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सुल्तानपुर जिले के प्रतिभाशाली ताइक्वांडो खिलाड़ी शाश्वत शुक्ला ने बरेली में आयोजित 41वीं नेशनल सीनियर ताइक्वांडो चैंपियनशिप 2025 में स्वर्ण पदक जीतकर जिले का नाम पूरे देश में रोशन कर दिया। उपलब्धि की खबर मिलते ही जिले में खुशी की लहर दौड़ गई और परिजनों के घर बधाई देने वालों का तांता लग गया। राष्ट्रीय टूर्नामेंट में शाश्वत शुक्ला की शानदार जीत
ताइक्वांडो भारत में तेजी से लोकप्रिय होता हुआ मार्शल आर्ट है, जिसने देश में कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी दिए हैं। सुल्तानपुर भी पिछले कुछ वर्षों में खेल प्रतिभाओं का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है। जिले के खिलाड़ी लगातार राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियां दर्ज कराते रहे हैं।
शाश्वत शुक्ला उन्हीं उभरते सितारों में से एक हैं, जिनका खेल सफर वर्षों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण की मिसाल है। उनकी बहन सिमोन शुक्ला पहले से ही ताइक्वांडो की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी हैं, जिससे परिवार में खेल का माहौल और प्रेरणा का स्रोत बना रहा।
राष्ट्रीय टूर्नामेंट में शाश्वत शुक्ला की शानदार जीत
बरेली के स्मार्ट सिटी हॉल स्पोर्ट्स स्टेडियम में 21 से 23 नवंबर 2025 तक आयोजित TFI की 41वीं नेशनल सीनियर ऑफिसियल ताइक्वांडो चैंपियनशिप में देशभर के शीर्ष खिलाड़ी मैदान में उतरे।
इसी प्रतियोगिता में सुल्तानपुर के शाश्वत शुक्ला ने अपना दमदार प्रदर्शन दिखाते हुए गोल्ड मेडल जीत लिया, जो उनके खेल करियर की एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
शाश्वत वर्तमान में दिल्ली की टोकस अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। टूर्नामेंट के दौरान उन्होंने तकनीक, संतुलन और तेज गति का शानदार प्रदर्शन किया, जिसने निर्णायकों और दर्शकों दोनों को प्रभावित किया।
परिवार और जिले में खुशी की लहर
गोल्ड मेडल की खबर मिलते ही शाश्वत शुक्ला के सुल्तानपुर स्थित घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। परिवार, रिश्तेदारों, खेल प्रेमियों और शुभचिंतकों ने उनकी इस श्रेष्ठ उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया। शाश्वत ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी समाजसेवी मां संगीता शुक्ला, अपने कोच हरीश टोकस, और अपनी बड़ी बहन सिमोन शुक्ला को दिया है।
सिमोन न केवल अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो खिलाड़ी हैं, बल्कि नेशनल रेफरी भी हैं और “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” योजना की सुल्तानपुर ब्रांड एंबेसडर भी हैं।
यह पारिवारिक माहौल शाश्वत के लिए निरंतर प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। इस उपलब्धि को लेकर शाश्वत के कोच हरीश टोकस का बयान उपलब्ध नहीं हुआ है। राहत की बात यह है कि टूर्नामेंट आयोजन समिति और TFI ने खिलाड़ी के प्रदर्शन की खुले शब्दों में सराहना की है। स्थानीय खेल अधिकारियों ने भी सुल्तानपुर की इस उपलब्धि को जिले की खेल संस्कृति के लिए प्रेरणादायक बताया है।
जिले के युवाओं में बढ़ी प्रेरणा
सुल्तानपुर जैसे जिलों में खेल संसाधनों और सुविधाओं की सीमाओं के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना यहां के युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा का कारण है। खेल अकादमियों में दाखिले बढ़ने की संभावना
युवाओं में मार्शल आर्ट सीखने की इच्छा बढ़ना
जिला प्रशासन द्वारा खिलाड़ियों को बेहतर सहयोग मिलने की उम्मीद
स्कूलों और कॉलेजों में खेल आयोजनों को बढ़ावाइस सफलता के चलते स्थानीय खेल बाजारों और स्पोर्ट्स क्लबों में भी उत्साह देखा जा रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में सुल्तानपुर के खिलाड़ियों ने अलग-अलग खेलों में कई उपलब्धियाँ हासिल की हैं।
वर्ष 2023–2024 में जिले के खिलाड़ियों ने राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीते।
ताइक्वांडो और अन्य मार्शल आर्ट में भागीदारी साल-दर-साल बढ़ रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे प्रदर्शन से जिले का खेल भविष्य और मजबूत होगा।शाश्वत की यह जीत जिले के खेल इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ती है।
शाश्वत शुक्ला की नेशनल गोल्ड जीत न सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि सुल्तानपुर जिले के लिए सम्मान और गर्व का विषय है। यह साबित करता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन के साथ छोटे जिलों के खिलाड़ी भी राष्ट्रीय मंच पर चमक सकते हैं। अंत में, प्रशासन और खेल संगठनों को चाहिए कि ऐसे खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करते हुए बेहतर संसाधन उपलब्ध कराएँ, ताकि सुल्तानपुर के और भी युवा राष्ट्रीय फलक पर नाम चमका सकें।
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