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रिपोर्टर (सचिन शर्मा)
नववर्ष को देखते हुए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए हरिद्वार में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। ज्वालापुर और ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया में की गई छापेमारी के दौरान बिना फूड लाइसेंस चल रही एक डेयरी का चालान किया गया, जबकि कई खाद्य सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।
त्योहारों और नववर्ष पर बढ़ती खाद्य जांच
नववर्ष और त्योहारों के समय दूध, पनीर, मिठाइयों और खाद्य तेलों की खपत अचानक बढ़ जाती है। ऐसे समय में मिलावट और मानकों की अनदेखी की शिकायतें भी अधिक सामने आती हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग समय-समय पर विशेष अभियान चलाता है, ताकि आम जनता को सुरक्षित और मानक के अनुरूप खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराए जा सकें। हरिद्वार जैसे धार्मिक और पर्यटन नगरी में खाद्य गुणवत्ता का मुद्दा और भी संवेदनशील माना जाता है।
छापेमारी कहां की गई
खाद्य सुरक्षा अधिकारी कैलाश चंद्र टम्टा के नेतृत्व में विभागीय टीम ने
- शास्त्रीनगर, ज्वालापुर
- ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया, हरिद्वार
- में औचक निरीक्षण और छापेमारी की।
न्यू अमर डेयरी पर कार्रवाई
टीम ने शास्त्रीनगर, ज्वालापुर स्थित न्यू अमर डेयरी पर छापा मारा।
- यहां से पनीर और दूध के नमूने लिए गए
- डेयरी संचालक फूड लाइसेंस प्रस्तुत नहीं कर सका
- नियमों के उल्लंघन पर डेयरी संचालक का चालान किया गया
विभाग का पक्ष
जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी एम.एन. जोशी ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा—इसके अलावा ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित आशा इंटरप्राइजेज का भी निरीक्षण किया गया, जहां से तिल के तेल का नमूना लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया।
विभाग का पक्ष
जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी एम.एन. जोशी ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा— उन्होंने बताया कि सभी खाद्य नमूनों को प्रयोगशाला भेजा गया है और जांच रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जागरूकता और कारोबारियों में सतर्
इस कार्रवाई के बाद स्थानीय उपभोक्ताओं में खाद्य सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ी है। लोग अब दूध, पनीर और तेल जैसे रोजमर्रा के खाद्य पदार्थ खरीदते समय लाइसेंस और गुणवत्ता पर ध्यान देने लगे हैं। इस कार्रवाई का यातायात या शिक्षा व्यवस्था पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ा, लेकिन औचक निरीक्षण के चलते कुछ समय के लिए संबंधित क्षेत्रों में हलचल जरूर देखी गई। इस कार्रवाई का यातायात या शिक्षा व्यवस्था पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ा, लेकिन औचक निरीक्षण के चलते कुछ समय के लिए संबंधित क्षेत्रों में हलचल जरूर देखी गई।
डेयरी और खाद्य कारोबारियों पर असर
छापेमारी से डेयरी संचालकों और खाद्य कारोबारियों में भी सतर्कता बढ़ी है। कई व्यापारियों ने अपने दस्तावेज और फूड लाइसेंस अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कार्रवाई से बचा जा सके।हरिद्वार जिले में इससे पहले भी कई बार खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा अभियान चलाए जा चुके हैं।
- पिछले वर्षों में मिलावटी दूध और पनीर के मामले सामने आए हैं
- त्योहारों के समय बिना लाइसेंस चल रहे प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की गई है
- हालांकि, इन अभियानों से जुड़े आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
- विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित जांच और कड़ी कार्रवाई से ही खाद्य मिलावट पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
बिना लाइसेंस कारोबार पर सख्ती जरूरी
हरिद्वार में की गई यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि खाद्य सुरक्षा विभाग बिना लाइसेंस और मानकों की अनदेखी करने वाले कारोबारियों पर सख्त है। उपभोक्ताओं को भी चाहिए कि वे केवल लाइसेंस प्राप्त प्रतिष्ठानों से ही खाद्य सामग्री खरीदें।
खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन न केवल कानूनी जिम्मेदारी है, बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय भी है।
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