शहीद दिवस पर जीआरपी पुलिस द्वारा दो मिनट का मौन रखकर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि”शहीद दिवस पर जीआरपी पुलिस द्वारा दो मिनट का मौन रखकर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि”

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भारत के इतिहास में 30 जनवरी का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन उन अमर शहीदों की याद दिलाता है जिन्होंने देश की स्वतंत्रता और अखंडता के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। इसी कड़ी में वर्ष 2026 के शहीद दिवस पर जीआरपी (Government Railway Police) पुलिस लाइन में एक भावपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने दो मिनट का मौन रखकर वीर सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक रेलवेज सुश्री अरुणा भारती की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक प्रेरणादायक बना दिया। श्रद्धांजलि सभा का उद्देश्य केवल शहीदों को याद करना ही नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को जीवन में उतारने का संदेश देना भी था।

दो मिनट का मौन रखकर किया गया सम्मान

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने एक साथ खड़े होकर दो मिनट का मौन रखा। यह मौन उन वीरों के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक था, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। मौन धारण के बाद शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए और राष्ट्र की एकता एवं सुरक्षा बनाए रखने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम का वातावरण बेहद भावुक और देशभक्ति से ओत-प्रोत रहा।

इस आयोजन में पुलिस अधीक्षक रेलवेज सुश्री अरुणा भारती की मौजूदगी ने कर्मियों का मनोबल बढ़ाया। उनके नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि देश की सेवा केवल सीमा पर तैनात सैनिक ही नहीं, बल्कि आंतरिक सुरक्षा में लगे पुलिस बल भी पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं। उन्होंने शहीदों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि आज हम जिस स्वतंत्र वातावरण में सांस ले रहे हैं, वह अनगिनत वीरों के त्याग का परिणाम है। ऐसे अवसर हमें अपने कर्तव्यों के प्रति और अधिक सजग बनाते हैं।

जीआरपी पुलिस लाइन में अधिकारी और कर्मचारी दो मिनट का मौन रखते हुए शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए।

केवल पुलिस लाइन ही नहीं, बल्कि पुलिस अधीक्षक कार्यालय की विभिन्न शाखाओं में तैनात कर्मचारियों ने भी एक साथ दो मिनट का मौन रखकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इस सामूहिक भागीदारी ने यह दर्शाया कि शहीद दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि पूरे विभाग के लिए भावनात्मक और प्रेरणादायक अवसर है।

शहीद दिवस का ऐतिहासिक महत्व

भारत में हर वर्ष 30 जनवरी को शहीद दिवस मनाया जाता है। यह दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के रूप में भी जाना जाता है, जिन्हें 1948 में इसी दिन गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह दिन हमें उन लाखों स्वतंत्रता सेनानियों की याद दिलाता है जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष किया और देश को आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शहीद दिवस केवल इतिहास को याद करने का दिन नहीं है, बल्कि यह हमें यह भी सिखाता है कि देशहित सर्वोपरि है।

ऐसे आयोजन युवाओं और नई पीढ़ी को देशभक्ति की भावना से जोड़ने का काम करते हैं। जब सरकारी संस्थान और सुरक्षा बल इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करते हैं, तो समाज में सकारात्मक संदेश जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि शहीदों की कहानियां और उनका त्याग आने वाली पीढ़ियों को जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करता है।

राष्ट्र की एकता और अखंडता का संदेश

श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान यह संदेश भी दिया गया कि देश की एकता और अखंडता बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। पुलिस बल, जो दिन-रात जनता की सुरक्षा में जुटा रहता है, ऐसे अवसरों पर यह संकल्प दोहराता है कि वह हर परिस्थिति में राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों ने यह संकल्प लिया कि वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ करेंगे। शहीदों का सम्मान केवल शब्दों से नहीं, बल्कि उनके दिखाए मार्ग पर चलकर ही किया जा सकता है।

शहीद दिवस हमें यह सोचने का अवसर देता है कि हम अपने देश के लिए क्या कर सकते हैं।

  • कानून का पालन करना
  • सामाजिक सौहार्द बनाए रखना
  • राष्ट्रहित को प्राथमिकता देना
  • जिम्मेदार नागरिक बनना
  • ये छोटे-छोटे कदम भी शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि हो सकते हैं।
शहीद दिवस पर जीआरपी पुलिस द्वारा दो मिनट का मौन रखकर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि”

जीआरपी पुलिस द्वारा आयोजित यह श्रद्धांजलि कार्यक्रम न केवल शहीदों के प्रति सम्मान का प्रतीक था, बल्कि यह देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और एकता का भी संदेश देता है। अमर शहीदों का बलिदान सदैव हमें प्रेरित करता रहेगा कि हम अपने राष्ट्र की सुरक्षा, प्रगति और सम्मान के लिए निरंतर प्रयासरत रहें।

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By ATHAR

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