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उत्तराखंड के कोटद्वार में दुकान का नाम बदलने को लेकर हुए विवाद के बाद अब मामला और गंभीर होता नजर आ रहा है। इस प्रकरण में चर्चाओं में आए मोहम्मद दीपक (दीपक कुमार) को सोशल मीडिया के माध्यम से जान से मारने की धमकी दी गई है। इतना ही नहीं, धमकी देने वाले व्यक्ति ने दीपक के खिलाफ दो लाख रुपये का इनाम घोषित करने की बात भी कही है। इस घटना के सामने आने के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई है और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
पीड़ित दीपक कुमार की ओर से दी गई तहरीर के आधार पर कोटद्वार पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया धमकी देने वाले आरोपी की पहचान राजा उत्कर्ष, निवासी मोतिहारी, बिहार के रूप में हुई है। हालांकि पुलिस का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और सोशल मीडिया अकाउंट्स, डिजिटल साक्ष्यों व अन्य पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि धमकी को हल्के में नहीं लिया जा रहा और आरोपी तक पहुंचने के लिए तकनीकी सहायता भी ली जा रही है।
सोशल मीडिया पर मिली धमकी, इनाम की घोषणा
जानकारी के अनुसार, यह धमकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए दी गई, जिसमें दीपक कुमार को जान से मारने की बात कही गई। साथ ही यह भी लिखा गया कि जो कोई यह काम करेगा, उसे दो लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा। इस तरह की पोस्ट सामने आने के बाद दीपक और उनके परिजनों की चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर इस तरह की धमकियां न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि सामाजिक सौहार्द के लिए भी खतरा पैदा करती हैं।
जमीअत उलेमा-ए-हिंद ने डीजीपी से की सुरक्षा की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए जमीअत उलेमा-ए-हिंद उत्तराखंड ने पुलिस महानिदेशक (DGP) को पत्र लिखकर दीपक कुमार को सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि दीपक की जान को वास्तविक खतरा है और प्रशासन को तत्काल कदम उठाने चाहिए। पत्र में उल्लेख किया गया है कि दीपक कुमार ने 26 जनवरी को कोटद्वार में एक मुस्लिम दुकानदार पर हुए हमले के दौरान साहस दिखाते हुए बीच-बचाव किया था और व्यापारी की जान बचाई थी। इसके बाद से ही वे कुछ असामाजिक तत्वों के निशाने पर आ गए हैं।
जमीअत के प्रदेश महासचिव मौलाना शराफत अली कासमी ने कहा कि दीपक कुमार ने मानवीय और संवैधानिक दायित्व निभाते हुए हिंसा का विरोध किया, लेकिन दुर्भाग्यवश आज वही व्यक्ति धमकियों का सामना कर रहा है। उन्होंने इसे बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि समाज में ऐसे उदाहरणों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, न कि उन्हें डराया-धमकाया जाए।
जिम में तोड़फोड़ के प्रयास का आरोप
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि 31 जनवरी को दून और हरिद्वार से आए कुछ लोगों ने कोटद्वार पहुंचकर दीपक कुमार के जिम में तोड़फोड़ करने का प्रयास किया। हालांकि समय रहते स्थिति को संभाल लिया गया, लेकिन इस घटना ने मामले की संवेदनशीलता को और बढ़ा दिया। संगठन का कहना है कि इस तरह की घटनाएं देवभूमि उत्तराखंड की शांत और सौहार्दपूर्ण छवि को नुकसान पहुंचा रही हैं।
जमीअत उलेमा-ए-हिंद के उपाध्यक्ष मुफ्ती रईस अहमद कासमी ने भी डीजीपी से मांग की है कि कोटद्वार में तोड़फोड़ का प्रयास करने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि कानून का डर खत्म होने से ही ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो इससे समाज में गलत संदेश जाएगा।
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सोशल मीडिया पर नफरत और धमकी भरे संदेशों पर कैसे प्रभावी नियंत्रण किया जाए। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे मामलों में त्वरित पुलिस कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया से ही विश्वास बहाल किया जा सकता है। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि कोटद्वार हमेशा से शांत शहर रहा है और यहां आपसी भाईचारे की मिसालें रही हैं। ऐसे में इस तरह की घटनाएं चिंता बढ़ाने वाली हैं।
पुलिस प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि दीपक कुमार की शिकायत को गंभीरता से लिया गया है और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षा भी उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही आरोपी की गिरफ्तारी के लिए टीमें सक्रिय कर दी गई हैं।
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