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जौनसार बावर क्षेत्र के सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेताओं ने अपनी लंबित समस्याओं को लेकर खाद्य सचिव को ज्ञापन सौंपा है। एसोसिएशन ने केवाईसी प्रक्रिया, लंबित लाभांश, चीनी वितरण और गोदामों में धर्म कांटा न होने जैसी समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की है।
उत्तराखंड में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। सस्ता गल्ला दुकानों के माध्यम से राशन, गेहूं, चावल, चीनी और अन्य आवश्यक वस्तुएं रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जाती हैं। इस व्यवस्था की सफलता काफी हद तक स्थानीय राशन विक्रेताओं पर निर्भर करती है।
जौनसार बावर जनजातीय क्षेत्र भौगोलिक रूप से दुर्गम माना जाता है। यहां परिवहन, भंडारण और आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियां पहले से ही अधिक हैं। ऐसे में यदि विक्रेताओं को समय पर लाभांश न मिले या वितरण व्यवस्था में तकनीकी व प्रशासनिक समस्याएं हों, तो इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ता है। बीते कुछ वर्षों से क्षेत्र के सस्ता गल्ला विक्रेता अपनी समस्याओं को लेकर विभागीय अधिकारियों के समक्ष आवाज उठाते रहे हैं।
यह मामला विकासनगर क्षेत्र से जुड़ा है, जहां जौनसार बावर जनजाति सरकारी सस्ता गल्ला एसोसिएशन ने खाद्य सचिव को औपचारिक रूप से ज्ञापन सौंपा। एसोसिएशन के अध्यक्ष श्याम सिंह राठौर ने बताया कि विभाग द्वारा राशन कार्ड की केवाईसी (KYC) प्रक्रिया का पूरा भार सस्ता गल्ला विक्रेताओं पर डाल दिया गया है, जबकि यह कार्य विभागीय कर्मचारियों द्वारा ब्लॉक स्तर पर कराया जाना चाहिए।
अंत्योदय कार्ड धारकों को चीनी नहीं
एसोसिएशन ने यह भी बताया कि पिछले दो वर्षों से अंत्योदय कार्ड धारकों को चीनी का वितरण नहीं किया जा रहा है, जिससे सबसे गरीब परिवार प्रभावित हो रहे हैं। ज्ञापन में बताया गया कि मई 2025 से दिसंबर 2025 तक सात माह का लाभांश अभी तक विक्रेताओं को नहीं मिला है। इससे विक्रेताओं को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। जौनसार बावर क्षेत्र के सात गोदामों में धर्म कांटा न होने के कारण खाद्यान्न बिना तौल के दिया जाता है। इससे विक्रेताओं को अक्सर कम राशन मिलने की शिकायत रहती है और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
वर्तमान में सस्ता गल्ला विक्रेताओं को 180 रुपये प्रति कुंतल लाभांश दिया जा रहा है। एसोसिएशन ने इसे बढ़ाने की मांग भी सरकार के समक्ष रखी है।
एसोसिएशन अध्यक्ष श्याम सिंह राठौर का बयान
श्याम सिंह राठौर ने कहा कि विक्रेताओं और उपभोक्ताओं दोनों की समस्याओं को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है। यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो राशन वितरण व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। खाद्य सचिव या विभाग की ओर से इस ज्ञापन पर अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि राशन वितरण में अनियमितता रहती है, तो इसका सीधा असर गरीब और अंत्योदय कार्ड धारक परिवारों पर पड़ता है। चीनी जैसी आवश्यक वस्तु न मिलने से उनकी दैनिक जरूरतें प्रभावित हो रही हैं।
सस्ता गल्ला विक्रेता
लंबित लाभांश और कम तौल की समस्या से विक्रेताओं की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है। इससे भविष्य में दुकान संचालन भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। धर्म कांटा न होने के कारण खाद्यान्न की सही तौल न होना आपूर्ति श्रृंखला पर सवाल खड़े करता है। इससे पारदर्शिता भी प्रभावित होती है। जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों में यदि राशन व्यवस्था कमजोर होती है, तो कुपोषण और सामाजिक असंतोष जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
राज्य के कई अन्य क्षेत्रों में सस्ता गल्ला दुकानों पर केवाईसी प्रक्रिया विभागीय स्तर पर कराई जाती है और गोदामों में डिजिटल धर्म कांटे लगाए गए हैं। इसके विपरीत जौनसार बावर क्षेत्र में अभी भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव देखा जा रहा है।
जौनसार बावर क्षेत्र के सस्ता गल्ला विक्रेताओं द्वारा उठाई गई समस्याएं न केवल उनकी आजीविका से जुड़ी हैं, बल्कि गरीब उपभोक्ताओं के हितों से भी संबंधित हैं। यदि इन मांगों पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। सरकार और विभाग को चाहिए कि इन समस्याओं का शीघ्र समाधान कर व्यवस्था को सुचारू बनाए।
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