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रिपोर्टर (फ़रमान खान)
अंतरराष्ट्रीय मंच पर गूंजा ‘शून्य सहिष्णुता’ का संदेश
विश्व स्तर पर मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय महिला जननांग विकृति शून्य सहिष्णुता दिवस के अवसर पर हर्ष विद्या मंदिर स्नातकोत्तर महाविद्यालय रायसी, लक्सर में एक प्रेरणादायक और विचारोत्तेजक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन महिला शिकायत निवारण समिति के बैनर तले संपन्न हुआ, जिसका उद्देश्य समाज में व्याप्त एक गंभीर और अमानवीय कुप्रथा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इसके खिलाफ नो टॉलरेंस का स्पष्ट संदेश देना था। कार्यक्रम का माहौल अत्यंत गरिमामय और संवेदनशील रहा। वक्ताओं ने न केवल तथ्यात्मक जानकारी दी, बल्कि नैतिक, सामाजिक और संवैधानिक दृष्टिकोण से भी इस विषय पर गंभीर चर्चा की। आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा केवल कानून की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक कर्तव्य है।
महिला जननांग विकृति: क्यों है यह कुप्रथा एक अभिशाप
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने एकमत से कहा कि महिला जननांग विकृति (FGM) महिलाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा और दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव डालती है। यह प्रथा न केवल असंवैधानिक है, बल्कि मानवता के मूल सिद्धांतों के भी विरुद्ध है। महिला शिकायत निवारण समिति की प्रभारी डॉ. सुरजीत कौर ने अपने विचार रखते हुए कहा कि यह कुप्रथा महिलाओं को सम्मान और सुरक्षा के अधिकार से वंचित करती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा,
“महिला जननांग विकृति स्वास्थ्य के लिए अत्यंत घातक है। इससे महिलाओं को शारीरिक पीड़ा, मानसिक आघात और सामाजिक असुरक्षा का सामना करना पड़ता है। इसके खिलाफ जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। शून्य सहिष्णुता अपनाकर ही हम वास्तविक बदलाव ला सकते हैं।”
उनके इस वक्तव्य ने उपस्थित छात्राओं और शिक्षकों को गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया।
समिति की सह-प्रभारी डॉ. सारिका महेश्वरी, सदस्य कु. वैशाली और श्रीमती तानिया गुप्ता ने भी इस विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि समाज में लंबे समय से चली आ रही रूढ़िवादी सोच को बदलने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि जब तक समाज संवेदनशील नहीं बनेगा, तब तक महिलाओं की वास्तविक सुरक्षा और सशक्तिकरण संभव नहीं है। उन्होंने छात्राओं से अपील की कि वे स्वयं जागरूक बनें और अपने परिवार व समाज में भी इस जागरूकता को फैलाएं।
प्रबंधन समिति के प्रेरक संदेश
कार्यक्रम में प्रबंधन समिति के पदाधिकारियों ने भी अपने विचार रखे और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा को समय की आवश्यकता बताया।

डॉ. के. पी. सिंह (अध्यक्ष, प्रबंधन समिति)
डॉ. सिंह ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा या कुप्रथाएं किसी भी सभ्य समाज के लिए कलंक हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि
केवल कानून से नहीं, बल्कि शिक्षा और सामाजिक जागरूकता से ही ऐसी कुप्रथाओं का उन्मूलन संभव है। हर वर्ग को आगे आकर महिलाओं के सम्मान की रक्षा करनी होगी।”
डॉ. प्रभावती (उपाध्यक्ष)
उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों के लिए निरंतर अभियान चलाना आवश्यक है। सकारात्मक सोच और संवेदनशील दृष्टिकोण के बिना समाज का विकास अधूरा है।
डॉ. हर्ष कुमार दौलत (सचिव व ब्लॉक प्रमुख)
डॉ. दौलत ने कहा कि महिला सशक्तिकरण तभी साकार होगा जब उन्हें समान अवसर और सुरक्षित वातावरण मिलेगा। उन्होंने इस तरह के कार्यक्रमों को आने वाली पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक बताया।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आदित्य गौतम ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षण संस्थान केवल शैक्षणिक ज्ञान देने तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे जिम्मेदार नागरिक तैयार करते हैं।
उन्होंने कहा,
समानता, न्याय और मानवाधिकारों के लिए विद्यार्थियों को आगे आना चाहिए। यह हमारी सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी है।”
उनके अनुसार, इस तरह के आयोजन छात्रों में सामाजिक चेतना विकसित करते हैं और उन्हें समाज के प्रति उत्तरदायी बनाते हैं।
छात्राओं का संकल्प: बदलाव की शुरुआत
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं भारती, हिमांशी, अदीबा, कशिश और अनु ने महिला जननांग विकृति जैसी बुराइयों के खिलाफ स्वयं जागरूक रहने और समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में डॉ. के. पी. तोमर, डॉ. निशा पाल, डॉ. पूनम चौधरी, डॉ. विनीता, डॉ. मंजू रानी, डॉ. स्मृति कुकशाल, डॉ. नेहा सिंह, डॉ. प्रियंका सैनी सहित बड़ी संख्या में प्राध्यापक, कर्मचारी और छात्राएं उपस्थित रहीं। अंत में सभी उपस्थित लोगों ने महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए सामूहिक संकल्प दोहराया। यह संदेश स्पष्ट था कि बदलाव की शुरुआत शिक्षा संस्थानों से होकर पूरे समाज तक जाएगी।
यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि शिक्षा का मंदिर केवल ज्ञान का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का मजबूत आधार भी है। महिला जननांग विकृति जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ शून्य सहिष्णुता अपनाना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। कार्यक्रम ने यह सवाल भी छोड़ा—क्या हम सभी इस संकल्प का हिस्सा बनने को तैयार हैं?
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