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मुजफ्फरनगर में साइबर क्राइम पुलिस ने सोशल मीडिया के जरिए निवेश के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह के एक और शातिर सदस्य को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। आरोपी ने फेसबुक दोस्ती और अधिक मुनाफे का झांसा देकर ₹3.09 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी को अंजाम दिया था।
बीते कुछ वर्षों में देशभर में साइबर फ्रॉड के मामलों में तेज़ी से वृद्धि हुई है। खासकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, टेलीग्राम और व्हाट्सएप के माध्यम से फर्जी निवेश योजनाओं के जरिए आम नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है।
मुजफ्फरनगर जिला भी इस समस्या से अछूता नहीं रहा है। यहां साइबर क्राइम थाना लगातार ऐसे मामलों का खुलासा कर रहा है, जिनमें अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय गिरोहों की संलिप्तता सामने आ रही है। इस मामले में भी जांच के दौरान नेपाल, कंबोडिया, चीन और सिंगापुर तक फैले साइबर ठग नेटवर्क का खुलासा हुआ है।
घटना
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के माध्यम से दोस्ती कर निवेश पर ज्यादा लाभ दिलाने का झांसा देकर ₹3,09,22,000 की साइबर ठगी की गई।यह मामला थाना साइबर क्राइम, जनपद मुजफ्फरनगर से संबंधित है, हालांकि ठगी का नेटवर्क कई राज्यों और देशों तक फैला हुआ है।वादी द्वारा 09 अक्टूबर 2025 को साइबर क्राइम थाने में लिखित तहरीर दी गई थीवादी सचिन कुमार, निवासी नई मंडी, की फेसबुक पर एक अज्ञात व्यक्ति से दोस्ती हुई। इसके बाद उसे निवेश पर भारी मुनाफा दिलाने का लालच दिया गया। धीरे-धीरे आरोपी और उसके साथियों ने अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर कराकर करोड़ों रुपये की ठगी कर ली।
पुलिस जांच और गिरफ्तारी की कार्रवाई
श्रीमान अपर पुलिस महानिदेशक मेरठ जोन एवं पुलिस उपमहानिरीक्षक सहारनपुर परिक्षेत्र के निर्देशन में, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के पर्यवेक्षण तथा पुलिस अधीक्षक अपराध इन्दु सिद्धार्थ के नेतृत्व में साइबर क्राइम थाना प्रभारी सुल्तान सिंह की टीम ने जांच शुरू की।
पहले चरण में दो आरोपियों—
- मोहम्मद माज
- अम्बरीश मिश्रा
- को 07 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। इसके बाद लगातार प्रयास करते हुए 23 दिसंबर 2025 को एक और शातिर अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया।
बरामदगी का विवरण
गिरफ्तार अभियुक्त के कब्जे से पुलिस ने—
- 02 मोबाइल फोन
- 01 लैपटॉप
- 01 वाई-फाई राउटर
- बरामद किए हैं, जिनका उपयोग साइबर ठगी में किया जा रहा था।
- नाम: खालिद पुत्र इनामूलहक
- निवासी: साईपुरम बस्ती, थाना कोतवाली नगर, जनपद बाराबंकी
- मूल निवासी: दिलदार नगर, जनपद गाजीपुर (उ.प्र.)
फरार अभियुक्त
- उपेन्द्र चंदेल पुत्र महेन्द्र सिंह चंदेल, निवासी मिर्जापुर खडंजा, कानपुर नगर
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह एक संगठित साइबर फ्रॉड गिरोह है, जो फर्जी खातों, चाइनीज APK फाइल और मोबाइल मिररिंग तकनीक का इस्तेमाल कर ठगी करता था।
पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा
पूछताछ के दौरान अभियुक्त खालिद ने बताया कि—
- वह बाबू बनारसीदास यूनिवर्सिटी से BHMCT ग्रेजुएट है।
- नौकरी की तलाश के दौरान वह साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़ा।
- नेपाल जाकर उसने ऑनलाइन फ्रॉड की ट्रेनिंग ली।
- टेलीग्राम पर “जॉर्डन” और “जेम्स” नाम से पेज बनाकर 50 से अधिक बैंक खातों के जरिए लेनदेन किया।
- खाताधारकों को 2% कमीशन दिया जाता था।
- पुलिस के अनुसार, अभियुक्त के खातों से अब तक कई करोड़ रुपये का लेन-देन प्रमाणित हुआ है।
इस मामले का प्रभाव केवल पीड़ित तक सीमित नहीं है—
- जनता पर असर: लोगों में ऑनलाइन निवेश को लेकर डर बढ़ा।
- व्यापार: डिजिटल लेन-देन पर भरोसा कमजोर हुआ।
- शिक्षा: युवाओं में जागरूकता की जरूरत महसूस की जा रही है।
- प्रशासन: साइबर सुरक्षा को लेकर अभियान तेज करने की आवश्यकता।
NCRP पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के अनुसार, साइबर ठगी के मामलों में हर साल लगातार वृद्धि हो रही है।अभियुक्त से जुड़े खातों पर 23 से अधिक राज्यों से शिकायतें दर्ज हैं।कुल धोखाधड़ी की राशि ₹10 करोड़ से अधिक आंकी जा रही है। मुजफ्फरनगर साइबर क्राइम पुलिस की यह कार्रवाई साइबर अपराधियों के खिलाफ एक मजबूत संदेश है। आम नागरिकों को चाहिए कि वे सोशल मीडिया पर मिलने वाले निवेश प्रस्तावों से सावधान रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना पुलिस को दें।
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