भारतीय जागरूकता समिति की ओर से चलाए जा रहे जन-जागरूकता अभियान से जुड़े कार्यक्रम में मौजूद पदाधिकारी।भारतीय जागरूकता समिति की ओर से चलाए जा रहे जन-जागरूकता अभियान से जुड़े कार्यक्रम में मौजूद पदाधिकारी।

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रिपोर्टर (सचिन शर्मा)

हरिद्वार। कानून की जानकारी आम नागरिक तक पहुंचाने, युवाओं को नशे से दूर रखने, महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और सड़क सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी बढ़ाने के उद्देश्य से भारतीय जागरूकता समिति, हरिद्वार लंबे समय से जन-जागरूकता अभियान चला रही है। समिति के अनुसार वर्ष 2013 से अब तक विभिन्न विषयों पर करीब 1300 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। समिति का कहना है कि जागरूक नागरिक ही मजबूत और सुरक्षित समाज की नींव तैयार कर सकते हैं। इसी सोच के साथ विद्यालयों, शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों पर समय-समय पर विधिक जागरूकता, नशे के दुष्प्रभाव, महिला सशक्तिकरण, साइबर अपराध, सड़क सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारियों से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं।

हरिद्वार। समाज को कानून के प्रति जागरूक करने, युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने, महिलाओं को उनके अधिकारों की जानकारी देने तथा सड़क सुरक्षा के प्रति नागरिकों को जागरूक करने के उद्देश्य से भारतीय जागरूकता समिति, हरिद्वार वर्ष 2013 से लगातार जन-जागरूकता अभियान चला रही है। समिति के अधिवक्ता ललित मिगलानी ने बताया कि समिति का मुख्य उद्देश्य आम नागरिक को उसके अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना है। इसी उद्देश्य से समिति द्वारा पिछले वर्षों में विभिन्न विद्यालयों, शिक्षण संस्थानों एवं सार्वजनिक स्थानों पर विधिक जागरूकता, नशे के दुष्प्रभाव, महिला सशक्तिकरण, साइबर अपराध, सड़क सुरक्षा तथा सामाजिक जिम्मेदारियों से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।

भारतीय जागरूकता समिति के अधिवक्ता ललित मिगलानी के अनुसार समिति का प्रमुख उद्देश्य आम नागरिकों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना है। कई बार कानून और अधिकारों की पर्याप्त जानकारी नहीं होने के कारण लोग अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सही दिशा में कदम नहीं उठा पाते। इसी को ध्यान में रखते हुए समिति की ओर से विधिक जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इन कार्यक्रमों में विद्यार्थियों और आम नागरिकों को कानून से जुड़े सामान्य विषयों की जानकारी देने के साथ-साथ जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी भूमिका समझने के लिए प्रेरित किया जाता है। समिति के अनुसार, जागरूकता कार्यक्रमों का उद्देश्य किसी व्यक्ति को कानूनी सलाह देने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में कानून के प्रति समझ और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है।

करीब 1300 कार्यक्रमों में लोगों ने लिया हिस्सा

भारतीय जागरूकता समिति के अनुसार वर्ष 2013 से अब तक लगभग 1300 जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। इन कार्यक्रमों में विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं, शिक्षकों, अधिवक्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने भाग लिया। समिति का कहना है कि अलग-अलग वर्गों की भागीदारी से जागरूकता अभियान को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने में मदद मिली है। विद्यालय और शिक्षण संस्थान युवाओं तक पहुंचने का महत्वपूर्ण माध्यम बने हैं, जबकि सार्वजनिक स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों के जरिए आम नागरिकों को भी अभियान से जोड़ने का प्रयास किया गया। इन कार्यक्रमों में सामाजिक और नागरिक जिम्मेदारियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के साथ लोगों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझने के लिए प्रेरित किया जाता है।

समिति द्वारा वर्तमान समय में युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को गंभीरता से लेते हुए नशे के दुष्प्रभावों के प्रति विशेष रूप से जागरूक किया जा रहा है। समिति का कहना है कि नशा केवल एक व्यक्ति के जीवन को प्रभावित नहीं करता, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करता है। समिति द्वारा युवाओं से अपील की गई है कि वे नशे से दूर रहें तथा अपने आसपास के अन्य युवाओं को भी नशे से बचाने में अपनी भूमिका निभाएं। प्रशासन एवं विभिन्न विभागों का मिला सहयोग

भारतीय जागरूकता समिति के जागरूकता अभियानों में महिला सशक्तिकरण और साइबर अपराध से बचाव जैसे विषय भी शामिल हैं। समिति के अनुसार महिलाओं को उनके अधिकारों और उपलब्ध कानूनी प्रावधानों की जानकारी देना जरूरी है, ताकि वे जरूरत पड़ने पर उचित मंच पर अपनी बात रख सकें। वहीं, डिजिटल माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच साइबर अपराध से बचाव को लेकर भी लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। नागरिकों को ऑनलाइन गतिविधियों के दौरान सावधानी बरतने और डिजिटल सुरक्षा के प्रति सजग रहने का संदेश दिया जाता है।

सड़क सुरक्षा भी समिति के प्रमुख जागरूकता विषयों में शामिल है। सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए नागरिकों में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाना जरूरी माना जाता है। समिति के कार्यक्रमों में लोगों को सड़क पर जिम्मेदारी से व्यवहार करने, यातायात नियमों का पालन करने और सुरक्षित आवागमन के लिए जरूरी सावधानियों को अपनाने के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया जाता है। समिति का कहना है कि सड़क सुरक्षा केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। वाहन चालक, पैदल यात्री और सड़क का इस्तेमाल करने वाला प्रत्येक व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझे तो दुर्घटनाओं को कम करने की दिशा में सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

अधिवक्ता ललित मिगलानी ने कहा कि भारतीय जागरूकता समिति भविष्य में भी विधिक जागरूकता, नशा मुक्ति, महिला सशक्तिकरण, सड़क सुरक्षा, साइबर अपराध से बचाव तथा युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के लिए लगातार अभियान चलाती रहेगी। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे “जागरूक नागरिक—सशक्त समाज” के उद्देश्य से चलाए जा रहे इस अभियान का हिस्सा बनें और अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करें।

भारतीय जागरूकता समिति ने अपने विभिन्न अभियानों में सहयोग करने वाले सरकारी विभागों और संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया है। समिति के अनुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हरिद्वार, हरिद्वार पुलिस और एआरटीओ हरिद्वार सहित विभिन्न विभागों एवं अधिकारियों से समय-समय पर सहयोग और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है। समिति का कहना है कि सरकारी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों के बीच बेहतर समन्वय से जन-जागरूकता अभियानों को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिलती है। विभिन्न विभागों की ओर से समिति के विधिक एवं सामाजिक जागरूकता कार्यक्रमों की सराहना भी किए जाने की बात प्रेस विज्ञप्ति में कही गई है।

समिति के अनुसार जागरूकता अभियानों को आगे बढ़ाने में समाज के अलग-अलग वर्गों का योगदान रहा है। अधिवक्ताओं, शिक्षकों, विद्यार्थियों, महिलाओं, युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने समय-समय पर इन कार्यक्रमों में भाग लिया है। समिति का मानना है कि सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूकता पैदा करने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।

अधिवक्ता ललित मिगलानी ने कहा कि भारतीय जागरूकता समिति भविष्य में भी विधिक जागरूकता, नशा मुक्ति, महिला सशक्तिकरण, सड़क सुरक्षा और साइबर अपराध से बचाव जैसे विषयों पर अभियान जारी रखेगी। समिति का उद्देश्य युवाओं और आम नागरिकों को सकारात्मक दिशा देने के साथ उन्हें अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना है। समिति ने नागरिकों से “जागरूक नागरिक—सशक्त समाज” के उद्देश्य से चलाए जा रहे अभियानों से जुड़ने और अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करने की अपील की है। समिति की ओर से नागरिकों को संदेश दिया गया है कि कानून को समझना, नशे से दूर रहना, सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करना और सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाना सुरक्षित एवं सशक्त समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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By ATHAR

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