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सीतापुर जनपद में बीएलओ उमेश गौतम की दुखद मृत्यु ने सरकारी कर्मचारियों पर कार्य दबाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर शोक जताया और सरकार से त्वरित आर्थिक सहायता व नौकरी की मांग की है।
बीएलओ और एस.आई.आर. कार्य का दबाव
बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) चुनावी प्रक्रिया की रीढ़ माने जाते हैं। मतदाता सूची संशोधन, सत्यापन और एस.आई.आर. (Special Intensive Revision) जैसे कार्यों के दौरान बीएलओ पर समयसीमा और लक्ष्य को लेकर अत्यधिक दबाव रहता है।
हाल के वर्षों में प्रदेश के विभिन्न जिलों से यह शिकायतें सामने आती रही हैं कि सीमित संसाधनों और कर्मचारियों की कमी के बावजूद बीएलओ से अत्यधिक कार्य कराया जाता है, जिससे मानसिक तनाव बढ़ता है। सीतापुर की यह घटना इसी दबाव की एक गंभीर मिसाल के रूप में देखी जा रही है।
सीतापुर जनपद में कार्यरत बीएलओ उमेश गौतम ने एस.आई.आर. कार्य से उत्पन्न मानसिक दबाव के चलते कथित रूप से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना से न केवल परिवार बल्कि पूरे प्रशासनिक महकमे में शोक और चिंता का माहौल है। घटना की जानकारी मिलते ही उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अजय राय सीतापुर पहुंचे और मृतक के आवास पर जाकर परिजनों से भेंट की। उन्होंने परिवार को सांत्वना देते हुए इस दुखद घटना को प्रशासनिक असंवेदनशीलता का परिणाम बताया।
मीडिया से बातचीत में अजय राय ने कहा—
उन्होंने बताया कि घटना के बाद अब तक न तो चुनाव आयोग और न ही प्रदेश सरकार की ओर से कोई अधिकारी परिवार की सहायता के लिए पहुंचा। इस पर उन्होंने जिलाधिकारी सीतापुर से फोन पर बात कर
- मृतक परिवार को 1 करोड़ रुपये की त्वरित आर्थिक सहायता
- परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी
- देने की मांग की।
कर्मचारियों में भय और आक्रोश
इस घटना के बाद जिले के बीएलओ और अन्य सरकारी कर्मचारियों में भय और असंतोष का माहौल है। कई कर्मचारियों ने अनौपचारिक रूप से यह आशंका जताई है कि अत्यधिक कार्य दबाव भविष्य में ऐसी और घटनाओं को जन्म दे सकता है। स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। आम जनता और कर्मचारी संगठनों में सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। चुनावी कार्यों में लगे कर्मचारियों की मानसिक सेहत को लेकर भी बहस तेज हो गई है। प्रदेश में बीते कुछ वर्षों में सरकारी कर्मचारियों द्वारा कार्य दबाव के चलते आत्महत्या या मानसिक अवसाद के मामले सामने आते रहे हैं।
- विभिन्न कर्मचारी संगठनों द्वारा लगातार कार्यभार कम करने की मांग की जाती रही है
- विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी ड्यूटी के दौरान मानसिक स्वास्थ्य सहायता और कार्य विभाजन बेहद जरूरी है।
बीएलओ उमेश गौतम की मृत्यु एक व्यक्तिगत त्रासदी के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्था के लिए चेतावनी भी है। कांग्रेस ने निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है ताकि जिम्मेदार लोगों की पहचान हो सके।
सरकार और चुनाव आयोग से अपेक्षा है कि भविष्य में कर्मचारियों पर कार्य दबाव कम करने और मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
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