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रिपोर्टर (सचिन शर्मा)
हरिद्वार। स्कूली शिक्षा को केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में भारतीय शिक्षा बोर्ड (BSB) ने महत्वपूर्ण पहल की है। भारतीय शिक्षा बोर्ड ने कौशल-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए तीन प्रमुख स्किल काउंसिल्स के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) किए हैं। इन समझौतों के जरिए स्कूल स्तर पर विद्यार्थियों को व्यावहारिक और रोजगारोन्मुख कौशल उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। भारतीय शिक्षा बोर्ड के नोएडा स्थित मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष स्वामी रामदेव की मौजूदगी में पर्यटन एवं आतिथ्य, हस्तशिल्प एवं कालीन तथा हरित रोजगार क्षेत्र से जुड़े संस्थानों के साथ समझौते किए गए। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को बदलती रोजगार आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना और स्कूली शिक्षा में व्यावसायिक कौशल को अधिक प्रभावी ढंग से शामिल करना है।
अब स्कूलों से सीधे रोजगार की राह, स्वामी रामदेव की मौजूदगी में BSB ने किए तीन बड़े MoUहमें ऐसे कौशल विकसित करने होंगे, जिन्हें सीखकर हमारे युवा शीघ्र रोजगार प्राप्त कर सकें या स्वरोजगार शुरू कर सकें: स्वामी रामदेवबीएसबी व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास की शिक्षा को सार्थक बनाने के लिए निरंतर कर रही कार्य: एनपी सिंहNEP-2020 और NSQF के अनुरूप स्कूलों में मिलेगी जॉब-ओरिएंटेड शिक्षा, पर्यटन, हस्तशिल्प और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में बढ़ेंगे अवसर

कौशल-आधारित शिक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में भारतीय शिक्षा बोर्ड (BSB) ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। स्वामी रामदेव की उपस्थिति में भारतीय शिक्षा बोर्ड ने कौशल शिक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से तीन महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता भारतीय शिक्षा बोर्ड के नोएडा स्थित मुख्यालय में संपन्न हुआ। इसके तहत पर्यटन एवं आतिथ्य (Tourism & Hospitality Skill Council-THSC), हस्तशिल्प एवं कालीन क्षेत्र कौशल परिषद (Handicrafts & Carpet Sector Skill Council-HCSSC) तथा स्किल काउंसिल फॉर ग्रीन जॉब्स (SCGJ) के साथ समझौता किया गया। इसके अलावा राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT) के साथ चल रही साझेदारी का भी सम्मान किया गया तथा उसे और अधिक सुदृढ़ बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
स्वामी रामदेव बोले- युवाओं को रोजगार योग्य कौशल जरूरी
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भारतीय शिक्षा बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष स्वामी रामदेव ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को ऐसे कौशल सीखने की आवश्यकता है, जिनके आधार पर वे जल्दी रोजगार हासिल कर सकें या अपना स्वरोजगार शुरू कर सकें। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं के लिए कुशल और दक्ष होना समय की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए देश की प्रमुख स्किल काउंसिल्स के साथ साझेदारी की जा रही है। इस पहल के तहत स्कूली विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान देने के बजाय ऐसे कौशल से परिचित कराने पर जोर है, जिनका उपयोग आगे चलकर रोजगार, उद्यमिता और व्यावसायिक क्षेत्र में किया जा सके।
इस समझौते के तहत राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 तथा राष्ट्रीय कौशल योग्यता रूपरेखा (NSQF) के अनुरूप अब स्कूल स्तर पर ही प्रायोगिक (Practical) और रोजगारोन्मुख (Job-oriented) शिक्षा प्रदान की जाएगी। समारोह की अध्यक्षता करते हुए भारतीय शिक्षा बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष स्वामी रामदेव ने कहा, ‘हमें ऐसे कौशल विकसित करने होंगे, जिन्हें सीखकर हमारे युवा शीघ्र रोजगार प्राप्त कर सकें या स्वरोजगार शुरू कर सकें। इसी उद्देश्य से हम देश की अग्रणी स्किल काउंसिल्स के साथ साझेदारी कर रहे हैं। आज के युवाओं के लिए कुशल और दक्ष होना समय की मांग है।
NEP 2020 और NSQF के अनुरूप तैयार होंगे पाठ्यक्रम
भारतीय शिक्षा बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईएएस एनपी सिंह ने कहा कि बोर्ड ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) 2023 के अनुरूप स्कूली शिक्षा में NSQF आधारित जॉब-रोल केंद्रित व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को शामिल करने की दिशा में कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि बोर्ड का प्रयास व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास को अधिक किफायती, सुलभ और उपयोगी बनाना है। इसके जरिए विद्यार्थियों को उनकी भौगोलिक स्थिति या सामाजिक पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना गुणवत्तापूर्ण कौशल आधारित शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। एनपी सिंह के मुताबिक बोर्ड का लक्ष्य विद्यार्थियों को केवल उच्च शिक्षा के लिए तैयार करना नहीं है, बल्कि उन्हें भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए कुशल पेशेवर, नवाचारकर्ता और उद्यमी के रूप में विकसित करना भी है।

उन्होंने कहा कि बोर्ड का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए तैयार करना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसे कुशल पेशेवर, नवाचारकर्ता और उद्यमी के रूप में विकसित करना है, जो भविष्य की अर्थव्यवस्था में सार्थक योगदान दे सकें। उन्होंने बताया कि NSQF के तहत प्रत्येक व्यावसायिक पाठ्यक्रम को लेवल-1 से लेवल-10 तक मानकीकृत किया गया है। इससे विद्यार्थियों और नियोक्ताओं को यह समझने में आसानी होगी कि कोई पाठ्यक्रम आगे की पढ़ाई और रोजगार की विशिष्ट भूमिकाओं से किस प्रकार जुड़ा है। इससे कक्षा की शिक्षा से लेकर रोजगार और उद्यमिता तक का उद्योग-मान्यता प्राप्त मार्ग तैयार होगा। उन्होंने बताया कि कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए लेवल-1 से लेवल-4 तक के पाठ्यक्रम तैयार और अनुकूलित किए गए हैं। इन पाठ्यक्रमों का विकास NIELIT तथा विभिन्न सेक्टर स्किल काउंसिल्स (SSCs) ने किया है
MoU के बाद विद्यार्थियों के लिए आधुनिक तकनीकी और रोजगारोन्मुख कौशल के अवसर बढ़ने की बात कही गई है। प्रस्तावित कौशल क्षेत्रों में Artificial Intelligence (AI), Cloud Computing, Data Analytics और Web Designing जैसे 21वीं सदी के कौशल शामिल हैं। डिजिटल तकनीक के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए इन क्षेत्रों में शुरुआती स्तर की समझ विद्यार्थियों के लिए आगे की शिक्षा और करियर की दिशा तय करने में उपयोगी हो सकती है। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण और हरित ऊर्जा से जुड़े विषयों को भी कौशल शिक्षा का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया है। विद्यार्थियों को सौर ऊर्जा और वैकल्पिक ऊर्जा प्रौद्योगिकी से संबंधित पाठ्यक्रमों से परिचित कराने की योजना है।
इस अवसर पर भारतीय शिक्षा बोर्ड के सचिव आर.पी. सिंह (सेवानिवृत्त आईपीएस), डॉ. निधि गुसाईं (वरिष्ठ शोधकर्ता एवं प्रमुख, व्यावसायिक एवं कौशल विकास), प्रो. मदन मोहन त्रिपाठी (महानिदेशक, NIELIT), अर्पित शर्मा (सीईओ, स्किल काउंसिल फॉर ग्रीन जॉब्स), किशन कुमार (सीईओ, हैंडीक्राफ्ट्स एंड कारपेट सेक्टर स्किल काउंसिल) तथा रंजन बहादुर (सीईओ, टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी स्किल काउंसिल) सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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