रिपोर्टर (सचिन शर्मा)
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हरिद्वार 2026। त्योहारी सीजन और चारधाम यात्रा को देखते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने हरिद्वार में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता की जांच के लिए सघन अभियान चलाया। अभियान के दौरान विभिन्न बाजारों, होटलों, ढाबों, रेस्टोरेंटों और दुकानों का निरीक्षण किया गया। विभाग के अनुसार, छह विधिक नमूने संग्रहित कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए, जबकि सचल खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला के माध्यम से मौके पर 83 खाद्य पदार्थों की जांच की गई। इनमें से 18 नमूने अधोमानक पाए जाने पर संबंधित खाद्य सामग्री नष्ट कराई गई।
खाद्य सुरक्षा आयुक्त विनय शंकर पांडे और जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देशों के अनुपालन में चलाए गए अभियान का नेतृत्व सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, हरिद्वार महिमानंद जोशी ने किया। विभाग की टीमों ने अलग-अलग क्षेत्रों में खाद्य कारोबारियों के यहां पहुंचकर खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, भंडारण और साफ-सफाई की स्थिति का जायजा लिया।
ज्वालापुर समेत कई क्षेत्रों में खाद्य पदार्थों के नमूने लिए
वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी कैलाश चंद्र टम्टा ने ज्वालापुर के कटहरा बाजार, अनाज मंडी, जटवाड़ा पुल, कृष्णानगर कनखल, शिव मूर्ति चौक और मायापुर सहित विभिन्न क्षेत्रों में निरीक्षण किया। इस दौरान छह विधिक नमूने संग्रहित किए गए।
विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इनमें कुडू आटा के तीन नमूने, बादाम का एक, किशमिश का एक और गाय के दूध का एक नमूना शामिल है। इन सभी नमूनों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। प्रयोगशाला की जांच से संबंधित खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट होगी। विधिक नमूनों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
निरीक्षण अभियान के दौरान निरंजनी अखाड़ा रोड, मायापुर स्थित होटल गंगा किनारे के किचन और रेस्टोरेंट का भी औचक निरीक्षण किया गया। विभाग के अनुसार, निरीक्षण के समय प्रतिष्ठान बिना खाद्य लाइसेंस के संचालित पाया गया। विभाग ने किचन में खाद्य पदार्थों के भंडारण, रखरखाव और निर्माण की परिस्थितियों को अस्वच्छ बताया। इसके अलावा होटल प्रबंधन आवश्यक दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं कर सका। इनमें पेयजल और खाद्य पदार्थों की जांच रिपोर्ट, पेस्ट कंट्रोल से संबंधित अभिलेख, कर्मचारियों के चिकित्सकीय परीक्षण एवं प्रशिक्षण के दस्तावेज तथा साफ-सफाई और स्वच्छता से जुड़े रिकॉर्ड शामिल थे।

इन कमियों के आधार पर खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के संबंधित प्रावधानों के तहत चालानी कार्रवाई की। विभाग की ओर से जारी जानकारी में धारा 31/63 और 27/58 का उल्लेख किया गया है। संबंधित प्रावधानों के तहत अधिकतम 10 लाख रुपये तक के अर्थदंड का प्रावधान बताया गया है। हालांकि, वास्तविक दंड का निर्धारण मामले के तथ्यों और लागू कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होगा।
सचल खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला ने 83 खाद्य पदार्थों की जांच की
अभियान के दौरान सचल खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला के माध्यम से भी विभिन्न प्रतिष्ठानों में खाद्य पदार्थों की मौके पर जांच की गई। उपायुक्त एवं सचल खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला के नोडल अधिकारी वीरेंद्र सिंह बिष्ट के नेतृत्व में शिव मूर्ति चौक, जस्सा राम रोड और गुजराती गली सहित कई क्षेत्रों में जांच की गई।
टीम ने रेस्टोरेंटों, ढाबों, मिठाई की दुकानों और परचून की दुकानों से खाद्य पदार्थों की जांच की। विभाग के अनुसार, कुल 83 खाद्य पदार्थों की मौके पर जांच की गई। इनमें दूध और दुग्ध उत्पाद, तेल-घी, अनाज एवं उनसे बने उत्पाद, मिठाइयां और मसाले शामिल थे। सचल प्रयोगशाला के माध्यम से मौके पर जांच करने का उद्देश्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से जुड़ी प्रारंभिक जानकारी प्राप्त करना और मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाने वाले उत्पादों के संबंध में आवश्यक कदम उठाना था।
दूध, मिठाई और मसालों के 18 नमूने अधोमानक मिले
खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार, मौके पर जांचे गए 83 खाद्य पदार्थों में से 18 नमूने अधोमानक पाए गए। इनमें दूध एवं दुग्ध उत्पादों के दो, मिठाइयों के चार और मसालों के 12 नमूने शामिल थे। विभाग ने बताया कि अधोमानक पाई गई खाद्य सामग्री को संबंधित प्रतिष्ठानों से तत्काल नष्ट कराया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, खाद्य पदार्थों की मात्रा कम होने के कारण इन उत्पादों के विधिक नमूने संग्रहित नहीं किए जा सके।
यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि सचल प्रयोगशाला में मौके पर की गई जांच और विधिक नमूनों की प्रयोगशाला जांच की प्रक्रिया अलग हो सकती है। विभाग की ओर से जारी विवरण में 83 खाद्य पदार्थों की मौके पर जांच का उल्लेख है, जबकि छह विधिक नमूने अलग से संग्रहित कर प्रयोगशाला भेजे गए।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने खाद्य मानकों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में न्यायालयी कार्रवाई भी की है। विभाग के अनुसार, अधोमानक पनीर के विक्रय और अन्य खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन को लेकर एक होटल संचालक तथा एक पनीर सप्लायर या थोक विक्रेता के विरुद्ध न्यायालय न्याय निर्णायक अधिकारी एवं अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के न्यायालय में वाद दायर किए गए।
इसके अलावा, भीमगौड़ा स्थित एक अन्य रेस्टोरेंट संचालक के विरुद्ध भी मानकों के उल्लंघन के मामले में वाद दायर किया गया। वहीं, वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी रुड़की योगेंद्र पांडेय की ओर से बिना लाइसेंस खाद्य कारोबार संचालित करने के मामले में एक कारोबारी के विरुद्ध वाद दायर किया गया। इस प्रकार विभाग की ओर से कुल चार वाद न्यायालय में प्रस्तुत किए गए हैं। इन मामलों में आगे की प्रक्रिया संबंधित न्यायालय और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार होगी। वाद दायर होना अपने आप में अंतिम दोष सिद्धि नहीं है
त्योहारी सीजन में मिठाइयों, दूध, मसालों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। इसी तरह चारधाम यात्रा के दौरान यात्रियों और श्रद्धालुओं की आवाजाही के कारण होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट बड़ी संख्या में लोगों को भोजन उपलब्ध कराते हैं। ऐसे में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, सुरक्षित भंडारण और रसोई की स्वच्छता पर ध्यान देना महत्वपूर्ण होता है।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने कारोबारियों को निर्धारित मानकों का पालन करने और उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। निरीक्षण के दौरान लाइसेंस, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और साफ-सफाई से जुड़े दस्तावेजों की जांच भी की गई। विभाग के अनुसार, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए अभियान आगे भी जारी रहेगा। उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा और खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर विभाग की ओर से निरीक्षण एवं जांच की कार्रवाई की जाती रहेगी।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने होटल संचालकों, ढाबा संचालकों, रेस्टोरेंट मालिकों, मिठाई विक्रेताओं और अन्य खाद्य कारोबारियों से नियमों का पालन करने की अपील की है। कारोबारियों को आवश्यक लाइसेंस रखने, खाद्य पदार्थों का सुरक्षित भंडारण करने, साफ-सफाई बनाए रखने और कर्मचारियों से संबंधित जरूरी रिकॉर्ड उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं।
हरिद्वार में चलाए गए इस अभियान के दौरान छह विधिक नमूने जांच के लिए भेजे गए, 83 खाद्य पदार्थों की मौके पर जांच की गई और 18 अधोमानक पाए गए नमूनों से संबंधित खाद्य सामग्री नष्ट कराई गई। इसके अलावा, चार मामलों में न्यायालय में वाद दायर किए गए। विभाग ने स्पष्ट किया है कि त्योहारी सीजन और चारधाम यात्रा को ध्यान में रखते हुए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और शुद्धता की जांच आगे भी जारी रहेगी।
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