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रिपोर्टर (सचिन शर्मा)
हरिद्वार में आयोजित होने वाले कुंभ मेले की तैयारियां तेजी से शुरू हो गई हैं। मेला प्रशासन द्वारा कुंभ क्षेत्र के पौराणिक और ऐतिहासिक स्थलों के विकास और सौंदर्यीकरण के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जा रही है। इसी योजना के तहत हरिद्वार के प्रसिद्ध पौराणिक स्थल भीमगोडा कुंड के सौंदर्यीकरण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। मेला प्रशासन का उद्देश्य इस पवित्र स्थल को उसकी ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान के अनुरूप विकसित करना है।
मंगलवार को अपर मेलाधिकारी दयानन्द सरस्वती ने तकनीकी विशेषज्ञों की टीम के साथ भीमगोडा कुंड का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कुंड के विकास और सौंदर्यीकरण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने इस बात पर विशेष ध्यान दिया कि विकास कार्यों के दौरान इस पौराणिक स्थल की मूल संरचना और धार्मिक महत्व को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कुंड में जल आपूर्ति और जल निकासी की व्यवस्था का भी जायजा लिया। तकनीकी टीम ने सुझाव दिया कि कुंड में पौराणिक जल स्रोत से निरंतर जल आपूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि यहां हमेशा स्वच्छ और साफ पानी उपलब्ध रहे। इसके साथ ही कुंड में एकत्रित होने वाले पानी की उचित निकासी के लिए भी बेहतर प्रबंध किए जाएंगे, जिससे जल की स्वच्छता बनाए रखी जा सके।

पार्क और बैठने की व्यवस्था होगी विकसित
भीमगोडा कुंड के आसपास के क्षेत्र को और अधिक सुंदर बनाने के लिए यहां एक आकर्षक पार्क विकसित किया जाएगा। पार्क में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बैठने के लिए पर्याप्त संख्या में बेंच लगाई जाएंगी। इसके अलावा कुंड के चारों ओर मजबूत रेलिंग, सुरक्षित मार्ग और बेहतर प्रकाश व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
निरीक्षण के दौरान स्थानीय पार्षद सुमित चौधरी और क्षेत्र के नागरिकों से भी चर्चा की गई। अधिकारियों ने स्थानीय लोगों के सुझाव भी सुने, ताकि विकास कार्य क्षेत्र की परंपराओं और धार्मिक भावनाओं के अनुरूप किए जा सकें। प्रशासन का मानना है कि स्थानीय लोगों की भागीदारी से विकास कार्य अधिक प्रभावी और संतुलित तरीके से पूरे किए जा सकते हैं।
इस निरीक्षण के दौरान कुंभ मेला तकनीकी प्रकोष्ठ के कई अधिकारी भी मौजूद रहे। इनमें अधिशासी अभियंता प्रवीण कुमार और सहायक अभियंता एस.के. तोमर सहित अन्य अधिकारी शामिल थे। तकनीकी टीम ने स्थल का विस्तृत निरीक्षण कर विकास कार्यों के लिए आवश्यक सुझाव दिए।
कुंभ मेला दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक माना जाता है। इस दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचते हैं और यहां के पौराणिक स्थलों के दर्शन करते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए मेला प्रशासन द्वारा भीमगोडा कुंड सहित अन्य धार्मिक स्थलों के विकास और सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
भीमगोडा कुंड का धार्मिक महत्व
भीमगोडा कुंड का धार्मिक और पौराणिक महत्व अत्यंत विशेष माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार महाभारत काल में पांडवों के वनवास के दौरान भीम ने अपनी गदा या चरण प्रहार से इस स्थान पर जल स्रोत प्रकट किया था। इसी घटना के कारण इस स्थान का नाम भीमगोडा पड़ा। समय के साथ यह स्थान श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया और हरिद्वार आने वाले श्रद्धालु यहां दर्शन और जल स्पर्श को अत्यंत पुण्यकारी मानते हैं।
मेला प्रशासन का उद्देश्य है कि भीमगोडा कुंड को उसकी प्राचीन पहचान और धार्मिक गरिमा को बनाए रखते हुए आधुनिक सुविधाओं से विकसित किया जाए। प्रशासन का प्रयास है कि कुंभ मेले के दौरान यहां आने वाले श्रद्धालुओं को स्वच्छ, सुरक्षित और आकर्षक वातावरण मिल सके।
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