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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मुस्लिम महिला का नकाब हटाने के कथित प्रयास का मामला अब कानूनी और राजनीतिक बहस में बदल गया है। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी और पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती ने इस मामले में श्रीनगर के कोठी बाग थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
विवाद की पृष्ठभूमि और संवेदनशीलता
भारत में धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत पसंद से जुड़े मुद्दे हमेशा से संवेदनशील रहे हैं। विशेषकर मुस्लिम महिलाओं के हिजाब और नकाब को लेकर समय-समय पर सामाजिक और राजनीतिक बहस सामने आती रही है।
हाल के वर्षों में सार्वजनिक मंचों पर नेताओं के बयानों और व्यवहार को लेकर विवाद बढ़े हैं, जिनका असर सीधे सामाजिक सौहार्द और अल्पसंख्यक समुदायों की भावनाओं पर पड़ता है। ऐसे मामलों में राजनीतिक जिम्मेदारी और संवैधानिक मूल्यों की चर्चा फिर से तेज हो जाती है।

घटना स्थल
बिहार में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम (स्थान का आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं) हालिया सार्वजनिक कार्यक्रम, दिसंबर 2025 इल्तिजा मुफ्ती के अनुसार, कार्यक्रम के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक युवा मुस्लिम महिला डॉक्टर के चेहरे से नकाब हटाने की कोशिश की। यह घटना वहां मौजूद लोगों के सामने हुई, जिससे महिला का सम्मान और गरिमा आहत हुई। इल्तिजा मुफ्ती ने श्रीनगर के कोठी बाग पुलिस थाने में दर्ज कराई गई शिकायत में इस घटना को “घृणास्पद” बताया। उन्होंने कहा कि यह कृत्य मुस्लिम महिलाओं के मानसिक सम्मान और धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।
इल्तिजा मुफ्ती और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इल्तिजा मुफ्ती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर शिकायत की प्रति साझा करते हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस से तत्काल संज्ञान लेने की मांग की। उन्होंने लिखा कि यह घटना न केवल एक महिला, बल्कि पूरे मुस्लिम समुदाय के लिए अपमानजनक है।
उन्होंने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि
हिजाब या नकाब पहनना किसी की निजी पसंद और धार्मिक स्वतंत्रता का मामला है।”
इस मामले में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह द्वारा नीतीश कुमार का बचाव किए जाने पर इल्तिजा मुफ्ती ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने ‘एक्स’ पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह की सोच समाज में नफरत को बढ़ावा देती है।
राजनीति और सामाजिक माहौल पर असर
इस हाई-प्रोफाइल शिकायत के बाद जम्मू-कश्मीर और बिहार दोनों राज्यों के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
- सामाजिक असर: मुस्लिम महिलाओं के अधिकार और सुरक्षा को लेकर बहस तेज हुई है।
- राजनीतिक असर: विपक्षी दलों ने इस मामले को संवेदनशील बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
- शैक्षणिक व सामाजिक संस्थान: महिला सम्मान और धार्मिक स्वतंत्रता पर चर्चा और सेमिनार की मांग उठ रही है।
- फिलहाल पुलिस की संभावित कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
पिछले कुछ वर्षों में सार्वजनिक मंचों पर धार्मिक प्रतीकों से जुड़े विवादों में बढ़ोतरी देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में संवैधानिक अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की स्पष्ट व्याख्या आवश्यक है, ताकि भविष्य में विवादों को रोका जा सके। नीतीश कुमार से जुड़े इस विवाद ने एक बार फिर धार्मिक स्वतंत्रता, महिला सम्मान और राजनीतिक जवाबदेही के मुद्दे को केंद्र में ला दिया है। मामले की निष्पक्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया ही आगे का रास्ता तय करेगी। समाज और नेताओं दोनों को संयम और संवेदनशीलता के साथ ऐसे विषयों पर व्यवहार करने की आवश्यकता है।
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