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रिपोर्टर (सचिन शर्मा)
हरिद्वार। निर्जला एकादशी के पावन स्नान पर्व पर हरिद्वार में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। इस दौरान जहां लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हुए, वहीं भीड़भाड़ के बीच कई बार बच्चे और बुजुर्ग अपने परिजनों से बिछड़ जाते हैं। ऐसे ही एक मामले में उत्तराखंड पुलिस और आपदा राहत दल 40वीं वाहिनी पीएसी की तत्परता ने एक परिवार की चिंता को खुशी में बदल दिया। टीम ने भीड़ में बिछड़े एक छोटे बच्चे को सकुशल उसके माता-पिता से मिलवाकर मानवीय संवेदनशीलता और जनसेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। प्राप्त जानकारी के अनुसार दिनांक 25 जून 2026 को निर्जला एकादशी स्नान के अवसर पर हरिद्वार में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मौजूद थी। स्नान घाटों और प्रमुख मार्गों पर लोगों का आवागमन लगातार जारी था। इसी दौरान आपदा राहत दल 40 पीएसी की ड्यूटी पर तैनात टीम को एक छोटा बच्चा रोता-बिलखता मिला, जो अपने माता-पिता से बिछड़ गया था और घबराया हुआ इधर-उधर भटक रहा था।
बच्चे की स्थिति देखकर पुलिस एवं आपदा राहत दल के जवान तत्काल सक्रिय हुए। सबसे पहले टीम ने बच्चे को सुरक्षित स्थान पर बैठाकर उसे शांत कराया और उसका मनोबल बढ़ाया। इसके बाद उससे उसके माता-पिता और घर के बारे में जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया गया। बच्चा डरा हुआ था, लेकिन पुलिस कर्मियों ने धैर्य और संवेदनशीलता के साथ बातचीत कर आवश्यक जानकारी जुटाई। जानकारी मिलने के बाद टीम ने बच्चे के परिजनों की तलाश शुरू की। मेला क्षेत्र और आसपास के स्थानों पर लगातार खोजबीन की गई। सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली का भी सहारा लिया गया ताकि बच्चे के माता-पिता तक सूचना पहुंच सके। काफी प्रयास और मेहनत के बाद टीम को बच्चे के पिता बंटी सिंह और उसकी माता का पता लगाने में सफलता मिली।
पुलिस के अनुसार बच्चे के पिता बंटी सिंह उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद के शाहदरा नगर क्षेत्र के निवासी हैं। परिजनों के मिलने के बाद आवश्यक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की गई और बच्चे को सकुशल उनके सुपुर्द कर दिया गया। अपने बेटे को सुरक्षित देखकर माता-पिता की आंखों में खुशी और राहत साफ दिखाई दे रही थी। बच्चे के सकुशल मिलने पर उसके माता-पिता ने उत्तराखंड पुलिस और आपदा राहत दल का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भीड़ में बच्चे के बिछड़ जाने के बाद वे बेहद परेशान हो गए थे और उन्हें किसी अनहोनी की आशंका सता रही थी। लेकिन पुलिस की त्वरित कार्रवाई और जिम्मेदारीपूर्ण रवैये के कारण उनका बच्चा सुरक्षित वापस मिल गया।
निर्जला एकादशी जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना पुलिस और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होती है। लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बीच यातायात, भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के साथ-साथ बिछड़े हुए लोगों को उनके परिजनों से मिलाने का कार्य भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। उत्तराखंड पुलिस और पीएसी के जवान लगातार ऐसे मामलों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। हरिद्वार पुलिस द्वारा समय-समय पर श्रद्धालुओं से अपील भी की जाती है कि वे अपने बच्चों और बुजुर्ग परिजनों का विशेष ध्यान रखें। बच्चों के पास पहचान संबंधी जानकारी रखना, मोबाइल नंबर लिखकर देना और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सतर्क रहना आवश्यक है। इससे किसी भी आपात स्थिति में परिजनों तक पहुंचना आसान हो जाता है।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि उत्तराखंड पुलिस केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि जनसेवा और मानवीय सहायता के कार्यों में भी पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। आपदा राहत दल और पुलिस की सतर्कता से एक मासूम सुरक्षित अपने परिवार तक पहुंच सका, जिससे एक परिवार की खुशियां लौट आईं। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने भी इस कार्य की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयासों से पुलिस के प्रति जनता का विश्वास और मजबूत होता है। निर्जला एकादशी के अवसर पर हुई यह घटना जनसेवा के प्रति पुलिस की प्रतिबद्धता का एक सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आई है।
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