बस नेटवर्क को एक अतिरिक्त परिवहन विकल्प के रूप में विकसित करने की योजना है।
सर्कुलर और फीडर रूट की व्यवस्था से रेलवे स्टेशन, ज्वालापुर, बीएचईएल, शिवालिक नगर, बहादराबाद, पतंजलि, कनखल और अन्य क्षेत्रों के बीच संपर्क बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। ई-बसों के संचालन से यात्रियों को वातानुकूलित सार्वजनिक परिवहन सुविधा मिलने की उम्मीद है। साथ ही इलेक्ट्रिक बसें पारंपरिक ईंधन आधारित बसों की तुलना में कम स्थानीय प्रदूषण वाले सार्वजनिक परिवहन विकल्प के रूप में इस्तेमाल की जाती हैं। केंद्र सरकार की PM-eBus Sewa योजना का उद्देश्य भी स्वच्छ और आधुनिक शहरी परिवहन को बढ़ावा देना है।\
शुक्रवार को हुई बैठक में प्रस्तावित मार्गों और संचालन व्यवस्था पर समीक्षा के बाद संबंधित अधिकारियों को आवश्यक तैयारियां आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। अब रूट सर्वे, बस स्टॉप, डिपो और चार्जिंग व्यवस्था से जुड़े कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करना महत्वपूर्ण होगा। हरिद्वार के लिए 37 ई-बसों का आवंटन पहले से योजना के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज है। अब जिले में इन बसों को किस चरण में और किस समय से नियमित रूप से संचालित किया जाएगा, यह आगे की प्रशासनिक और संचालन संबंधी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। बैठक में नगर आयुक्त नंदन कुमार, अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती, एआरटीओ प्रशासन नेहा झा, एआरटीओ रुड़की जितेंद्र चंद्र, प्रभारी निरीक्षक यातायात संदीप नेगी और उपनिरीक्षक यातायात मुकेश कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
हरिद्वार में प्रस्तावित ई-बस नेटवर्क की खास बात यह है कि इसमें केवल शहर के मुख्य हिस्से को ही नहीं, बल्कि औद्योगिक क्षेत्रों और प्रमुख संपर्क मार्गों को भी जोड़ने की योजना है। सर्कुलर रूट के साथ फीडर मार्गों की व्यवस्था से नेटवर्क को व्यापक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। डीएम के निर्देश के बाद कनखल चौक, पुराना आरटीओ और सप्तऋषि क्षेत्र को भी प्रस्तावित नेटवर्क में शामिल किया जाना है। इससे शहर के अधिक क्षेत्रों को सार्वजनिक परिवहन सुविधा से जोड़ने का रास्ता खुल सकता है। 37 इलेक्ट्रिक बसों, प्रस्तावित सर्कुलर रूट, सात फीडर मार्गों, नए बस स्टॉप और चार्जिंग-डिपो व्यवस्था के तैयार होने के बाद हरिद्वार की शहरी बस सेवा में एक नया विकल्प जुड़ सकता है। फिलहाल प्रशासन और परिवहन विभाग की ओर से योजना को संचालन योग्य बनाने के लिए तैयारियां आगे बढ़ाई जा रही हैं।
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