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हरिद्वार,
भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” के अंतर्गत महिला अधिकारों और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर हरिद्वार में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला ऋषिकुल आयुर्वेदिक महाविद्यालय के प्रेक्षागृह में आयोजित हुई, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं, छात्राओं, स्वयं सहायता समूहों और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि सचिव जिला विधिक प्राधिकरण/सीनियर सिविल जज सिमरनजीत कौर एवं मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्रा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
महिला अधिकारों और विधिक जागरूकता पर विशेष जोर
कार्यशाला को संबोधित करते हुए सीनियर सिविल जज सिमरनजीत कौर ने “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” योजना के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह योजना केवल बेटियों की शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक और आत्मनिर्भर बनाने का एक सशक्त माध्यम है।
उन्होंने महिलाओं को उनके संवैधानिक अधिकारों, कानूनी संरक्षण और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से जुड़े विभिन्न पहलुओं की सरल और स्पष्ट जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से पात्र व्यक्तियों को न्यायालय में विचाराधीन मामलों में निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान की जाती है और सरकारी खर्च पर वकील उपलब्ध कराए जाते हैं।

सीनियर सिविल जज सिमरनजीत कौर ने महिलाओं को बताया कि किसी भी प्रकार की कानूनी जानकारी या सहायता के लिए वे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के हेल्पलाइन नंबर 15100 पर संपर्क कर सकती हैं। इसके साथ ही विभिन्न अपराधों से संबंधित हेल्पलाइन नंबरों की भी जानकारी दी गई, ताकि महिलाएं संकट की स्थिति में तुरंत सहायता प्राप्त कर सकें।
महिला सशक्तिकरण शासन की प्राथमिकता: सीडीओ
मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि महिला सशक्तिकरण शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने महिलाओं से आह्वान किया कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ लें। डॉ. मिश्रा ने कहा कि “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” योजना सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम है, जो समाज में समानता और न्याय की भावना को मजबूत करती है। उन्होंने पुरुषों और महिलाओं के समान अधिकारों की आवश्यकता पर भी बल दिया।
साइबर अपराध से बचाव पर जागरूकता
कार्यशाला के दौरान साइबर सेल से उप निरीक्षक अनीता शर्मा, उप निरीक्षक प्रकाश चंद एवं योगेश कैथोला ने महिलाओं को साइबर अपराध से बचने के उपाय बताए। उन्होंने कहा कि आजकल अधिकतर साइबर अपराध लालच, डर और जल्दबाजी का फायदा उठाकर किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि अज्ञात कॉल या मैसेज के माध्यम से OTP, बैंक विवरण, एटीएम पिन या UPI जानकारी मांगना साइबर ठगी का सामान्य तरीका है। महिलाओं से अपील की गई कि वे किसी भी स्थिति में अपनी गोपनीय जानकारी साझा न करें।

स्वास्थ्य विभाग से डॉ. आरती ने महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य पर जानकारी देते हुए कहा कि स्वस्थ शरीर और मानसिक विकास के लिए पौष्टिक आहार अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन की कमी से होने वाली समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने हरी सब्ज़ियों, फल, दालें, दूध और मोटे अनाज को दैनिक आहार में शामिल करने की सलाह दी। साथ ही सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूक करते हुए बताया कि जल्द ही 14 वर्ष तक की बालिकाओं को वैक्सीन लगाने की योजना है।
घरेलू हिंसा और ड्रग्स पर कानूनी जानकारी
हाईकोर्ट के अधिवक्ता ललित मिगलानी ने घरेलू हिंसा और बढ़ते ड्रग्स के चलन पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि महिलाओं को घरेलू हिंसा से जुड़े कानूनों की जानकारी होनी चाहिए, ताकि वे अपने अधिकारों के प्रति सजग रह सकें। उन्होंने यह भी बताया कि ड्रग्स का बेचना और खरीदना कानूनी अपराध है और इससे समाज एवं परिवार दोनों प्रभावित होते हैं। कार्यशाला के अंत में “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” थीम पर आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली बालिकाओं मोनिका, यशिका सैनी, निर्मला, अनुष्का और प्रिया को मुख्य अतिथियों द्वारा स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में जिला बाल विकास अधिकारी धर्मवीर सिंह ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का सफल संचालन संतोष रावत द्वारा किया गया। इस अवसर पर सहायक परियोजना निर्देशक नलिनीत घिल्डियाल, अधिवक्ता ललित मिगलानी, रमन सैनी, विनीत चौधरी, योगिता सिंह, रेवती, सिद्धांत, मीनाक्षी सहित स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां, महिला प्रधान और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

यह कार्यशाला महिलाओं के लिए न केवल जानकारी का स्रोत बनी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनने की प्रेरणा भी दी। “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” योजना के अंतर्गत आयोजित यह कार्यक्रम महिला अधिकारों, स्वास्थ्य, सुरक्षा और समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
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