नेहरू भवन लखनऊ में स्व. श्रीप्रकाश जायसवाल को श्रद्धांजलि देते कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता”नेहरू भवन लखनऊ में स्व. श्रीप्रकाश जायसवाल को श्रद्धांजलि देते कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता”

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लखनऊ स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय नेहरू भवन में पूर्व केंद्रीय मंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता स्व. श्रीप्रकाश जायसवाल को श्रद्धांजलि देने के लिए बड़ी संख्या में कांग्रेसजन एकत्र हुए। सभा में उनके लंबे राजनीतिक जीवन, संघर्षों और संगठन के प्रति समर्पण को याद किया गया। दिवंगत नेता के सम्मान में दो मिनट का मौन रखकर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

स्व. श्रीप्रकाश जायसवाल भारतीय राजनीति के उन नेताओं में गिने जाते थे, जिन्होंने जमीनी स्तर पर संगठन खड़ा किया और हर पद पर रहते हुए पार्टी की मजबूती को प्राथमिकता दी। वह तीन बार कानपुर से सांसद रहे और दो बार केंद्र में मंत्री पद संभाला। इसके पहले वे कानपुर के मेयर भी रहे तथा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 28 नवंबर को शुक्रवार के दिन उनके निधन की खबर ने न केवल उनके समर्थकों बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति को गहरे शोक में डुबो दिया।

नेहरू भवन में उमड़ी भीड़

1 दिसंबर को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय नेहरू भवन में दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देने के लिए बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता, पदाधिकारी और वरिष्ठ नेता पहुंचे। उनके चित्र पर पुष्प अर्पित किए गए और उनके सम्मान में दो मिनट का मौन रखा गया।

उनके योगदान को याद करती भावनाएँ

सभा के दौरान वक्ताओं ने उनके संघर्षपूर्ण राजनीतिक जीवन, संगठन के प्रति समर्पण और जनता से सीधे संवाद की उनकी अद्भुत क्षमता को याद किया। कई वक्ताओं ने कहा कि उनके जाने से पार्टी ने एक अनुभवी, समझदार और संवेदनशील नेता खो दिया है।

संस्मरणों में जीवित नेता

सभा में वरिष्ठ प्रवक्ता अंशू अवस्थी ने बताया कि 2009 के लोकसभा चुनाव में जब वे उनके चुनाव प्रभारी थे, तब पूरे कानपुर में “आपका श्रीप्रकाश जायसवाल” का नारा गूंजता था।
उन्होंने कहा:

जायसवाल जी कार्यकर्ताओं के चहेते, सरल स्वभाव वाले और हर किसी को साथ लेकर चलने वाले नेता थे। आज के राजनीतिक माहौल में ऐसे नेताओं से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।”

अन्य वक्ताओं ने भी यह बताया कि उनकी संगठन क्षमता, धैर्य और जनता की समस्याओं को सुनकर तुरंत समाधान करने की आदत ने उन्हें एक भरोसेमंद नेता के रूप में स्थापित किया।

कार्यक्रम में मौजूद कई वरिष्ठ नेताओं ने एकमत होकर कहा:

उनका निधन हमारी पीढ़ी के लिए एक बड़ी क्षति है। वे कार्यकर्ताओं के मार्गदर्शक और संगठन के लिए ऊर्जा का स्रोत थे।”

स्व. श्रीप्रकाश जायसवाल केवल कानपुर की राजनीति में ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में संगठनात्मक मजबूती का चेहरा थे। उनके निधन से कांग्रेस के अंदर नेतृत्व के उस अनुभव की कमी महसूस की जा रही है, जिसने वर्षों तक पार्टी को मजबूती प्रदान की।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं में शोक

कई कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से भी उनके मार्गदर्शन पर निर्भर रहते थे। नेतृत्व की उनकी शैली सहज और बातचीत पर आधारित थी, जो आधुनिक राजनीतिक व्यवहार से अलग और अधिक मानवीय मानी जाती थी। सिर्फ राजनीतिक नेता ही नहीं, बल्कि सामाजिक जीवन में भी उनकी सक्रिय भूमिका थी। कानपुर और आसपास के क्षेत्रों में बुनियादी विकास कार्यों, उद्योगों की समस्याओं और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर उन्होंने कई बार आवाज उठाई थी।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में कई ऐसे नेता हुए, जिन्होंने (जमीनी स्तर) से ऊपर उठकर प्रमुख पदों पर अपनी छाप छोड़ी जैसे पंडित कमलापति त्रिपाठी, नारायण दत्त तिवारी और हेमवती नंदन बहुगुणा।
स्व. श्रीप्रकाश जायसवाल भी इन्हीं नेताओं की परंपरा में गिने जाते हैं, जो संघर्ष और जनसेवा के बल पर राजनीति में शीर्ष पदों तक पहुंचे। उनका मेयर से सांसद और फिर केंद्रीय मंत्री बनने का सफर कार्यकर्ताओं और नवयुवकों के लिए प्रेरक माना जाता है।

नेहरू भवन में आयोजित श्रद्धांजलि सभा ने यह स्पष्ट कर दिया कि स्व. श्रीप्रकाश जायसवाल की राजनीतिक विरासत केवल पदों तक सीमित नहीं थी, बल्कि संगठन, कार्यकर्ताओं और जनता के साथ उनके जीवंत संबंधों में भी गहराई से बसती थी।
उनकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी और कांग्रेस कार्यकर्ता उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने की बात कह रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे नेताओं को याद रखना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वे राजनीति को संवाद, सरलता और संघर्ष से जोड़ते हैं — जो आज की राजनीति में अपेक्षाकृत कम होता जा रहा है।
आखिर में सभा में मौजूद सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।

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By ATHAR

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