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उत्तराखंड के हरिद्वार जनपद में आज एक अत्यंत सराहनीय और सामाजिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण पहल की गई। एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोबाल के दिशा-निर्देशन में महिला हेल्पलाइन, मायापुर की ओर से एक बैठक का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य था – टूटते परिवारों को फिर से जोड़ना और महिलाओं को न्याय दिलाना।
इस बैठक का आयोजन रिजर्व पुलिस लाइन, रोशनाबाद में किया गया, जिसमें महिला एच्छिक ब्यूरो की भूमिका केंद्र में रही। इस पहल के माध्यम से समाज में बढ़ते पारिवारिक विवादों को सुलझाने और महिला सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए।
बिखरते परिवारों को जोड़ा, विवाद सुलझाए गए
बैठक में कुल 6 पारिवारिक मामलों पर चर्चा की गई। महिला हेल्पलाइन में पहले से दर्ज इन विवादों को लेकर दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाया गया और समझाइश दी गई। इसमें से 4 परिवार आपसी सहमति से एक बार फिर साथ रहने को तैयार हो गए, जो इस बैठक की सबसे बड़ी सफलता रही।

वहीं 2 मामलों में पति-पत्नी को सोचने का समय दिया गया और परिवार की महत्ता को समझाते हुए उन्हें अपने रिश्ते पर पुनर्विचार का अवसर दिया गया।
संगठित टीम के प्रयासों से मिली सफलता
इस बैठक में नोडल अधिकारी अविनाश वर्मा (पुलिस उपाधीक्षक/ क्षेत्राधिकारी ज्वालापुर) ने नेतृत्व किया। उनके साथ मनोवैज्ञानिक अरुण कुमार, समाजशास्त्री विनोद शर्मा, अधिवक्ता रीमा साहीम, शिक्षिका रंजना शर्मा, महिला हेल्पलाइन प्रभारी उप निरीक्षक अनिता शर्मा, कांस्टेबल पंकज रावत और महिला कांस्टेबल आंचल मनवाल की सक्रिय सहभागिता रही।

इस टीम ने संवेदनशीलता और समझदारी के साथ दोनों पक्षों को सुना और उनका मार्गदर्शन किया। परिवारों के बीच मध्यस्थता करते हुए विश्वास का वातावरण तैयार किया गया, जिससे सकारात्मक परिणाम सामने आए।
महिला सुरक्षा की दिशा में महिला हेल्पलाइन की अहम भूमिका
महिला हेल्पलाइन मायापुर हरिद्वार लगातार जटिल पारिवारिक विवादों को सुलझाने, घरेलू हिंसा, उत्पीड़न और सामाजिक असमानता से जूझ रही महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए कार्य कर रही है। इस बैठक ने यह सिद्ध किया कि संवाद और सहयोग से कोई भी कठिन स्थिति सुलझाई जा सकती है।

महिला हेल्पलाइन न केवल शिकायतों पर कार्य कर रही है, बल्कि परिवार को एकजुट रखने की सामाजिक जिम्मेदारी भी निभा रही है।
मनोवैज्ञानिक और सामाजिक दृष्टिकोण से की गई काउंसलिंग
बैठक में उपस्थित मनोवैज्ञानिक और समाजशास्त्री ने न केवल कानूनी सलाह दी बल्कि भावनात्मक और मानसिक समर्थन भी प्रदान किया। विशेष रूप से बच्चों के भविष्य और महिला सम्मान को केंद्र में रखते हुए मामलों को संवेदनशीलता से निपटाया गया।
अधिवक्ता रीमा साहीम ने कानूनी जानकारी साझा की और शिक्षिका रंजना शर्मा ने महिलाओं को शिक्षा और आत्मनिर्भरता की ओर प्रेरित किया।
प्रशासन का संदेश: संवाद से ही समाधान संभव
एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोबाल द्वारा दिए गए स्पष्ट संदेश को इस बैठक में प्रमुखता से दोहराया गया – “हर महिला को सम्मान और सुरक्षा मिलना उसका अधिकार है। परिवार एक इकाई है जिसे संवाद, सहानुभूति और समझ से बचाया जा सकता है।”महिला हेल्पलाइन के प्रयासों से यह स्पष्ट हुआ कि कानून के साथ-साथ भावनात्मक और सामाजिक समर्थन भी जरूरी है।
महिलाओं के अधिकारों, सुरक्षा और परिवारिक स्थिरता के लिए ‘ज्वालापुर टाइम्स’ पर पढ़ते रहें ऐसी ही सकारात्मक खबरें। यदि आपके आसपास कोई पारिवारिक विवाद हो, तो तुरंत महिला हेल्पलाइन से संपर्क करें और मदद पाएं।
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