“संसद परिसर में इलेक्शन कमीशन पर बयान देते समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव”“संसद परिसर में इलेक्शन कमीशन पर बयान देते समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव”

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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इलेक्शन कमीशन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एसआईआर (स्पेशल समरी रिवीजन) प्रक्रिया में अनावश्यक जल्दबाज़ी कर विपक्षी वोट कटवाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मतदाता सूची में त्रुटियाँ बढ़ीं तो यूपी समेत कई राज्यों में लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व प्रभावित होगा।

भारतीय लोकतंत्र में वोटर लिस्ट यानी मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण तत्व मानी जाती है। आम चुनावों के पहले इलेक्शन कमीशन देशभर में स्पेशल समरी रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया चलाता है ताकि नए वोटर जोड़े जा सकें और गलत या डुप्लीकेट नाम हटाए जा सकें।
उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों में यह प्रक्रिया आमतौर पर विस्तारित समय के साथ की जाती है, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के मतदाता सही समय पर अपना पंजीकरण करा सकें।

लेकिन इस बार विपक्ष ने शिकायत की है कि यह प्रक्रिया तय समय से पहले पूरी कराई जा रही है, जिसकी वजह से लाखों मतदाताओं के नाम काटे जाने की आशंका बढ़ गई है। अखिलेश यादव का दावा है कि भाजपा अपनी चुनावी रणनीति के तहत मतदाता सूची में गड़बड़ी कर विपक्ष के वोट प्रभावित करना चाहती है।

संसद परिसर में मीडिया से बातचीत

1 दिसंबर को नई दिल्ली और लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि इलेक्शन कमीशन “लोकतंत्र को मजबूत करने” की बजाय “भाजपा की योजना पूरी करने” में लगा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सबसे ज्यादा जल्दबाज़ी यूपी में की जा रही है, जबकि यहाँ चुनाव अभी काफी समय बाद होने हैं।

बीएलओ पर बढ़ा दबाव और मौतों का मुद्दा

एसआईआर प्रक्रिया को लेकर अखिलेश यादव ने कहा कि कई बीएलओ भारी दबाव में काम कर रहे हैं और हाल में हुई कुछ मौतें “साधारण नहीं” लगतीं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा:

क्या सर्वेश गंगवार, विजय वर्मा, विपिन यादव और अंजू दुबे की मौतें कोई ड्रामा हैं?”

उन्होंने यह भी कहा कि कई बीएलओ फॉर्म भरने और अपलोड करने में असमर्थ हैं, जिसके कारण वे अपने रिश्तेदारों और परिचितों से फॉर्म भरवा रहे हैं। एक मामले का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि “एक मां का फॉर्म भरवाने के लिए उसका बेटा बेंगलुरु से आया।”

शादियों के मौसम में एसआईआर शुरू होने पर सवाल

अखिलेश के अनुसार, भाजपा ने इस प्रक्रिया को ऐसे समय शुरू कराया जब पूरे प्रदेश में शादियों का मौसम चल रहा है।
उनका आरोप है कि “इलेक्शन कमीशन चाहता है कि एसआईआर में सावधानी से वोट कट जाए।” उन्होंने कहा कि भाजपा जानबूझकर ऐसा समय चुन रही है जब लोग फॉर्म नहीं भर पाएंगे और नए वोटर जुड़ नहीं पाएंगे।

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा ने बड़ी आईटी कंपनियों की मदद ली है, खासकर नोएडा की एक कंपनी की, जिसे भारी-भरकम भुगतान कर यह जिम्मेदारी दी गई है कि जिन सीटों पर भाजपा हारी है वहां वोट न बढ़ने दिए जाएँ। उन्होंने दावा किया कि घोसी विधानसभा क्षेत्र में 20 हजार वोट पहले ही काट दिए गए हैं, जबकि एसआईआर प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू भी नहीं हुई है।

समाजवादी पार्टी के नेताओं के अनुसार, इलेक्शन कमीशन को इन गंभीर शिकायतों पर तत्काल संज्ञान लेना चाहिए।
अखिलेश यादव ने कहा:

लोकतंत्र मजबूत होना चाहिए और पीडीए समाज को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। दबाव में वोट कटना लोकतंत्र पर हमला है।”

उन्होंने मांग की कि एसआईआर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए, बीएलओ पर अनावश्यक दबाव खत्म किया जाए और उन क्षेत्रों की विशेष जांच की जाए जहां असामान्य रूप से वोट काटे गए हैं। हालांकि यह मुद्दा मुख्य रूप से राजनीतिक है, लेकिन व्यापक स्तर पर इसका असर मतदाताओं पर पड़ने वाला है।

लाखों नए वोटर प्रभावित होने की आशंका

  • शादी-ब्याह के मौसम और प्रवासी मजदूरों के वापस न आ पाने के कारण कई लोग अपने फॉर्म नहीं भर पाएंगे।
  • यदि मतदाता सूची अधूरी या त्रुटिपूर्ण रही तो युवा, प्रवासी और गरीब वर्ग सबसे अधिक प्रभावित होंगे।

अखिलेश ने कहा कि यदि पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) वर्ग के वोट प्रभावित हुए तो कई सीटों पर चुनावी संतुलन पूरी तरह बदल सकता है। बीएलओ के सीमित संसाधनों और आवश्यक तकनीकी सहायता न मिलने के कारण कई ग्रामीण क्षेत्रों में फॉर्म जमा ही नहीं हो पा रहे। वहीं शहरों में कई अपार्टमेंट और कॉलोनियों में बीएलओ के पहुंचने पर भी संदेह जताया गया है

भारत में पहले भी मतदाता सूची को लेकर विवाद उठते रहे हैं।

  • 2019 के चुनावों से पहले तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने पर विवाद हुआ था।
  • कर्नाटक में भी मतदाताओं के नाम गलत तरीके से डिलीट होने की शिकायतें सामने आई थीं।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एसआईआर गलत तरीके से किया गया तो 2024 और 2027 दोनों चुनावों में इसका बड़ा असर दिख सकता है।

अखिलेश यादव का यह बयान आने वाले महीनों में राजनीतिक माहौल को और गर्म कर सकता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उत्तर प्रदेश और देश के अनेक हिस्सों में मतदाता अब अधिक जागरूक हैं और यदि उनके वोट कटाए गए तो वे इसका जवाब चुनाव में देंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि “जो सोचते हैं कि एसआईआर के बहाने वोट कटवा लेंगे, वे याद रखें कि 2024 की तरह 2027 में भी मतदाता हिसाब करेगा।”

यह मुद्दा कितना गंभीर है, इसका जवाब इलेक्शन कमीशन की आने वाली कार्रवाई से मिलेगा। लेकिन यह स्पष्ट है कि विपक्ष ने इसे लोकतंत्र और मताधिकार की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा राजनीतिक प्रश्न बना दिया है।

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By ATHAR

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