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देहरादून जनपद के विकासनगर क्षेत्र अंतर्गत चकराता तहसील के कंधाड गांव में एक दो मंजिला मकान में अचानक आग लग गई। इस हादसे में मकान में रखा सारा घरेलू सामान जलकर राख हो गया। गनीमत रही कि घटना के समय घर में कोई मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा जानमाल का नुकसान टल गया।
उत्तराखंड के पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं। खासकर ठंड के मौसम में लकड़ी से बने मकानों, खुले चूल्हों, बिजली की खराब वायरिंग और सूखे लकड़ी-घास के कारण आग का खतरा बढ़ जाता है।
चकराता तहसील के ग्रामीण इलाके आज भी काफी हद तक पारंपरिक निर्माण पर निर्भर हैं, जहां लकड़ी का प्रयोग अधिक होता है। ऐसे क्षेत्रों में आग लगने की स्थिति में नुकसान तेजी से बढ़ जाता है, क्योंकि आग बुझाने के संसाधन सीमित होते हैं और दमकल की पहुंच में भी समय लगता है।
घटना
कंधाड गांव निवासी बलदेव सिंह पुत्र स्वर्गीय गुल्लू के दो मंजिला मकान में अचानक आग लग गई। आग इतनी भीषण थी कि कुछ ही देर में पूरे मकान को अपनी चपेट में ले लिया और घर में रखा सारा सामान जलकर राख हो गया। यह घटना कंधाड गांव, चकराता तहसील, विकासनगर (देहरादून) क्षेत्र की है।
जानकारी के अनुसार यह घटना बुधवार शाम करीब पांच बजे की है। ग्रामीणों के अनुसार, शाम के समय परिवार के सभी सदस्य पशु चराने और खेतों में काम करने गए हुए थे। बच्चे पास के इलाके में खेल रहे थे। इसी दौरान अचानक मकान से धुआं उठता दिखाई दिया। खेतों में काम कर रहे परिजनों ने जब आग की लपटें देखीं तो वे दौड़कर मकान की ओर पहुंचे, लेकिन तब तक आग विकराल रूप ले चुकी थी। मकान का अधिकांश हिस्सा लकड़ी का होने के कारण आग तेजी से फैल गई और कुछ ही समय में पूरा घर जलकर राख हो गया।
आग से हुआ नुकसान घरेलू सामान जलकर राख
- बिस्तर
- कपड़े
- बर्तन
- टीवी और अन्य घरेलू सामान
- पूरी तरह जलकर नष्ट हो गया। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार आग से लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।
घटना के समय मकान में कोई मौजूद नहीं था, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। यदि बच्चे या परिवार के सदस्य घर के अंदर होते, तो यह हादसा जानलेवा भी साबित हो सकता था। ग्रामीणों ने इसे राहत की बात बताया कि समय रहते सभी सुरक्षित रहे। ग्रामीणों के अनुसार पीड़ित अनुसूचित जाति समुदाय से संबंध रखता है और आर्थिक रूप से कमजोर है। आग लगने के बाद परिवार के सामने ठंड के मौसम में सिर छिपाने का संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पीड़ित परिवार के पास फिलहाल रहने और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए सीमित साधन बचे हैं।
तहसील प्रशासन को घटना की सूचना दे दी गई है। इस संबंध में तहसीलदार चकराता रूप सिंह ने बताया उन्होंने कहा कि संबंधित पटवारी को मौके की जांच के लिए निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद पीड़ित परिवार को नियमानुसार राहत और मुआवजे की कार्रवाई की जाएगी।
इस आगजनी की घटना से गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों में यह चिंता बढ़ गई है कि ठंड के मौसम में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों। पीड़ित परिवार के लिए यह समय बेहद कठिन है। ठंड के बीच घर और सामान के जल जाने से दैनिक जीवन प्रभावित हुआ है। ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार की मदद के लिए आपसी सहयोग की बात कही है। कुछ लोगों ने अस्थायी तौर पर रहने की व्यवस्था कराने की पहल भी की है। घर जलने के कारण बच्चों की किताबें, कपड़े और अन्य जरूरी सामान भी नष्ट हो गए हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है।
पर्वतीय क्षेत्रों में हर साल आगजनी की कई घटनाएं सामने आती हैं, जिनमें अधिकतर कारण—
- बिजली शॉर्ट सर्किट
- लकड़ी के मकान
- खुले आग के स्रोत
- माने जाते हैं।
कंधाड गांव में हुई यह आगजनी की घटना एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में आग से सुरक्षा के प्रति सतर्कता की जरूरत को दर्शाती है। प्रशासन से अपेक्षा है कि पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द राहत और मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। साथ ही ग्रामीणों को आग से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करना भी आवश्यक है।
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