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प्रतापगढ़ जिले के लालगंज क्षेत्र में मंगलवार देर रात एक युवक का शव घर के कमरे में फंदे से लटकता मिला। घटना से परिवार में कोहराम मच गया, वहीं सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में बीते कुछ वर्षों में घरेलू परिस्थितियों और मानसिक तनाव से जुड़ी घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। ग्रामीण इलाकों में बीमारी, आर्थिक दबाव और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी ऐसे मामलों को और गंभीर बना देती है। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण समाज
में मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक सहयोग की जरूरत को उजागर किया है। घर के अंदर एक युवक का शव फांसी के फंदे से लटकता मिला, जिसे देख परिजनों में अफरा-तफरी मच गई।यह घटना सांगीपुर थाना क्षेत्र के भैरवन गांव, लालगंज, प्रतापगढ़ में मंगलवार 24 दिसंबर की देर रात की है।
मृतक की पहचान 24 वर्षीय विजय कुमार, पुत्र अशोक कुमार, निवासी भैरवन गांव के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार विजय कुमार कुछ दिनों से बीमार चल रहा था। मंगलवार सुबह वह इलाज के लिए एम्स रायबरेली गया था। वहां से लौटने के बाद रात में अपने कमरे में सोने चला गया।
रात करीब 12 बजे जब उसकी मां रेखा देवी कमरे में पहुंचीं, तो बेटे को फांसी के फंदे से लटकता देख चीख-पुकार मच गई। आवाज सुनकर घर के अन्य सदस्य और आसपास के ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। युवक को फंदे से उतारकर तत्काल सांगीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेज दिया।
सांगीपुर थाना प्रभारी राजेन्द्र त्रिपाठी ने बताया कि
तहरीर मिलने पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।”
घटना के बाद भैरवन गांव में शोक का माहौल है। मृतक तीन भाइयों में दूसरे नंबर का था और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। ग्रामीणों में भी इस घटना को लेकर चिंता और चर्चा का माहौल है। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया। प्रतापगढ़ और आसपास के जिलों में पिछले कुछ वर्षों में आत्महत्या या संदिग्ध मौत के मामलों में वृद्धि देखी गई है।विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर मानसिक स्वास्थ्य परामर्श और पारिवारिक सहयोग से ऐसे मामलों को रोका जा सकता है।
प्रतापगढ़ की यह घटना न सिर्फ एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी है। बीमारी और मानसिक तनाव से जूझ रहे लोगों को समय पर चिकित्सा और भावनात्मक सहयोग मिलना बेहद जरूरी है। किसी भी संदिग्ध परिस्थिति में तुरंत स्थानीय प्रशासन या स्वास्थ्य विशेषज्ञों से संपर्क करना चाहिए।
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