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हल्द्वानी दंगा प्रकरण से जुड़े एक महत्वपूर्ण आदेश में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कथित मुख्य साजिशकर्ता अब्दुल मलिक की जमानत याचिका खारिज कर दी। वहीं, तीन अन्य आरोपियों को जमानत प्रदान की गई। अदालत ने सरकार को सभी आरोपों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
हल्द्वानी दंगा और विवादित घटनाक्रम
हल्द्वानी दंगा उस समय चर्चा में आया था जब सरकारी जमीन पर कथित कब्जे को लेकर प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच तनाव बढ़ गया। घटना के बाद प्रदेश पुलिस ने बड़ी संख्या में आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें अब्दुल मलिक को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया। अब्दुल मलिक पिछले वर्ष फरवरी से जेल में बंद हैं।उन पर सरकारी भूमि पर कब्जा, प्रशासनिक टीम पर हमले और दंगा भड़काने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।कई बार जमानत याचिका दायर की गई, लेकिन परिणाम वही रहा—जमानत अस्वीकृत।
लंबे समय से चल रहा कानूनी संघर्ष
सोमवार को उत्तराखंड हाईकोर्ट में वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने कुल 16 मामलों की सुनवाई की। अब्दुल मलिक की ओर से जमानत मांगते हुए कहा गया:
- वे निर्दोष हैं।
- घटना के दिन वे मौके पर नहीं थे।
- उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं है।
- वे वरिष्ठ नागरिक हैं और लंबे समय से जेल में बंद हैं।
सरकार की आपत्ति
सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि:
- मलिक इस दंगे के मुख्य साजिशकर्ता हैं।
- उन्होंने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया।
- जब प्रशासन टीम जांच करने गई तो उन पर हमला किया गया।
- अदालत ने इन तर्कों को गंभीरता से लेते हुए जमानत देने से इंकार कर दिया।
अदालत ने आदेश देते हुए सरकार को निर्देशित किया कि:
आरोपी पर लगे सभी आरोपों का विस्तृत और दस्तावेजी ब्योरा प्रस्तुत किया जाए।”
इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि गंभीर आरोपों को देखते हुए बिना पर्याप्त जानकारी के जमानत नहीं दी जा सकती।हल्द्वानी में यह मामला लंबे समय से संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है।
जनता में मिश्रित प्रतिक्रिया
- कुछ लोग अदालत के फैसले को न्याय की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं।
- वहीं, आरोपी पक्ष के समर्थक फैसले से निराश।
- दंगे के बाद से कई इलाकों में आर्थिक गतिविधियों में गिरावट दर्ज की गई थी।
- हालांकि स्थिति अब सामान्य हो चुकी है, पर मामला अदालत में रहने के कारण हलचल बनी रहती है।
- पुलिस संवेदनशील इलाकों में नजर बनाए हुए है।किसी भी संभावित विवाद को रोकने के लिए अतिरिक्त बल तैनात है।
हल्द्वानी के इतिहास में इससे पहले भी हिंसा या भीड़ से जुड़े मामले सामने आए हैं, लेकिन:
- इस बार गिरफ्तारी, आरोप और राजनीतिक संवेदनशीलता कहीं अधिक है।
- पहले के मामलों में इतने बड़े पैमाने पर 16 मामलों की एक साथ सुनवाई दुर्लभ देखी गई है।
- दंगा-संबंधी मामलों में जमानत मिलना आमतौर पर कठिन होता है, और इस केस में भी अदालत ने यही रुख बनाए रखा है।
हल्द्वानी दंगा केस में हाईकोर्ट का यह फैसला मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को दर्शाता है।
मुख्य आरोपी को जमानत न मिलने से यह स्पष्ट है कि अदालत विस्तृत साक्ष्यों के बिना कोई राहत देने के पक्ष में नहीं है।
अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी, और तब तक सभी पक्षों को आवश्यक दस्तावेज तैयार करने होंगे।
जनता से अपील है कि मामले को न्यायिक प्रक्रिया पर छोड़कर शांति बनाए रखें।
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