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उत्तराखंड के चर्चित अंकिता हत्याकांड को लेकर एक बार फिर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। अल्मोड़ा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शनिवार को कैंडल मार्च निकालकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। इस दौरान कथित वीआईपी का नाम सार्वजनिक करने और पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की गई।
अंकिता हत्याकांड उत्तराखंड के सबसे संवेदनशील और चर्चित मामलों में से एक रहा है। घटना के बाद से ही राज्य की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर लगातार आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। शुरुआती जांच में कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, लेकिन समय बीतने के साथ पीड़िता के परिजनों और विपक्षी दलों द्वारा जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जाते रहे हैं।
हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कथित ऑडियो और वीडियो सामने आने के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। कांग्रेस का आरोप है कि इन डिजिटल साक्ष्यों में कुछ प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता की ओर इशारा किया गया है, लेकिन सरकार इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठा रही है।
अल्मोड़ा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अंकिता हत्याकांड के विरोध में कैंडल मार्च निकालकर प्रदर्शन किया। चौघानपाटा, अल्मोड़ा (उत्तराखंड) शनिवार, 26 दिसंबर 2025 देर शाम कांग्रेस कार्यकर्ता चौघानपाटा में एकत्र हुए और हाथों में मोमबत्तियां लेकर शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकाला। इस दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई और मामले में कथित वीआईपी की भूमिका को उजागर करने की मांग की गई।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह भोज ने कहा कि सरकार ने केवल दो-चार आरोपियों को जेल भेजकर वाहवाही लूटने का काम किया है, जबकि अपनी ही पार्टी से जुड़े बड़े नेताओं को बचाया जा रहा है। विधायक मनोज तिवारी ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि इस मामले में भाजपा से जुड़े किसी वीआईपी की भूमिका नहीं है, तो सरकार सीबीआई जांच से पीछे क्यों हट रही है।
स्थानीय प्रभाव
कैंडल मार्च में स्थानीय नागरिकों और कांग्रेस समर्थकों की बड़ी संख्या में मौजूदगी रही। इससे स्पष्ट है कि मामला अभी भी आम जनता की भावनाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। कैंडल मार्च के दौरान चौघानपाटा क्षेत्र में कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित रहा, हालांकि पुलिस प्रशासन की मौजूदगी से स्थिति नियंत्रित रही। इस तरह के आंदोलनों से युवाओं और छात्रों में भी राजनीतिक और सामाजिक जागरूकता बढ़ती है। वहीं, लंबे समय तक न्याय न मिलने की भावना समाज में असंतोष को जन्म दे सकती है।
उत्तराखंड में इससे पहले भी कई हाई-प्रोफाइल मामलों में सीबीआई जांच की मांग उठ चुकी है। विपक्ष का दावा है कि जिन मामलों में स्वतंत्र एजेंसी से जांच हुई, वहां सच्चाई सामने आने की संभावना अधिक रही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आ रहे नए साक्ष्य मामलों को दोबारा चर्चा में लाने का बड़ा कारण बन रहे हैं।
अल्मोड़ा में निकाला गया यह कैंडल मार्च इस बात का संकेत है कि अंकिता हत्याकांड अभी भी लोगों की चेतना में जीवित है। कांग्रेस ने सरकार से पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई है। अब देखना होगा कि सरकार इस दबाव के बीच जांच प्रक्रिया को किस दिशा में आगे बढ़ाती है।
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