मुर्शिदाबाद दंगा केस में 13 दोषियों पर फैसला सुनाती जंगीपुर जिला अदालतमुर्शिदाबाद दंगा केस में 13 दोषियों पर फैसला सुनाती जंगीपुर जिला अदालत

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पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में अप्रैल महीने के दौरान हुए सांप्रदायिक दंगे के एक गंभीर मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। जंगीपुर की जिला अदालत ने हरगोबिंदो दास और उनके बेटे चंदन दास की हत्या के मामले में 13 आरोपियों को दोषी ठहराया है। अब मंगलवार को दोषियों को सजा सुनाई जाएगी।

वक्फ (संशोधन) अधिनियम के विरोध के बीच भड़की थी हिंसा

मुर्शिदाबाद जिला इस वर्ष अप्रैल में उस समय सुर्खियों में आया था, जब वक्फ (संशोधन) अधिनियम के विरोध में हुए प्रदर्शन ने सांप्रदायिक हिंसा का रूप ले लिया। कई इलाकों में तनाव, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई थीं।हरगोबिंदो दास और उनके पुत्र चंदन दास की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई।यह घटना पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के जंगीपुर क्षेत्र में हुई।हत्या की घटना 12 अप्रैल को हुई थी, जबकि अदालत ने लगभग 9 महीने बाद 23 दिसंबर को दोष सिद्ध किया।

शांति स्थापित करने की कोशिश में गई जान

हरगोबिंदो दास और उनके बेटे चंदन दास की हत्या 12 अप्रैल को हुई थी। चार्जशीट के अनुसार, दोनों गांव में फैल रहे दंगे को रोकने और लोगों को शांत करने का प्रयास कर रहे थे, इसी दौरान उन पर हमला किया गया।राज्य पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच में सामने आया कि हमला अचानक नहीं बल्कि पूर्व नियोजित (Pre-Planned) था। आरोपियों को एक-एक कर गिरफ्तार किया गया।

एसआईटी की चार्जशीट में क्या कहा गया

एसआईटी ने अदालत में करीब 900 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें हत्या को सुनियोजित साजिश बताया गया।

एसआईटी / अभियोजन पक्ष का आधिकारिक बयानअदालत ने एसआईटी के तर्कों और साक्ष्यों को स्वीकार करते हुए 13 आरोपियों को दोषी ठहराया।

मुआवज़े को लेकर विवाद

राज्य सरकार का प्रस्ताव ठुकराया

मृतकों के परिजनों ने तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा दिए गए मुआवज़े के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया जंगीपुर जिला अदालत ने सोमवार को दोष सिद्ध किया है, जबकि मंगलवार को सजा की घोषणा की जाएगी। दोषियों को उम्रकैद या कठोर सजा मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, परिवार ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी द्वारा दिए गए मुआवज़े को स्वीकार कर लिया, जो उस समय राजनीतिक चर्चा का विषय बना था।

सीएपीएफ तैनाती का आदेश

इस साल अप्रैल में कलकत्ता हाईकोर्ट ने मुर्शिदाबाद दंगों की जांच के लिए विशेष जांच समिति गठित करने और सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (CAPF) की तैनाती का आदेश दिया था। जस्टिस सौमेन सेन और जस्टिस राजा बसु चौधरी की डिवीजन बेंच ने कहा कि: अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि CAPF को समय पर तैनात किया गया होता, तो स्थिति इतनी “गंभीर” और “अस्थिर” नहीं होती।

जनता में भय और आक्रोश

इस फैसले के बाद इलाके में लोगों के बीच मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की भावना है, वहीं दंगों की याद से अब भी लोग सहमे हुए हैं। हाईकोर्ट ने राज्य प्रशासन को निर्देश दिया था कि संवेदनशील इलाकों में स्कूलों का सामान्य संचालन प्रभावित न हो। दंगों के दौरान कई स्कूल अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए थे। दंगों के समय स्थानीय बाजार और यातायात बुरी तरह प्रभावित हुए थे। कई दिनों तक व्यापार ठप रहा था, जिसका असर छोटे दुकानदारों पर पड़ा।

पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ वर्षों में सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े कई मामले सामने आए हैं, लेकिन इस केस में तेज़ चार्जशीट और दोष सिद्धि को अहम माना जा रहा है।

  • चार्जशीट: 900 पन्ने
  • दोषी: 13 आरोपी
  • जांच एजेंसी: SIT
  • पिछले 5 वर्षों में सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े मामलों के आंकड़े

मुर्शिदाबाद दंगा मामले में पिता-पुत्र की हत्या के दोषियों को सजा मिलना कानून के राज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार को न्याय दिलाता है, बल्कि भविष्य में ऐसी हिंसा को रोकने का संदेश भी देता है। प्रशासन के लिए यह एक चेतावनी है कि संवेदनशील हालात में त्वरित और प्रभावी कदम उठाना अनिवार्य है।

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By ATHAR

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