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हिमाचल प्रदेश के उद्योग मंत्री जगमोहन सिंह चौहान शनिवार को सिरमौर जिले के पश्मी गांव पहुंचे, जहां वे छत्रधारी चालदा महाराज की आगवानी की तैयारियों का निरीक्षण करने आए। 14 दिसंबर से शुरू होने वाले इस वर्षभर के प्रवास को लेकर क्षेत्र में भारी उत्साह का माहौल है।
सात साल पुरानी इच्छा अब होने जा रही पूरी
चालदा महासू महाराज, जिन्हें लोकआस्था और परंपरा में अत्यंत पूज्य स्थान प्राप्त है, ने करीब सात वर्ष पूर्व संदेशवाहक के माध्यम से पश्मी गांव आने की इच्छा जताई थी। ग्रामीणों के लिए यह भावनात्मक और गौरवपूर्ण अवसर है, क्योंकि वे लंबे समय से इस दिव्य प्रवास का इंतजार कर रहे थे। पश्मी व आसपास के गांवों में वर्षों से चली आ रही लोक-आस्था, रीति-रिवाज और धार्मिक परंपरा इस आयोजन के साथ नई ऊँचाइयाँ छूने को तैयार हैं।
उद्योग मंत्री चौहान करीब 600 श्रद्धालुओं के जत्थे के साथ पश्मी गांव पहुंचे। उन्होंने बताया:
- 14 दिसंबर 2025 को चालदा महाराज पश्मी गांव स्थित नए मंदिर में विराजमान होंगे।
- यह प्रवास पूरे एक वर्ष तक चलेगा।
- मंदिर का निर्माण श्रद्धालुओं के सहयोग से लगभग एक करोड़ रुपये की लागत में पूरा किया गया है।
द्राबिल गांव में पड़ाव
महाराज के पश्मी पहुंचने से एक दिन पहले
- वे द्राबिल गांव में रात्रि विश्राम करेंगे।
- यहां 30 हजार श्रद्धालुओं के भोजन, आवास और व्यवस्थाओं की तैयारियाँ की गई हैं।
- क्षेत्र के नंबरदार लाखी राम शर्मा और अन्य गणमान्यों ने स्वयं विभिन्न गांवों में जाकर इस कार्यक्रम के लिए निमंत्रण दिया है। अनुमान है कि करीब 50 हजार श्रद्धालु इस ऐतिहासिक अवसर पर शामिल होंगे।
उद्योग मंत्री जगमोहन सिंह चौहान ने कहा:
“पश्मी गांव में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पूरे प्रदेश की जनता इस ऐतिहासिक पल का बेसब्री से इंतजार कर रही है।”
उन्होंने आगे बताया कि वार्षिक प्रवास के दौरान यहां सांस्कृतिक, धार्मिक और पारंपरिक गतिविधियों की श्रृंखलाबद्ध कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। चालदा महाराज के आगमन से पूरे शिलाई क्षेत्र में उत्साह का वातावरण है।
स्थानीय व्यवसाय को बढ़ावा
- कपड़ों, पूजा सामग्रियों, खाने-पीने और परिवहन सेवाओं में मांग बढ़ने की संभावना।
- छोटे दुकानदारों को मौसमी कारोबार बढ़ने की उम्मीद।
- 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना को देखते हुए
- स्थानीय प्रशासन ने यातायात प्रबंधन के लिए विशेष रूट प्लान तैयार किया है। ग्रामीणों ने स्वयं श्रमदान करके मंदिर निर्माण में योगदान दिया।स्वागत-सत्कार और व्यवस्थाओं में स्थानीय युवाओं की बड़ी भागीदारी दिख रही है।
पूर्व आयोजनों
सिरमौर और शिलाई क्षेत्र में इससे पहले भी बड़े धार्मिक आयोजन हुए हैं, लेकिन
- इतने बड़े स्तर की आवभगत
- मंदिर निर्माण में इतनी आर्थिक और भावनात्मक भागीदारी
- और एक वर्ष लंबे प्रवास का आयोजन
- अत्यंत दुर्लभ माना जा रहा है।
- पिछले बड़े धार्मिक आयोजनों में किसी में भी श्रद्धालुओं की संख्या 20–25 हजार से अधिक नहीं पहुंची थी। इस बार संख्या दोगुनी से भी अधिक होने का अनुमान है।
चालदा महाराज का पश्मी गांव में वर्षभर का प्रवास न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक समृद्धि का भी संदेश देता है। स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों के बीच सामंजस्य इस आयोजन को और खास बनाता है। श्रद्धालुओं से अपील है कि वे भीड़भाड़ के दौरान नियमों का पालन करें और सुरक्षित व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग दें।
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