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विकासनगर में दर्दनाक हादसा, छानी में लगी आग
उत्तराखंड के देहरादून जनपद अंतर्गत विकासनगर क्षेत्र से एक दुखद खबर सामने आई है। कालसी ब्लॉक के सकनी गांव में शुक्रवार देर रात अचानक एक आवासीय छानी में आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते पूरी छानी इसकी चपेट में आ गई। इस हादसे में छानी में बंधी एक भैंस की जलकर मौके पर ही मौत हो गई, जबकि वहां रखा सारा सामान जलकर पूरी तरह नष्ट हो गया। यह घटना गांव के बांदला क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां ग्रामीणों के लिए पशुपालन और छानी में रखा सामान आजीविका का मुख्य साधन होता है। आग लगने से प्रभावित परिवार पर आर्थिक संकट गहरा गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार देर रात गांव के बांदला इलाके में स्थित दो मंजिला आवासीय छानी से अचानक धुआं उठता दिखाई दिया। जब तक परिवार के सदस्य और आसपास के लोग कुछ समझ पाते, आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। ग्रामीणों ने तुरंत पानी और अन्य संसाधनों से आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग की लपटें इतनी तेज थीं कि उस पर काबू पाना संभव नहीं हो सका। रात का समय होने के कारण राहत और बचाव कार्य में भी काफी कठिनाई आई।
भैंस की जलकर मौत, परिवार को गहरा नुकसान
इस आगजनी की घटना में छानी के भीतर बंधी एक भैंस आग की चपेट में आ गई और उसकी मौके पर ही जलकर मौत हो गई। ग्रामीणों के अनुसार भैंस परिवार की आजीविका का प्रमुख साधन थी। पशु की मौत से परिवार को न केवल आर्थिक नुकसान हुआ है, बल्कि भावनात्मक आघात भी पहुंचा है। इसके अलावा छानी में रखा अनाज, चारा, बिस्तर, बर्तन और अन्य घरेलू सामान भी पूरी तरह जलकर राख हो गया।
आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दो मंजिला आवासीय छानी पूरी तरह जलकर नष्ट हो गई। लकड़ी और घास-फूस से बनी संरचना होने के कारण आग तेजी से फैलती चली गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते आग पर काबू पा लिया जाता तो नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सकता था, लेकिन संसाधनों के अभाव में ऐसा संभव नहीं हो पाया।
घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्रीय पटवारी कल्पना चौहान मौके पर पहुंचीं। उन्होंने घटनास्थल का मुआवना किया और नुकसान का आकलन किया। पटवारी ने बताया कि आग से हुए नुकसान की पूरी रिपोर्ट तैयार कर तहसीलदार को भेज दी गई है। प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया है कि पीड़ित परिवार को नियमानुसार सहायता और मुआवजा प्रदान किया जाएगा।
फिलहाल आग लगने के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल सका है। ग्रामीणों का अनुमान है कि ठंड के मौसम में अलाव या बिजली के शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी हो सकती है। प्रशासन की ओर से मामले की जांच की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि सर्दियों के मौसम में छानियों और कच्चे मकानों में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आग से बचाव को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाए।
पीड़ित परिवार और ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि भैंस की मौत और छानी के जलने से परिवार की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ा है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन संवेदनशीलता दिखाते हुए जल्द राहत प्रदान करेगा। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि ग्रामीण इलाकों में आग से बचाव के लिए ठोस इंतजामों की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि छानियों में बिजली की सुरक्षित व्यवस्था और अग्नि सुरक्षा उपाय अपनाकर ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
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