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प्रयागराज। प्रयागराज में चर्चित पप्पू सोनकर मृत्यु प्रकरण को लेकर प्रशासन ने मजिस्ट्रियल जांच शुरू कर दी है। इस मामले में अपर जिलाधिकारी (नगर) द्वारा अपर नगर मजिस्ट्रेट (चतुर्थ) को जांच अधिकारी नामित किया गया है। प्रशासन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि मामले से जुड़ी जानकारी रखने वाले व्यक्ति 19 मई तक अपना बयान अथवा लिखित अभिकथन प्रस्तुत कर सकते हैं।
बताया जा रहा है कि पप्पू सोनकर पुत्र स्वर्गीय सोहनलाल सोनकर, निवासी सोहबतियाबाग थाना जॉर्जटाउन, प्रयागराज की 4 फरवरी 2026 को स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय में उपचार के दौरान मृत्यु हुई थी। घटना के बाद यह मामला चर्चा में आ गया था और अब प्रशासन ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अपर नगर मजिस्ट्रेट (चतुर्थ) कार्यालय की ओर से जारी सूचना में कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति के पास इस मामले से संबंधित कोई तथ्य, जानकारी या साक्ष्य हैं, तो वह निर्धारित तिथि तक कार्यालय पहुंचकर अपना बयान दर्ज करा सकता है। प्रशासन का उद्देश्य मामले के हर पहलू की पारदर्शी जांच करना बताया जा रहा है। सूचना में यह भी स्पष्ट किया गया कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह नियमानुसार होगी और सभी तथ्यों का परीक्षण किया जाएगा। प्रशासन ने लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि जांच को निष्पक्ष और प्रभावी बनाने के लिए प्रत्यक्षदर्शियों और संबंधित लोगों के बयान महत्वपूर्ण होंगे।
मिली जानकारी के अनुसार पप्पू सोनकर की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें प्रयागराज स्थित स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद मामले को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा शुरू हो गई थी। अब प्रशासन ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश देकर पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक पड़ताल शुरू कर दी है। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक मृत्यु के कारणों को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है। जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन द्वारा मजिस्ट्रियल जांच शुरू किया जाना एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे मामले के तथ्यों को सामने लाने में मदद मिलेगी और यदि किसी प्रकार की लापरवाही या अन्य पहलू सामने आते हैं तो उस पर भी कार्रवाई संभव हो सकेगी। कानूनी जानकारों का मानना है कि मजिस्ट्रियल जांच किसी भी संवेदनशील मामले में तथ्यों को निष्पक्ष रूप से सामने लाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम होती है। इसमें प्रशासनिक अधिकारी गवाहों के बयान, दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण करते हैं।
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके पास इस मामले से जुड़ी कोई भी महत्वपूर्ण जानकारी हो तो वे आगे आकर जांच में सहयोग करें। जांच अधिकारी के समक्ष लिखित अथवा मौखिक रूप से तथ्य प्रस्तुत किए जा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी होता है ताकि जनता का भरोसा बना रहे और जांच प्रक्रिया पर किसी प्रकार का सवाल न उठे।
उत्तर प्रदेश में हाल के वर्षों में प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में संवेदनशील मामलों में मजिस्ट्रियल जांच की प्रक्रिया अपनाई जाती है ताकि तथ्यों की निष्पक्ष पड़ताल हो सके। प्रयागराज प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट तैयार होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच जारी है और संबंधित अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों एवं बयानों को संकलित किया जा रहा है।
पप्पू सोनकर की मृत्यु के बाद से यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। अब जांच शुरू होने के बाद लोगों की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है। नागरिकों को उम्मीद है कि जांच प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी और सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाएगा। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जाएगी और प्रत्येक पहलू की गंभीरता से समीक्षा की जाएगी।
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