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हरिद्वार के धनपुरा, पड़ार्था क्षेत्र में महिलाओं के स्वास्थ्य और मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुनिया फाउंडेशन ने आयुष इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में निःशुल्क सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन स्थापित कर छात्राओं को बड़ी राहत दी है।
महिलाओं की स्वच्छता और जागरूकता की जरूरत
ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आज भी मासिक धर्म से जुड़ी जागरूकता, स्वच्छता सुविधाओं और मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर चर्चा नहीं हो पाती। कई छात्राएं आर्थिक मजबूरियों, सामाजिक झिझक और संसाधनों की कमी के कारण सुरक्षित सैनिटरी उत्पादों का उपयोग नहीं कर पातीं।
ऐसे में सामाजिक संगठनों द्वारा उठाए गए छोटे लेकिन प्रभावी कदम, महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। मुनिया फाउंडेशन लंबे समय से महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करता आ रहा है।

स्थान
धनपुरा, पड़ार्था, हरिद्वार स्थित आयुष इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज महिला स्वास्थ्य एवं जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत मुनिया फाउंडेशन द्वारा परिसर में निःशुल्क सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन स्थापित की गई, जिसमें छात्राओं के लिए आवश्यक सैनिटरी पैड उपलब्ध कराए गए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मासिक धर्म के दौरान किसी भी छात्रा को असुविधा या असुरक्षा का सामना न करना पड़े। इस पहल का नेतृत्व मुनिया फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. सौरभ शुक्ला ने किया।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. शिखा शुक्ला ने छात्राओं को संबोधित करते हुए मासिक धर्म स्वास्थ्य, मानसिक कल्याण और आत्म-देखभाल पर विस्तृत जानकारी दी।
मासिक धर्म कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक स्वाभाविक जैविक प्रक्रिया है। इसके बारे में खुलकर बात करना और सही जानकारी देना लड़कियों के आत्मसम्मान और मानसिक मजबूती के लिए अत्यंत आवश्यक है।”
उन्होंने आगे कहा—
आज की युवा पीढ़ी को न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक रूप से भी सशक्त बनाना समय की आवश्यकता है।”
वहीं, मुनिया फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. सौरभ शुक्ला ने कहा—
स्वास्थ्य के साथ-साथ कौशल विकास भी आत्मनिर्भरता की कुंजी है।”
स्थानीय समस्याओं को समझने के बाद फाउंडेशन ने निर्णय लिया है कि यहां जल्द ही महिलाओं और लड़कियों के लिए स्किल डेवलपमेंट प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा।”
छात्राओं और ग्रामीण समुदाय पर असर
इस पहल से कॉलेज में अध्ययनरत छात्राओं को मासिक धर्म के दौरान सुरक्षित और सम्मानजनक सुविधा उपलब्ध होगी।
कार्यक्रम के बाद आयोजित संवादात्मक टॉक शो में स्थानीय महिलाओं और किशोरियों ने खुलकर अपनी समस्याएं साझा कीं। चर्चा में यह सामने आया कि क्षेत्र में किसी भी प्रकार का कौशल विकास केंद्र उपलब्ध नहीं है, जिससे महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने के अवसर सीमित हैं।
इस कार्यक्रम से:
- मासिक धर्म को लेकर झिझक कम होगी
- छात्राओं की नियमित उपस्थिति बढ़ेगी
- स्वास्थ्य और मानसिक जागरूकता को बल मिलेगा
- भविष्य में रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण की संभावना बनेगी
सरकारी और गैर-सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, ग्रामीण भारत में अब भी बड़ी संख्या में महिलाएं असुरक्षित साधनों का उपयोग करती हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि स्कूलों और कॉलेजों में वेंडिंग मशीन की उपलब्धता से ड्रॉपआउट रेट कम करने में मदद मिलती है। मुनिया फाउंडेशन की यह पहल न केवल मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा देती है, बल्कि महिलाओं के मानसिक और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में भी एक मजबूत कदम है। यदि ऐसे प्रयास लगातार जारी रहे, तो ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की स्थिति में सकारात्मक बदलाव निश्चित है। समाज और संस्थानों को मिलकर इस दिशा में आगे आना होगा।
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