सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद पर प्रशासन की कार्रवाई के दौरान पुलिस बल की तैनातीसहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद पर प्रशासन की कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल तैनात रहा।

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रिपोर्टर (सचिन शर्मा)

सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित पुरानी मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब प्रशासनिक कार्रवाई के बाद एक बार फिर चर्चा में है। शनिवार को प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद के ढांचे को हटाने की कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के लिहाज से बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। इस मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने आरोप लगाया कि उन्हें हाउस अरेस्ट किया गया है। वहीं प्रशासन की ओर से मस्जिद के संबंध में कार्रवाई को न्यायालय के आदेश और सरकारी भूमि से जुड़े मामले के संदर्भ में बताया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इससे पहले जिला अदालत ने मस्जिद पक्ष की याचिका खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा था।

सांसद सहारनपुर जाने की तैयारी कर रही थीं, इसी दौरान रात में भारी संख्या में पुलिस बल उनके कैराना स्थित आवास पर पहुंच गया और उन्हें बाहर जाने से रोक दिया। कुछ अन्य नेताओं को भी हाउस अरेस्ट किए जाने की बात आ रही है। इकरा हसन ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने उनके आवास पर रात में भारी पुलिस बल तैनात कर उन्हें बाहर निकलने से रोक दिया है। उन्होंने इसे हाउस अरेस्ट बताते हुए सवाल उठाया है कि क्या है जनता की आवाज उठाना, उनके मुद्दे पर अधिकारियों से मिलना अब अपराध हो गया है। इकरा हसन ने कहा कि इस तरह जनप्रतिनिधियों को रोककर उनकी आवाज नहीं दबाई जा सकती है।

मस्जिद पक्ष की ओर से इस आदेश के खिलाफ अपील की गई थी। 4 सितंबर को जिला अदालत ने इस अपील को खारिज कर दिया। इसके बाद अगले दिन प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित ढांचे को हटाने की कार्रवाई की। ताजा रिपोर्टों में बताया गया है कि कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी। इस मामले की मूल वजह कलेक्ट्रेट परिसर की भूमि को लेकर सामने आया विवाद है। सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने जुलाई में उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों के आधार पर जमीन को सरकारी भूमि माना था। अदालत के आदेश में निर्माण को अनधिकृत बताते हुए बेदखली की कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।

मस्जिद पक्ष की ओर से सुनवाई के दौरान यह दावा किया गया था कि वहां लंबे समय से मस्जिद मौजूद थी और इसका इतिहास पुराना है। हालांकि, अदालत के समक्ष इस दावे के समर्थन में पर्याप्त दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके, ऐसा जुलाई में सामने आई अदालती कार्यवाही की रिपोर्टों में बताया गया था। यही वजह है कि मामले का केंद्र धार्मिक पहचान से अधिक भूमि के स्वामित्व और निर्माण की वैधता से जुड़ा कानूनी विवाद रहा है।

जिला अदालत से भी नहीं मिली राहत

मस्जिद पक्ष को 4 सितंबर को जिला अदालत से भी राहत नहीं मिली। रिपोर्टों के अनुसार जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के पूर्व आदेश को बरकरार रखा और मस्जिद पक्ष की याचिका को खारिज कर दिया। इस फैसले के बाद प्रशासन के सामने पूर्व आदेश के अनुपालन का रास्ता साफ हुआ। मस्जिद पक्ष की ओर से आगे उच्च न्यायालय का रुख किए जाने की संभावना भी रिपोर्टों में सामने आई है। ऐसे में इस पूरे मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण रहेगी।

इकरा हसन ने कहा कि वह मस्जिद प्रकरण के संबंध में अधिकारियों से मुलाकात कर क्षेत्र की जनता की आवाज उनके सामने रखना चाहती थीं, लेकिन उन्हें घर से बाहर निकलने तक नहीं दिया गया। बता दें कि सहारनपुर जिला जज की अदालत ने चार सितंबर को सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देने वाली मुस्लिम पक्ष की अपील खारिज कर दी थी। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और पेश किए गए सबूतों की जांच के बाद मस्जिद अवैध घोषित करने वाले सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को जिला जज की कोर्ट ने बरकरार रखा। इसके पहले 17 जुलाई को सिटी मजिस्ट्रेट की कोर्ट ने मस्जिद को गिराने का आदेश दिया था।

मस्जिद हटाने की कार्रवाई को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई। संवेदनशील मामलों में पुलिस की ओर से भीड़ नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल की तैनाती सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा होती है। सहारनपुर में भी कार्रवाई के दौरान पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई गई ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे।

रातभर चली बेदखली और सीलिंग की कार्रवाई के बाद प्रशासन ने शनिवार को सुबह-सुबह ध्वस्तीकरण के दौरान कलेक्ट्रेट के आसपास सुरक्षा और बढ़ा दी। कई थानों की पुलिस के साथ पीएसी तैनात रही और कलेक्ट्रेट के सभी प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। सुरक्षा व्यवस्था के तहत 10 से ज्यादा थानों की फोर्स को कलेक्ट्रेट के आसपास लगाया गया। मस्जिद और उसके आसपास के क्षेत्र में पुलिस की निगरानी लगातार बनी रही। कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे।

मामले में अब आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। मस्जिद पक्ष की ओर से उच्च न्यायालय में चुनौती दिए जाने की संभावना के बीच प्रशासन की कार्रवाई को लेकर भी चर्चा जारी है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ढांचे को हटा दिया है। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और पुलिस बल की तैनाती की गई। इस पूरे घटनाक्रम में यह भी महत्वपूर्ण है कि मामले को लेकर अदालतों में अलग-अलग स्तर पर सुनवाई हो चुकी है। सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने जुलाई में बेदखली का आदेश दिया था और जिला अदालत ने सितंबर में उस आदेश को बरकरार रखा। अब आगे यदि संबंधित पक्ष उच्च न्यायालय का रुख करता है तो वहां होने वाली सुनवाई इस विवाद की अगली कानूनी दिशा तय कर सकती है।

सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मस्जिद पर बुलडोजर ऐक्शन के बाद नगर निगम के आधा दर्जन से अधिक डंपर मलबा लेकर कलेक्ट्रेट से बाहर निकले। ध्वस्तीकरण के दौरान कलेक्ट्रेट में 10 से ज्यादा थानों की फोर्स और पीएसी तैनात रही। डीआईजी अभिषेक सिंह ने कहा कि अदालत के आदेश के क्रम में निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर कानूनी कार्रवाई के तहत ध्वस्तीकरण हो रहा है। सिटी मजिस्ट्रेट की कोर्ट ने पाया था कि यह मस्जिद सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाई गई थी। इसके बाद मस्जिद कमेटी ने अपील की थी जो जिला अदालत से खारिज कर दी गई। प्रशासन यह कार्रवाई सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए कर रहा है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी एहतियाती कदम उठाए गए हैं।

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By ATHAR

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