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रिपोर्टर (सचिन शर्मा)
हरिद्वार में शनिवार को महिला व मजदूर संगठनों ने बलात्कार और हत्याओं के आरोपियों को संरक्षण देने के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। बीएचईएल सेक्टर-4 चौराहे पर उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार का संयुक्त पुतला दहन कर आक्रोश जताया गया।
महिलाओं के खिलाफ अपराध और राजनीतिक संरक्षण का मुद्दा
देश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध और आरोपियों को कथित राजनीतिक संरक्षण मिलने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। उत्तराखंड की अंकिता भंडारी हत्याकांड और उत्तर प्रदेश के उन्नाव मामले ने पूरे देश में आक्रोश पैदा किया था।
अंकिता भंडारी मामले में समय-समय पर नए खुलासों और प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आने के बाद न्याय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठते रहे हैं। वहीं उन्नाव कांड में दोषी भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को हाईकोर्ट से राहत मिलने पर पीड़ित परिवार की सुरक्षा और न्याय को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।

प्रदर्शन
दिनांक 28 दिसंबर को प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र और इंकलाबी मजदूर केंद्र की पहल पर कई संगठनों ने हरिद्वार के बीएचईएल सेक्टर-4 चौराहे पर विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि:
- अंकिता भंडारी बलात्कार व हत्याकांड में भाजपा से जुड़े कथित वीआईपी नेताओं को बचाया जा रहा है
- उन्नाव कांड के दोषी कुलदीप सिंह सेंगर को न्यायिक राहत देकर पीड़ित परिवार को डराया गया है
- इन्हीं मुद्दों के विरोध में उत्तराखंड सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार का संयुक्त पुतला दहन किया गया।
संगठनों का आरोप और सरकार से मांग
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि अंकिता भंडारी मामले में भाजपा के पूर्व विधायक की पत्नी द्वारा कई बड़े नाम उजागर किए गए हैं, लेकिन अब तक उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई। वक्ताओं के अनुसार: उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले गुजरात और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में भी बलात्कारियों और हत्यारों को बचाने के प्रयास किए जा चुके हैं, जिनकी जिम्मेदारी केवल राज्य सरकारों की ही नहीं बल्कि केंद्र सरकार की भी है।
आम जनता और सामाजिक माहौल पर असर
इस प्रदर्शन के कारण कुछ समय के लिए बीएचईएल क्षेत्र में यातायात प्रभावित रहा। स्थानीय लोगों और राहगीरों की भीड़ मौके पर जुट गई।
- महिलाओं में सुरक्षा को लेकर चिंता
- मजदूर संगठनों में आक्रोश
- युवाओं और छात्रों में सरकार के प्रति असंतोष
- हालांकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।

भारत में महिला अपराधों को लेकर हर साल हजारों मामले दर्ज होते हैं।
- 2019–2023 के बीच बलात्कार मामलों में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई
- उन्नाव और अंकिता भंडारी जैसे मामलों में न्याय में देरी ने जनआक्रोश को बढ़ाया
- संगठनों का कहना है कि जब आरोपी राजनीतिक रूप से प्रभावशाली होते हैं, तो न्याय प्रक्रिया कमजोर पड़ती दिखाई देती है।
किन संगठनों ने भाग लिया
प्रदर्शन में कई सामाजिक और मजदूर संगठनों की सक्रिय भागीदारी रही, जिनमें शामिल थे:
- प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र – नीता
- इंकलाबी मजदूर केंद्र – पंकज कुमार
- भेल मजदूर ट्रेड यूनियन – अवधेश कुमार
- सिमेंस वर्कर्स यूनियन – महिपाल
- क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन – नासिर अहमद
- परिवर्तनकामी छात्र संगठन – तरुण व दीपांकज
- इंसानियत मंच – आकाश
सहित अन्य संगठनों के प्रतिनिधि।
हरिद्वार का यह प्रदर्शन एक बार फिर यह दर्शाता है कि महिला सुरक्षा और न्याय का मुद्दा केवल कानून तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना से भी जुड़ा है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
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