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प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल में रविवार देर रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक बड़े भाजपा नेता के रिश्तेदार से मारपीट के बाद जमकर हंगामा हुआ। जूनियर डॉक्टरों और दूसरे पक्ष के आमने-सामने आने से स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कई थानों की पुलिस फोर्स को मौके पर बुलाना पड़ा और अस्पताल परिसर आधी रात तक छावनी में तब्दील रहा।
एसआरएन अस्पताल प्रयागराज का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है, जहां रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। भीड़, सीमित संसाधन और ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों पर बढ़ते दबाव के कारण यहां अक्सर विवाद की स्थिति बन जाती है।
हाल के वर्षों में मरीजों के तीमारदारों और मेडिकल स्टाफ के बीच नोकझोंक और मारपीट की घटनाएं सामने आती रही हैं। रविवार रात हुई यह घटना भी उसी कड़ी में एक गंभीर मामला बनकर सामने आई है, जिसमें राजनीतिक पहचान से जुड़ा पहलू होने के कारण तनाव और ज्यादा बढ़ गया।
घटना
भाजपा नेता के रिश्तेदार आदर्श केसरवानी और उनके साथ आए लोगों की जूनियर डॉक्टर से कहासुनी हो गई, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। यह घटना प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल परिसर में हुई। रविवार रात करीब 11 बजे यह विवाद शुरू हुआ,
जानकारी के अनुसार, मुट्ठीगंज निवासी आदर्श केसरवानी किसी मरीज को देखने अस्पताल पहुंचे थे। मरीज का ईसीजी होना था, जिसे लेकर ड्यूटी पर मौजूद जूनियर डॉक्टर से उनकी नोकझोंक हो गई।
बात बढ़ने पर दोनों पक्षों में गाली-गलौज शुरू हो गई और फिर हाथापाई होने लगी। देखते ही देखते वहां बड़ी संख्या में लोग जुट गए, जिससे हालात बेकाबू हो गए।
मारपीट की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। हालात की गंभीरता को देखते हुए आसपास के कई थानों की पुलिस फोर्स और वरिष्ठ अधिकारी भी अस्पताल बुलाए गए।
दोनों पक्ष कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे, जिससे अस्पताल परिसर में तनाव का माहौल बना रहा। पुलिस अधिकारियों ने काफी मशक्कत के बाद दोनों पक्षों को समझाया, तब जाकर रात करीब 12 बजे स्थिति पर काबू पाया जा सका।
एसीपी कोतवाली रवि कुमार गुप्ता ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा—
उन्होंने बताया कि डॉक्टरों की ओर से तहरीर दिए जाने की बात कही गई है और तहरीर मिलने के बाद मामले में अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना का असर अस्पताल और आसपास के क्षेत्र में साफ तौर पर देखा गया।
- जनता पर असर: मरीजों और तीमारदारों में डर और असुरक्षा की भावना पैदा हुई।
- स्वास्थ्य सेवाएं: कुछ समय के लिए इलाज और जांच की प्रक्रिया प्रभावित रही।
- प्रशासनिक दबाव: पुलिस और अस्पताल प्रशासन पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का दबाव बढ़ा।
- कानून-व्यवस्था: अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर हिंसा ने कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए।
पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के साथ मारपीट और हंगामे की घटनाएं बढ़ी हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार,
- मरीजों की बढ़ती संख्या
- स्टाफ की कमी
- और जागरूकता का अभाव
- इन घटनाओं के प्रमुख कारण हैं।
एसआरएन अस्पताल में हुआ यह बवाल दिखाता है कि सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा और संवाद की कितनी आवश्यकता है। मरीजों और डॉक्टरों के बीच बेहतर समन्वय और सख्त सुरक्षा व्यवस्था से ही ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।
प्रशासन को चाहिए कि अस्पताल परिसरों में कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त कदम उठाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।
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