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कर्नाटक की राजनीति में जारी संभावित नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की मुलाकात ने हलचल तेज कर दी है। दोनों नेता मुख्यमंत्री आवास में नाश्ते पर मिले और बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में मतभेद की खबरों को खारिज कर दिया।
कर्नाटक में कांग्रेस सरकार बनने के बाद से ही मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और डी.के. शिवकुमार के बीच संतुलन की राजनीति चर्चा में रही है। 2023 चुनाव के बाद आलाकमान द्वारा दोनों नेताओं के बीच कथित रूप से ढाई-ढाई साल के सत्ता-साझेदारी फॉर्मूले की बात सामने आई थी।
20 नवंबर को सरकार के ढाई साल पूरे होने के साथ ही नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें एक बार फिर तेज हो गईं। शिवकुमार समर्थक समूह समय-समय पर इसे लेकर खुलकर मांग उठाते रहे हैं।
बृहस्पतिवार सुबह बेंगलुरु के कावेरी रेसिडेंस (मुख्यमंत्री आवास) में सिद्धारमैया और डी.के. शिवकुमार की मुलाकात हुई।
शिवकुमार नाश्ते के लिए सीएम आवास पहुंचे और दोनों नेताओं ने साथ में लगभग एक घंटे तक बातचीत की।
बैठक से जुड़े प्रमुख बिंदु
- स्थान: मुख्यमंत्री आवास, बेंगलुरु
- समय: 29 नवंबर, सुबह
- उद्देश्य: कथित मतभेद दूर करना और नेतृत्व स्थिति स्पष्ट करना
- संभावित परिणाम: आलाकमान के फैसले से पहले आंतरिक एकजुटता का संदेश देना
- बैठक के बाद शिवकुमार सीधे दिल्ली जाने की संभावना भी जताई गई, जिससे राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है।
सिद्धारमैया का बयान
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा—
हमारे बीच अच्छी बातचीत हुई। हमारे बीच कोई मतभेद नहीं है और भविष्य में भी नहीं होगा। हमने विपक्ष का मजबूती से सामना करने की रणनीति पर चर्चा की।”
उन्होंने यह भी कहा कि दोनों नेता पार्टी के हित में मिलकर काम करेंगे।
शिवकुमार का बयान
उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा—
नाश्ता अच्छा था, और किसी भी राजनीतिक मुद्दे पर विशेष चर्चा नहीं हुई। जो आलाकमान कहेगा, वही करूंगा।”
उन्होंने सोशल मीडिया पर भी लिखा—
कावेरी रेसिडेंस पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से मुलाकात की। कर्नाटक की प्राथमिकताओं और आगे के रास्ते पर अच्छी चर्चा हुई।”
गृहमंत्री जी. परमेश्वर का बयान
कर्नाटक के गृहमंत्री ने कहा—
किसी की इच्छा शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की है, किसी की सिद्धारमैया को रखने की। ऐसी उम्मीदें स्वाभाविक हैं, लेकिन अंतिम फैसला आलाकमान का होगा।”
राजनीतिक हलचल के चलते बेंगलुरु में मीडिया और प्रशासनिक गतिविधियाँ बढ़ गईं।
प्रमुख प्रभाव:
- राजनीतिक गतिविधियों में वृद्धि: कांग्रेस कार्यालय और मंत्रालयों में रणनीतिक मीटिंगों की हलचल तेज।
- शहर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत: वीवीआईपी मूवमेंट के कारण पुलिस ने कई क्षेत्रों में तैनाती बढ़ाई।
- जनता में चर्चा तेज: मुख्यमंत्री परिवर्तन की संभावनाओं ने राजनीतिक बहस को हवा दी।
- सरकारी कामकाज पर ध्यान: राजनैतिक गतिविधियों के बावजूद प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सभी विभाग सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।
कर्नाटक की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन कोई नया विषय नहीं है।
ऐतिहासिक रूप से राज्य में कई बार कार्यकाल के बीच बदलाव हुए हैं।
तुलना:
- 2013–2018 में भी कांग्रेस सरकार की आंतरिक राजनीति चर्चा में रही।
- 2020 में बीजेपी सरकार के दौरान भी नेतृत्व बदलने की कार्रवाई सामने आई थी।
- 2023–2024 में सत्ता-साझेदारी फॉर्मूला एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है।
- हालांकि, बैठक में हुई चर्चा के ठोस आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
सिद्धारमैया और शिवकुमार की मुलाकात ने कर्नाटक में चल रहे राजनीतिक तनाव को कुछ हद तक शांत किया है, लेकिन नेतृत्व परिवर्तन पर अंतिम निर्णय आलाकमान ही करेगा।
अगले कुछ दिनों में दिल्ली में होने वाली संभावित बैठकों से स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
जनता और राजनीतिक पर्यवेक्षकों को सलाह है कि अपुष्ट खबरों पर भरोसा न करें और आधिकारिक घोषणाओं का इंतजार करें।
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