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रिपोर्टर (सचिन शर्मा)
हरिद्वार 2026। भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारतीय जागरूकता समिति की ओर से देश और स्वतंत्रता संग्राम के वीर सपूतों के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त करने के उद्देश्य से ज्वालापुर के श्री राम नगर स्थित इंद्रजीत भवन में ‘एक शाम शहीदों के नाम’ काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। देर शाम तक चले इस साहित्यिक कार्यक्रम में आमंत्रित कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से राष्ट्रप्रेम, एकता, संविधान, स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषयों को सामने रखा। कार्यक्रम में शहर के साहित्यप्रेमियों और स्थानीय लोगों ने उत्साह के साथ भाग लिया। कवियों की प्रस्तुतियों के दौरान सभागार देशभक्ति के भाव से ओतप्रोत नजर आया। अलग-अलग काव्य विधाओं के माध्यम से कवियों ने स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों के योगदान को याद करते हुए उनके त्याग एवं संघर्ष को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया।
वाणी वंदना से हुआ काव्य गोष्ठी का शुभारंभ
काव्य गोष्ठी का शुभारंभ कवयित्री कंचन प्रभा गौतम की वाणी वंदना से हुआ। इसके बाद मंच पर मौजूद कवियों ने अपनी-अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सरोकार से जुड़ी कविताओं को श्रोताओं ने ध्यानपूर्वक सुना और कई प्रस्तुतियों पर जोरदार तालियां बजाकर कवियों का उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम का संचालन ‘चेतना पथ’ के संपादक अरुण कुमार पाठक ने किया। उन्होंने स्वतंत्रता के समय देश ने जिन परिस्थितियों का सामना किया, विशेष रूप से विभाजन की त्रासदी और उसके सामाजिक प्रभावों को काव्यात्मक अंदाज में प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति में विभाजन के दौरान आम लोगों को झेलनी पड़ी पीड़ा और विस्थापन का भाव देखने को मिला।
काव्य गोष्ठी में अरविन्द दुबे ने वीरों के बलिदान और स्वतंत्रता संघर्ष से जुड़ी रचना प्रस्तुत की। उनकी प्रस्तुति ने श्रोताओं में उत्साह का संचार किया। वहीं युवा कवयित्री वृन्दा ‘वाणी’ ने धर्म और विविधताओं के बीच राष्ट्रीय एकता तथा संविधान की भूमिका को अपनी कविता का विषय बनाया। अमित कुमार ‘मीत’ ने देश के सम्मान और जिम्मेदारी से जुड़े भावों को कविता के माध्यम से सामने रखा, जबकि देवेन्द्र मिश्र ने तिरंगे और स्वतंत्रता दिवस के उल्लास से जुड़ी रचना प्रस्तुत कर वातावरण को देशभक्ति के रंग में रंग दिया।
कार्यक्रम में डॉ. प्रशांत कौशिक ने राष्ट्र और नागरिक जिम्मेदारी से जुड़े विचार रखे। डॉ. सुशील कुमार त्यागी ‘अमित’ ने देश की गरिमा और सम्मान को बनाए रखने की भावना पर आधारित रचना प्रस्तुत की। डॉ. मीरा भारद्वाज ने तिरंगे और स्वतंत्रता दिवस के भावों को कविता के माध्यम से व्यक्त किया। कंचन प्रभा गौतम ने देश की मिट्टी और मातृभूमि के प्रति सम्मान से जुड़ी रचना सुनाई। वहीं राजकुमारी राजेश्वरी ने स्वतंत्रता और वीरता के भावों को अपनी कविता में स्थान दिया। गीतकार सुभाष मलिक ने राष्ट्र और देश की प्रगति से जुड़े भाव प्रस्तुत किए। वरिष्ठ कवि कुंअर पाल सिंह ‘धवल’ ने भी अपनी रचना के माध्यम से राष्ट्र के प्रति सम्मान और समर्पण का संदेश दिया।
कार्यक्रम केवल देशभक्ति की कविताओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें सामाजिक जिम्मेदारियों पर भी चर्चा हुई। शिक्षाविद् डॉ. विजयेन्द्र पालीवाल ने अपने संबोधन में नागरिकों से घर, गली-मोहल्ले और शहर को स्वच्छ रखने की अपील की। उन्होंने मां गंगा की स्वच्छता, शिक्षा, सेवा और व्यवसाय में ईमानदारी जैसे विषयों को देशहित से जोड़ते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल बड़े स्तर पर होने वाले कार्यों से नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की दैनिक जिम्मेदारियों से भी होता है। उन्होंने युवाओं और समाज के अन्य वर्गों से अपने कार्यक्षेत्र में ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ काम करने का आह्वान किया। उनके अनुसार, स्वच्छता, शिक्षा और ईमानदार कार्य संस्कृति भी राष्ट्र सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
समाजोपयोगी लेखन पर दिया जोर
योगी रजनीश ने कवियों और साहित्यकारों से समाज तथा राष्ट्रहित में सार्थक और समाजोपयोगी लेखन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज को दिशा देने और लोगों में जागरूकता पैदा करने का प्रभावी माध्यम है। ऐसे में साहित्यकारों की जिम्मेदारी है कि वे अपनी रचनाओं के जरिए सकारात्मक संदेश समाज तक पहुंचाएं। कार्यक्रम में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर साहित्य की भूमिका और देशभक्ति की भावना को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और बलिदानों को याद रखना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को देश के प्रति जिम्मेदारी समझाने का माध्यम है।
भारतीय जागरूकता समिति के संस्थापक अध्यक्ष एवं अधिवक्ता ललित मिगलानी ने संस्था के कार्यों और गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समिति सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर लगातार कार्यक्रम आयोजित करती रही है। उन्होंने काव्य गोष्ठी में शामिल सभी कवियों, साहित्यकारों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश के वीर सपूतों को याद करने के साथ-साथ समाज में राष्ट्रप्रेम, जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच को मजबूत करना है।
देर शाम तक चले कार्यक्रम में कवियों की प्रस्तुतियों पर श्रोताओं ने तालियों के साथ उनका उत्साह बढ़ाया। विभिन्न आयु वर्ग के लोगों ने कार्यक्रम में भाग लेकर साहित्य और देशभक्ति के इस आयोजन का आनंद लिया। एक शाम शहीदों के नाम’ काव्य गोष्ठी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर साहित्य, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक जिम्मेदारी को एक मंच पर लाने का काम किया। कार्यक्रम में प्रस्तुत रचनाओं के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों को याद करने के साथ नागरिक कर्तव्यों और सामाजिक सरोकारों का संदेश भी दिया गया।
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