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अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में मंगलवार का दिन इतिहास का अविस्मरणीय अध्याय बन गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 161 फीट ऊंचाई पर भव्य धर्म ध्वजा फहराया। अभिजीत मुहूर्त में हुए इस वैदिक ध्वजारोहण के दौरान पूरा परिसर शंखनाद, घंटियों और वैदिक मंत्रों से गूंज उठा।
रामायण कालीन परंपरा का पुनर्जीवन
अयोध्या सदियों से भारतीय आध्यात्मिकता, रामायण कालीन संस्कृति और सनातन परंपराओं का केंद्र रही है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर बनने के बाद यहां निरंतर वैदिक परंपराओं का पुनर्जीवन हो रहा है। रामायण में वर्णित ध्वजारोहण केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि धर्म, शक्ति, विजय और सदाचार का प्रतीक माना जाता है। इसी परंपरा को आधुनिक भारत ने आज पुनः सजीव होते देखा, जब धर्म ध्वजा मंदिर के मुख्य शिखर पर लहराया।
अभिजीत मुहूर्त में प्रारंभ हुआ ध्वजारोहण
25 नवंबर को अयोध्या में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत अभिजीत मुहूर्त में हुई। जैसे ही ध्वज आरोहण प्रक्रिया शुरू हुई, पूरे परिसर में—
- शंखनाद,
- वैदिक मंत्रोच्चार,
- घंटियों की ध्वनियाँ
- गूंज उठीं। वातावरण पूर्णत: आध्यात्मिक और ऊर्जा से परिपूर्ण हो गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए बटन दबाया और धर्म ध्वज धीरे-धीरे मुख्य शिखर पर चढ़ने लगा। यह क्षण श्रद्धा, गौरव और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन गया।
इस दृश्य के साक्षी रहे—
- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत,
- उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल,
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ,
- श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारी।
- ध्वज शीर्ष पर पहुंचते ही प्रधानमंत्री मोदी ने भगवान श्रीराम के प्रति श्रद्धा प्रकट की।
रघुवंशी परंपरा पर आधारित ध्वज
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देवगिरी महाराज ने ध्वजा की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विशेषताओं को विस्तार से बताया। उनके अनुसार, यह ध्वजा पूरी तरह रघुवंशी परंपरा के अनुरूप तैयार की गई है।
इसमें तीन प्रमुख प्रतीक शामिल हैं—
- सूर्य: सत्य, प्रकाश और धर्म का प्रतिनिधि
- ओम्: अनादि-अनंत ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीक
- कोविदार वृक्ष: विजय और समृद्धि का द्योतक
ध्वजा के विवरण—
- लंबाई: 22 फीट
- चौड़ाई: 11 फीट
- ध्वजदंड की ऊंचाई: 42 फीट (10 फीट अंदर, 32 फीट बाहर)
- 360 डिग्री घूमने वाला विशेष चैंबर
- 60 किमी/घंटा हवा की गति सहन करने की क्षमता
मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के अनुसार, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पूरी तरह नागर शैली पर आधारित एक भव्य संरचना है।
वे बताते हैं कि—
- मंदिर की लंबाई: 380 फीट
- चौड़ाई: 250 फीट
- कुल मंजिलें: 3, प्रत्येक 20 फीट ऊंची
- 392 स्तंभ और 44 भव्य प्रवेश द्वार
- वास्तु में रामायणकालीन गाथाओं की अनुगूंज
- यह मंदिर आज भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और स्थापत्य कला का अनोखा संगम बन चुका है।
अयोध्या में उमड़ा श्रद्धालुओं का समुद्र
ध्वजारोहण के दौरान लाखों श्रद्धालुओं ने “जय श्री राम” के उद्घोष के साथ माहौल को भक्तिमय बना दिया।
- बाजारों में भीड़ बढ़ी
- स्थानीय व्यापार को मजबूती मिली
- होटलों में आवागमन बढ़ा
- यातायात व्यवस्था चुनौतीपूर्ण, फिर भी नियंत्रित रही
- यह वही वातावरण था, जो 22 जनवरी 2024 की प्राण-प्रतिष्ठा के दौरान देखने को मिला था।
हाल के वर्षों में अयोध्या में कई ऐतिहासिक आध्यात्मिक कार्यक्रम हुए हैं
- प्राण-प्रतिष्ठा समारोह (2024)
- दीपोत्सव में विश्व रिकॉर्ड स्थापित होना
- लगातार बढ़ता श्रद्धालुओं का आगमन
- धर्म ध्वजा का फहराया जाना इन सभी घटनाओं की कड़ी में एक और स्वर्णिम शुरुआत साबित हो रहा है।
सनातन परंपरा और आधुनिक भारत का अद्भुत मेल
अयोध्या में धर्म ध्वजा फहराए जाने का क्षण केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भारत की सनातन विरासत, वैदिक परंपरा और आधुनिक तकनीक के अद्भुत संगम का प्रतीक है। यह कार्यक्रम दुनिया को यह संदेश देता है कि भारतीय संस्कृति आज भी उतनी ही जीवंत, शक्तिशाली और प्रेरणादायक है जितनी रामायण काल में थी।
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