हरिद्वार में गूंजा वैदिक मंत्र! गुरुकुल कांगड़ी के 123वें वार्षिकोत्सव की भव्य शुरुआतहरिद्वार में गूंजा वैदिक मंत्र! गुरुकुल कांगड़ी के 123वें वार्षिकोत्सव की भव्य शुरुआत

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रिपोर्ट (अंजू कुमारी)

हरिद्वार | 11 अप्रैल 2026

धर्मनगरी हरिद्वार स्थित गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय का 123वाँ वार्षिकोत्सव ‘प्रोत्साहन’ शनिवार को 21 कुण्डीय वैदिक यज्ञ के साथ भव्य रूप से प्रारम्भ हुआ। विश्वविद्यालय सभागार परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण का अनूठा संगम देखने को मिला।

वैदिक यज्ञ से हुआ शुभारम्भ, दिखी परंपरा और आधुनिकता की झलक

गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार में वैदिक यज्ञ के साथ वार्षिकोत्सव का शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक परंपराओं के अनुसार 21 कुण्डीय यज्ञ से हुई, जिसमें विद्वानों और आचार्यों ने वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ आहुतियां दीं। इस आयोजन ने भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने की सराहना

मुख्य अतिथि मदन कौशिक

मुख्य अतिथि मदन कौशिक ने अपने संबोधन में कहा कि गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय ने प्राचीन परंपराओं को संजोते हुए आधुनिक शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में गुरुकुल की भूमिका ऐतिहासिक रही है और आज के छात्र “विकसित भारत-2047” के लक्ष्य को प्राप्त करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

विशिष्ट अतिथि डॉ. मोहनचन्द्र जोशी ने विश्वविद्यालय को स्वामी दयानन्द सरस्वती और स्वामी श्रद्धानन्द के सपनों का साकार रूप बताया। उन्होंने इसे भारतीय संस्कृति और शिक्षा का गौरवशाली केंद्र बताते हुए पुरातत्व विभाग की ओर से इस पवित्र स्थल के संरक्षण का आश्वासन दिया। नगर मेयर किरण जैसल ने छात्रों से आह्वान किया कि वे गुरुकुल की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्र सेवा में अग्रणी भूमिका निभाएं और भारत को पुनः “विश्वगुरु” बनाने में योगदान दें।

गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार में वैदिक यज्ञ के साथ वार्षिकोत्सव का शुभारंभ

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. प्रतिभा मेहता लूथरा ने कहा कि गुरुकुल केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि संस्कारों का भी केंद्र है।

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में जल्द ही:
वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष केंद्र स्थापित किए जाएंगे। कुलसचिव प्रो. सत्यदेव निगमालंकार और आईक्यूएसी निदेशक प्रो. पंकज मदान ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।

पिछले वर्ष:

  • 315 शोध पत्र प्रकाशित
  • 41 पुस्तकें
  • 104 अध्याय
  • 15 पेटेंट पंजीकृत

यह आंकड़े विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रगति को दर्शाते हैं। वार्षिकोत्सव के अवसर पर मुख्य अतिथि एवं अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में औषधीय पौधों का वृक्षारोपण किया गया। इस पहल के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।पुरातत्व संग्रहालय द्वारा आयोजित प्रदर्शनी में स्वामी श्रद्धानन्द के जीवन चरित्र को दर्शाया गया। इस प्रदर्शनी के जरिए छात्रों को गुरुकुल के इतिहास और परंपराओं से परिचित कराया गया।

गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय का यह 123वाँ वार्षिकोत्सव

गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय का यह 123वाँ वार्षिकोत्सव केवल एक शैक्षणिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और आधुनिक शिक्षा के संगम का प्रतीक बनकर उभरा। यह आयोजन छात्रों को न केवल ज्ञान बल्कि संस्कार और राष्ट्र सेवा के प्रति प्रेरित करने वाला साबित हुआ।

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By ATHAR

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