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रिपोर्टर (सचिन शर्मा)
देहरादून। मदारिस-ए-अरबिया के तस्दीकनामा जारी करने की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और दस्तावेज आधारित बनाने की दिशा में दफ़्तर-ए-शहर क़ाज़ी, देहरादून की ओर से नई व्यवस्था तैयार की जा रही है। इसके तहत तस्दीक के लिए निर्धारित फॉर्म के साथ मदरसों से संबंधित जरूरी दस्तावेज और संस्थान की बुनियादी जानकारी उपलब्ध कराना आवश्यक होगा। दफ़्तर-ए-शहर क़ाज़ी के अनुसार, ईद के बाद से इस विषय पर लगातार अध्ययन और आवश्यक सुधारों को लेकर काम किया जा रहा है। विभिन्न प्रमाणन और सत्यापन प्रक्रियाओं में इस्तेमाल होने वाले फॉर्मेट का अध्ययन करने के बाद मदरसों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फार्म बराय तस्दीक नामा तैयार कराया गया है। इसे जल्द ही सार्वजनिक किए जाने की बात कही गई है।
तस्दीकनामा प्रक्रिया को दस्तावेज आधारित बनाने की तैयारी
नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य तस्दीकनामा जारी करने की प्रक्रिया को केवल औपचारिकता तक सीमित रखने के बजाय दस्तावेजों और उपलब्ध जानकारी के सत्यापन से जोड़ना है। इसके तहत तस्दीक के लिए आने वाले मदरसों को निर्धारित फॉर्म भरने के साथ आवश्यक अभिलेख भी उपलब्ध कराने होंगे। दफ़्तर-ए-शहर क़ाज़ी के मुताबिक दस्तावेजों और उपलब्ध सूचनाओं की जांच के बाद ही तस्दीकनामा जारी किया जाएगा। आवश्यकता महसूस होने पर संबंधित मदरसे का मौके पर जाकर सत्यापन भी किया जा सकता है। इस व्यवस्था के तहत प्रत्येक मदरसे से जुड़ा रिकॉर्ड व्यवस्थित तरीके से सुरक्षित रखने की तैयारी है, जिससे भविष्य में तस्दीक या नवीनीकरण के दौरान पुराने दस्तावेजों और जानकारी को भी संदर्भ के रूप में देखा जा सके।
मदारिस-ए-अरबिया के तस्दीक़नामा जारी करने की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और विश्वसनीय बनाने के लिए दफ़्तर शहर क़ाज़ी, देहरादून की ओर से नई व्यवस्था तैयार की जा रही है। ईद के बाद से इस विषय पर लगातार अध्ययन और आवश्यक सुधारों पर काम किया जा रहा है। विभिन्न प्रमाणन प्राधिकरणों के तस्दीक़ एवं सत्यापन से संबंधित फ़ॉर्मेट और प्रक्रियाओं का भी अध्ययन किया गया, जिसके बाद मदरसों की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए फार्म बराय तस्दीक नामा तैयार कराया गया है, जिसे जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा।
नए फॉर्म में मांगी जाएंगी मदरसे की जरूरी जानकारियां
तस्दीकनामा के लिए तैयार किए जा रहे नए फॉर्म में मदरसे से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल की गई हैं। इनमें मदरसे का नाम, पूरा पता, मोहतमिम या नाज़िम की जानकारी और संस्थान के प्रबंधन से जुड़ी जानकारी प्रमुख रूप से शामिल है। इसके अलावा मजलिस-ए-शूरा अथवा ट्रस्ट के पंजीकरण से संबंधित विवरण, मदरसे का रजिस्ट्रेशन या मान्यता, जमीन और भवन से जुड़े दस्तावेज भी उपलब्ध कराने होंगे।
फॉर्म में विद्यार्थियों की कुल संख्या के साथ स्थानीय और बाहरी विद्यार्थियों का विवरण भी मांगा जाएगा। इसके अलावा मदरसे में संचालित तालीमी निज़ाम, शिक्षकों तथा अन्य कर्मचारियों की संख्या जैसी जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी। इससे संबंधित कार्यालय के पास संस्थान की प्रशासनिक और शैक्षणिक गतिविधियों का एक व्यवस्थित रिकॉर्ड उपलब्ध हो सकेगा।
रमज़ान-उल-मुबारक के दौरान देहरादून और आसपास के इलाक़ों में बड़ी तादाद में मदरसों के सफीर चंदे के लिए आते है, जिन्हें दफ़्तर-ए-शहर क़ाज़ी की ओर से तस्दीक़नामा जारी किया जाता है। इस अहम ज़िम्मेदारी को देखते हुए तस्दीक़ के अमल को केवल औपचारिक प्रक्रिया तक सीमित न रखते हुए अब इसे दस्तावेज़ी जांच और सत्यापन से जोड़ा जा रहा है। इसके अलावा ऑडिट रिपोर्ट, सालाना खर्च, वार्षिक परीक्षा परिणाम, रसीद बुक/सीरीज़ एवं हालिया रसीद, मदरसे की इमारत एवं बोर्ड की GPS कैमरे से ली गई तस्वीर, तदरीसी गतिविधियों की वीडियो, प्रतिष्ठित संस्थान की तस्दीक़ तथा स्थानीय मोअतबर शख़्सियतों की जानकारी भी फ़ॉर्म का हिस्सा होगी।
नई व्यवस्था में मदरसे की आर्थिक गतिविधियों से संबंधित दस्तावेजों को भी महत्व दिया गया है। इसके तहत ऑडिट रिपोर्ट और सालाना खर्च से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने का प्रावधान रखा गया है। इसके साथ ही वार्षिक परीक्षा परिणाम, रसीद बुक या रसीद सीरीज और हालिया रसीद की जानकारी भी फॉर्म का हिस्सा होगी। दफ़्तर-ए-शहर क़ाज़ी के अनुसार इन दस्तावेजों का उद्देश्य संस्थान से संबंधित जानकारी को व्यवस्थित रूप से रिकॉर्ड में रखना है। इससे भविष्य में तस्दीकनामा के नवीनीकरण के समय पिछले रिकॉर्ड को आसानी से देखा जा सकेगा।
प्रस्तावित फॉर्म में मदरसे की इमारत और बोर्ड की तस्वीरों को भी शामिल किया गया है। इसके लिए GPS कैमरे से ली गई तस्वीरें उपलब्ध कराने की बात कही गई है। इसके अलावा मदरसे की तदरीसी यानी शैक्षणिक गतिविधियों से संबंधित वीडियो भी मांगा जा सकता है। प्रतिष्ठित संस्थान की तस्दीक तथा स्थानीय स्तर पर भरोसेमंद व्यक्तियों से संबंधित जानकारी को भी फॉर्म में शामिल किया गया है। दफ़्तर-ए-शहर क़ाज़ी के अनुसार, इस प्रकार की जानकारी से संस्थान की वास्तविक स्थिति और उपलब्ध दस्तावेजों के बीच सामंजस्य की जांच में मदद मिल सकती है।
नई व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण विशेषता मौके पर जाकर सत्यापन की संभावना है। यदि दस्तावेजों की जांच के दौरान आवश्यकता महसूस होती है तो दफ़्तर-ए-शहर क़ाज़ी की ओर से संबंधित मदरसे का निरीक्षण किया जा सकता है। इस दौरान संस्थान की वास्तविक स्थिति, भवन, उपलब्ध सुविधाओं और तदरीसी गतिविधियों से संबंधित जानकारी का सत्यापन किया जाएगा। सभी जरूरी दस्तावेज प्राप्त होने और जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तस्दीकनामा जारी किए जाने की व्यवस्था प्रस्तावित है। अंतिम रूप से तस्दीकनामा शहर क़ाज़ी मुफ्ती हशीम अहमद कासमी की ओर से जारी किया जाएगा।
रमज़ान के दौरान बढ़ जाती है तस्दीकनामा की जरूरत
रमज़ान-उल-मुबारक के दौरान देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मदरसों के सफीर चंदे के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में उन्हें दफ़्तर-ए-शहर क़ाज़ी की ओर से तस्दीकनामा जारी किया जाता है। इसी जिम्मेदारी को देखते हुए कार्यालय की ओर से तस्दीकनामा प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत किसी संस्थान की पहचान, प्रबंधन, पंजीकरण, आर्थिक स्थिति और शैक्षणिक गतिविधियों से संबंधित जानकारी को एक निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से दर्ज किया जाएगा। दफ़्तर-ए-शहर क़ाज़ी का कहना है कि इसका उद्देश्य प्रक्रिया में स्पष्टता बढ़ाना और संबंधित संस्थानों की जानकारी को व्यवस्थित रूप से रिकॉर्ड में रखना है।
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक मदरसे का रिकॉर्ड दफ़्तर-ए-शहर क़ाज़ी में सुरक्षित और व्यवस्थित रखा जाएगा। सालाना तजदीद यानी नवीनीकरण के समय पिछले वर्ष का तस्दीकनामा और ऑडिट रिपोर्ट या बैलेंस शीट प्रस्तुत करना पर्याप्त होने की बात कही गई है। हालांकि, यदि मदरसे के प्रबंधन, मोहतमिम या नाज़िम, पते, जमीन-भवन, पंजीकरण, तालीमी निज़ाम अथवा अन्य बुनियादी जानकारी में कोई बदलाव होता है तो उससे संबंधित नए दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। इस व्यवस्था से पुराने रिकॉर्ड को दोबारा तैयार करने की जरूरत कम हो सकती है और बदली हुई जानकारी को अपडेट किया जा सकेगा।
देहरादून में मदरसों के तस्दीकनामा की प्रक्रिया में प्रस्तावित बदलाव से सत्यापन व्यवस्था को अधिक दस्तावेज आधारित बनाने की तैयारी है। नए फॉर्म में संस्थान की प्रशासनिक, शैक्षणिक, आर्थिक और भवन संबंधी जानकारी शामिल की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर मौके पर जाकर सत्यापन भी किया जा सकेगा। दफ़्तर-ए-शहर क़ाज़ी के अनुसार, नई व्यवस्था का उद्देश्य रिकॉर्ड को व्यवस्थित करना और तस्दीक प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना है।
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