पिथौरागढ़ में यूकेएसएसएससी पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करते युवा।पिथौरागढ़ में यूकेएसएसएससी पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करते युवा।

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पिथौरागढ़ जिले में यूकेएसएसएससी स्नातक स्तरीय परीक्षा का पेपर सेंटर से बाहर भेजे जाने के आरोप ने युवा बेरोजगारों में गुस्सा भड़का दिया। बृहस्पतिवार को सैकड़ों युवाओं ने नगर में जुलूस निकालकर सरकार, मुख्यमंत्री और चयन आयोग के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और सीबीआई जांच की मांग की।

पेपर लीक विवाद की पुरानी कड़ी

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) पिछले कुछ वर्षों से पेपर लीक विवादों से घिरा रहा है। 2022 में भी ग्रेजुएट और इंटर स्तर की परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर नकल और पेपर लीक की घटनाएं सामने आई थीं। उस समय सरकार ने सख्त नकल विरोधी कानून बनाने की घोषणा की थी। बावजूद इसके बार-बार परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने से आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठते रहे हैं।

युवाओं का जुलूस और धरना

गुरुवार को जिले के अलग-अलग इलाकों से आए युवाओं ने नगर के विभिन्न हिस्सों में जुलूस निकाला। प्रदर्शनकारियों ने “पेपर चोर गद्दी छोड़” और “सरकार होश में आओ” जैसे नारे लगाते हुए कलक्ट्रेट तक मार्च किया। वहां पहुंचकर युवाओं ने धरना दिया और आरोप लगाया कि नकल विरोधी कानून के बावजूद नकल माफिया सक्रिय हैं और बार-बार पेपर लीक कर मेहनती अभ्यर्थियों का भविष्य खराब कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा नेता सिर्फ तीन पन्नों के लीक होने की बात कर युवाओं को गुमराह कर रहे हैं, जबकि आधा नंबर भी भर्ती प्रक्रिया में किसी का चयन या असफलता तय कर सकता है। उन्होंने आयोग के सभी कर्मचारियों को बदलने और अब तक हुए सभी पेपर लीक मामलों की सीबीआई जांच की मांग की।

इस मामले पर अभी तक आयोग या राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले भी पेपर लीक रोकने के लिए कड़े कानून और सख्त कार्रवाई की बात कर चुके हैं।

युवाओं का आक्रोश और सामाजिक असर

लगातार पेपर लीक की घटनाओं से बेरोजगार युवाओं के बीच गहरा असंतोष फैल रहा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि उनके परिवार अभावों में रहते हुए उन्हें पढ़ा रहे हैं, लेकिन हर बार पेपर लीक होने से उनकी मेहनत व्यर्थ हो रही है। पिथौरागढ़ के अलावा बेड़ीनाग में भी युवाओं, छात्र-छात्राओं और जनप्रतिनिधियों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदेश सरकार का पुतला फूंका गया और दोबारा परीक्षा कराने की मांग उठाई गई।

पुराने मामलों से सबक

उत्तराखंड में इससे पहले 2022 और 2023 में भी पेपर लीक मामले सामने आए थे, जिनमें कई परीक्षाएं रद्द करनी पड़ी थीं। उन मामलों की जांच STF को सौंपी गई थी और कुछ गिरफ्तारियां भी हुई थीं। फिर भी ताजा घटना यह दर्शाती है कि सख्त कानून बनने के बावजूद नकल माफिया का नेटवर्क अभी भी सक्रिय है।

पिथौरागढ़ और बेड़ीनाग में युवाओं का यह उग्र प्रदर्शन राज्य में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। यदि सरकार ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए तो आंदोलन और तेज हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीबीआई जांच और परीक्षा प्रणाली में तकनीकी सुधार ही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है

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By ATHAR

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