शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा खुशीमठ से चारधाम शीतकालीन यात्रा शुभारंभशंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा खुशीमठ से चारधाम शीतकालीन यात्रा शुभारंभ

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उत्तरकाशी उत्तराखंड में श्रद्धा एवं भक्ति का प्रतीक चारधाम शीतकालीन तीर्थ यात्रा आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है। शनिवार को ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मां यमुना के शीतकालीन प्रवास स्थल खुशीमठ (खरसाली) में विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर शीतकालीन यात्रा का शुभारंभ किया। इस दौरान पूरा वातावरण जय-जयकार से गूंज उठा और भक्तों में उत्साह व आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत संगम दिखाई दिया।

यात्रा प्रारंभ होने के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद महाराज जब बड़कोट नगर में पहुँचे तो नगर पालिका प्रशासन एवं स्थानीय जनता ने उनका जोरदार स्वागत किया। नगर पालिका अध्यक्ष विनोद डोभाल एवं उनकी धर्मपत्नी प्रो. योगिता डोभाल ने शंकराचार्य जी के चरणों की चरणपादुका का पूजन कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत जुलूस निकाला गया।
धार्मिक उल्लास से गुंजायमान बड़कोट

बड़कोट नगर के विभिन्न मोहल्लों में शंकराचार्य जी का स्वागत करने के लिए श्रृद्धालुओं ने सुबह से ही विशेष तैयारियां कर ली थीं। यमुना तट पर बसे इस प्राचीन और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण नगर में शीतकालीन यात्रा का शुभारंभ स्थानीय लोगों के लिए आध्यात्मिक सौभाग्य माना जाता है।

स्थानीय नागरिकों ने फूलों की वर्षा और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर शंकराचार्य जी का अभिनंदन किया। नगर पालिका परिसर में विशेष पूजा और स्वागत समारोह आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति

शुभारंभ कार्यक्रम में प्रशासन और स्थानीय शासन के प्रतिनिधियों ने भी सहभागिता निभाई। कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख व्यक्ति—

  • दंडीस्वामी मुकुंदा नंद
  • नगर पालिका अध्यक्ष विनोद डोभाल
  • प्रो. योगिता डोभाल
  • अजबीन पंवार
  • कपिल देव रावत
  • उमेश सती
  • किशोर शास्त्री
  • देवेंद्र रावत
  • डॉ. बृजेश सती
  • प्रकाश रावत
  • जीतमणि पैन्यूली
  • शांति ठाकुर
  • भगवान सिंह रावत
  • उपजिलाधिकारी बृजेश तिवारी
  • नायब तहसीलदार खजान असवाल
  • ईओ उमेश सुयाल
    आदि सम्मानित उपस्थित रहे।

सभी ने शंकराचार्य जी के दर्शन कर धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक उत्थान की निरंतरता को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

चारधाम शीतकालीन यात्रा का महत्व

बर्फबारी और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते शीतकाल के दौरान चारधाम के कपाट बंद रहते हैं। ऐसे में देवी-देवताओं की गद्दी अपने-अपने शीतकालीन प्रवास स्थलों में विराजमान होती है और वहीं पूजा-अर्चना एवं दर्शन के लिए द्वार खुले रहते हैं।

मां यमुना का शीतकालीन प्रवास — खुशीमठ (खरसाली)

  • यमुना धाम यमुनोत्री से प्राचीन धार्मिक महत्व
  • शीतकाल में शंखनाद व वेद ध्वनि के साथ पूजा
  • हजारों श्रद्धालु इस अवधि में दर्शन करने पहुंचते हैं

चारधाम शीतकालीन यात्रा स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है। पर्यटन, होटल व्यवसाय, स्थानीय दुकानदारों और यात्रा से जुड़े सभी लोगों के लिए यह समय आर्थिक दृष्टि से काफी सहायक होता है।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद: आध्यात्मिक धरोहर के संरक्षक

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, ज्योतिष पीठ के पीठाधीश्वर के रूप में सनातन संस्कृति की रक्षा और वेद-शास्त्रों के प्रचार-प्रसार में निरंतर सक्रिय हैं।

उनके मार्गदर्शन में —

  • संत परंपरा को प्रोत्साहन
  • धर्म और श्रद्धा के कार्यक्रमों का विस्तार
  • पर्यावरण संरक्षण व सामाजिक जागरूकता के संदेश

उनकी उपस्थिति से श्रद्धालुओं में अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा व उत्साह का संचार होता है।

धार्मिक पर्यटन और राज्य सरकार की पहल

उत्तराखंड सरकार और जिला प्रशासन शीतकालीन यात्रा को सफल और सुरक्षित बनाने के लिए विशेष व्यवस्था करता है।

जैसे—

  • यात्री सुविधाओं का विस्तार
  • स्वास्थ्य और सुरक्षा व्यवस्था
  • परिवहन और सुगम मार्ग सुनिश्चित करना
  • मंदिरों में भीड़ नियंत्रण और विशेष दर्शन प्रबंधन

प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि हर धार्मिक यात्री को आध्यात्मिक अनुभव के साथ-साथ सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा प्रदान हो।

भक्तों में उमड़ा उत्साह

खुशीमठ से यात्रा प्रारंभ होते ही आसपास के गांवों और शहरों से दर्शन के लिए आए लोगों की भीड़ बढ़ गई। लोग माता यमुना के दर्शन कर अपने वर्ष की मंगल कामना के लिए पूजा-अर्चना कर रहे हैं।

श्रद्धालुओं ने कहा कि—

“शंकराचार्य जी के दर्शन मात्र से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।”

चारधाम शीतकालीन तीर्थ यात्रा का यह शुभारंभ न केवल धार्मिक उत्सव बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। उत्तरकाशी का यह क्षेत्र एक बार फिर भक्ति, सेवा और अध्यात्म का केंद्र बन गया है। आने वाले दिनों में हजारों यात्रियों के यहां पहुंचने की उम्मीद है।

मां यमुना और भगवान बद्रीनाथ, केदारनाथ व गंगोत्री के शीतकालीन धामों में भी इसी तरह पूजा-अर्चना और दर्शन का क्रम चलता रहेगा और यह आध्यात्मिक यात्रा देशभर के भक्तों को अपने पवित्र आंचल में समेटती रहेगी।

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By ATHAR

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