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हरिद्वार, 7 जनवरी 2026।
हरिद्वार विकास भवन सभागार में जिलास्तरीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों की क्षमता वृद्धि के उद्देश्य से एक दिवसीय आउटरीच प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम डॉ. आर.एस. टोलिया उत्तराखंड प्रशासन अकादमी (UAoA), नैनीताल द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें “आपदा प्रबंधन” तथा “कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013” जैसे अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जिला स्तर पर कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आपदा की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया देने, प्राथमिक उपचार की जानकारी, तथा कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और लैंगिक समानता से जुड़े कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक करना रहा। बदलते समय में प्रशासनिक जिम्मेदारियों को अधिक संवेदनशील और उत्तरदायी बनाने की दिशा में यह कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

70 से अधिक अधिकारियों ने लिया प्रशिक्षण
कार्यक्रम में विभिन्न विभागों से जुड़े कुल 70 अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने प्रतिभाग किया। सभी प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण सत्रों में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए अपने अनुभव साझा किए और व्यावहारिक अभ्यासों में हिस्सा लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ सुश्री रागिनी तिवारी, पाठ्यक्रम निदेशक, डॉ. आर.एस. टोलिया उत्तराखंड प्रशासन अकादमी, नैनीताल द्वारा किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम अकादमी द्वारा आउटरीच मोड में आयोजित किया गया है, ताकि आवश्यकता-आधारित प्रशिक्षण को अधिकतम अधिकारियों तक उनके कार्यक्षेत्र में ही उपलब्ध कराया जा सके।
तीन दिवसीय प्रशिक्षण श्रृंखला की जानकारी
सुश्री रागिनी तिवारी ने जानकारी दी कि यह आउटरीच प्रशिक्षण एक तीन दिवसीय श्रृंखला का हिस्सा है।
- पहला दिन: आपदा प्रबंधन एवं कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम
- दूसरा दिन: सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act)
- तीसरा दिन: प्रशासनिक सेवाएं एवं बजट संबंधी प्रशिक्षण
- इस क्रमबद्ध प्रशिक्षण से अधिकारियों को प्रशासनिक कार्यों की समग्र समझ विकसित करने में सहायता मिलेगी।
प्रशिक्षण सत्रों में जनपद स्तर पर आपदा की तैयारी, रोकथाम के उपाय, आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली, तथा प्राथमिक उपचार की विस्तृत जानकारी दी गई। श्रीमती मीरा रावत, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, हरिद्वार ने आपदा प्रबंधन से जुड़े व्यावहारिक अनुभव साझा किए और वास्तविक केस स्टडी के माध्यम से अधिकारियों को प्रशिक्षित किया।

महिला सुरक्षा एवं POSH अधिनियम पर प्रशिक्षण
कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु लैंगिक अवधारणाओं एवं महिला लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम, 2013 के विभिन्न प्रावधानों पर गहन चर्चा की गई। इस सत्र का संचालन डॉ. दीपा मेहरा रावत, वरिष्ठ सहायक प्राध्यापक, उच्च शिक्षा, देहरादून द्वारा किया गया। उन्होंने आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की भूमिका, शिकायत प्रक्रिया और कानूनी दायित्वों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को केस स्टडी, समूह चर्चा एवं व्यावहारिक अभ्यास के माध्यम से वास्तविक परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने का अवसर दिया गया। इससे प्रशिक्षण को केवल सैद्धांतिक न रखकर पूरी तरह व्यवहारिक बनाया गया। कार्यक्रम का समापन मूल्यांकन एवं सत्यापन सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान, अनुभव और सुझाव साझा किए। अधिकांश प्रतिभागियों ने इस कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी, ज्ञानवर्धक और व्यवहारिक बताया।
प्रशासनिक क्षमता निर्माण की दिशा में अहम कदम
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम जिला प्रशासन की क्षमता निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ है। इससे न केवल अधिकारियों की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि आपदा प्रबंधन एवं कार्यस्थल पर सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।
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