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हरिद्वार। नगर निगम हरिद्वार और राजस्व विभाग से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। एक सामाजिक संगठन द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में नगर निगम से जुड़े कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों पर जांच रिपोर्टों में कथित अनियमितता, भूमि संबंधी मामलों में लापरवाही तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी के आरोप लगाए गए। संगठन ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक संबंधित अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। ऐसे में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी शेष है। प्रशासनिक स्तर पर जांच या कार्रवाई के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
हरिद्वार में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान सामाजिक संगठन के प्रदेश अध्यक्ष रमेश जोशी ने नगर निगम हरिद्वार के भू-स्वामी लेखपाल और तहसील स्तर के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि कुछ मामलों में भूमि संबंधी जांच रिपोर्टों में तथ्यों को लेकर गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

संगठन का कहना है कि नगर निगम क्षेत्र में स्थित कुछ महत्वपूर्ण भूमि मामलों में जांच प्रक्रिया को लेकर लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। इन शिकायतों में सरकारी भूमि, कब्जों की स्थिति, राजस्व अभिलेखों तथा रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं। संगठन ने दावा किया कि यदि संबंधित अभिलेखों और दस्तावेजों की गहन जांच कराई जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2025 में भ्रष्टाचार के विरुद्ध चलाए गए अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान कई विभागों की कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई थी। संगठन का आरोप है कि कुछ मामलों में कार्रवाई हुई, लेकिन कई मामलों की जांच अभी भी अधूरी मानी जा रही है।
संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि प्रशासन पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है तो सभी शिकायतों और आरोपों की निष्पक्ष जांच कराकर जनता के सामने तथ्य रखे जाने चाहिए। उनका कहना है कि इससे प्रशासनिक व्यवस्था में जनता का विश्वास और अधिक मजबूत होगा। प्रेस वार्ता के दौरान यह भी कहा गया कि नगर निगम क्षेत्र की कुछ भूमि से जुड़े मामलों में तैयार की गई रिपोर्टों की सत्यता को लेकर संदेह व्यक्त किया गया है। संगठन ने आरोप लगाया कि कुछ रिपोर्टों में वास्तविक स्थिति और अभिलेखीय विवरण के बीच अंतर दिखाई देता है।
संगठन का दावा है कि संबंधित मामलों में करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि का विषय जुड़ा हुआ है, इसलिए पूरे प्रकरण की तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर दोबारा जांच आवश्यक है। उनका कहना है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी अथवा प्रशासनिक रिपोर्ट से अभी तक नहीं हुई है। इसलिए मामले को फिलहाल आरोप और प्रत्यारोप के रूप में ही देखा जा रहा है।
संगठन ने प्रेस वार्ता में तहसील स्तर पर होने वाली कुछ प्रक्रियाओं को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि जिन मामलों में गहन जांच की आवश्यकता थी, उनमें अपेक्षित स्तर की कार्रवाई नहीं हुई। संगठन का कहना है कि यदि प्रशासन निष्पक्ष जांच कराए तो स्थिति स्पष्ट हो सकती है। विशेष रूप से भूमि, मुआवजा और राजस्व संबंधी कुछ पुराने मामलों का उल्लेख करते हुए संगठन ने कहा कि इन मामलों की पुनः समीक्षा की जानी चाहिए। इससे जनता के बीच मौजूद शंकाओं का समाधान हो सकेगा और प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा।
सामाजिक संगठन ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए कहा है कि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष और समयबद्ध होनी चाहिए। संगठन का कहना है कि यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए, वहीं यदि आरोप निराधार साबित होते हैं तो संबंधित अधिकारियों को भी स्पष्ट रूप से क्लीन चिट दी जानी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक संस्थाओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच से न केवल तथ्यों की पुष्टि होती है बल्कि जनता का विश्वास भी मजबूत होता है।
संगठन ने कहा है कि यदि उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती है तो 23 मई 2026 को राजस्व परिषद के समक्ष धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जा सकता है। संगठन का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित कराना है। वहीं स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि किसी मामले में भ्रष्टाचार या अनियमितता की शिकायत सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। नागरिकों का मानना है कि जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही उचित निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद हरिद्वार में प्रशासनिक पारदर्शिता, भूमि प्रबंधन और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि संबंधित विभाग मामले का संज्ञान लेकर आवश्यक कदम उठाएंगे और यदि जांच होती है तो उसके निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएंगे। फिलहाल मामला आरोपों और जांच की मांग के स्तर पर है। प्रशासनिक प्रतिक्रिया और संभावित जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।
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