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बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश)
हिमाचल प्रदेश में मानसून का प्रकोप लगातार कहर ढा रहा है। शनिवार सुबह बिलासपुर जिले की उप तहसील नम्होल के अंतर्गत गांव गुतराहन में बादल फटने की घटना से भारी तबाही मच गई। अचानक हुई इस प्राकृतिक आपदा से इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस घटना में 10 से अधिक गाड़ियां मलबे में दब गईं और कई जगहों पर खेतों की भूमि बह गई। ग्रामीणों का कहना है कि तेज आवाज के साथ आई पानी और मलबे की लहरों ने पलक झपकते ही सबकुछ तबाह कर दिया। भारी बारिश के चलते न केवल बिलासपुर, बल्कि पूरे प्रदेश में हालात गंभीर बने हुए हैं। जगह-जगह भूस्खलन और सड़कों के अवरुद्ध होने से लोगों को आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
धर्मपुर और आसपास के क्षेत्रों में भी बढ़ा खतरा
बिलासपुर के अलावा, मंडी जिला के धर्मपुर उपमंडल के सपड़ी रोह गांव में भी शनिवार सुबह लगभग चार बजे बड़ा भूस्खलन हुआ। पहाड़ दरकने से कई घरों पर खतरा मंडराने लगा। प्रशासन ने तुरंत राहत कार्य शुरू करते हुए 8 घरों को खाली करवाया और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। ग्रामीणों ने बताया कि लगातार बारिश से पहाड़ की मिट्टी ढीली हो गई थी और अचानक भारी मलबा नीचे आ गया।
इस बार का मानसून हिमाचल प्रदेश के लिए बेहद घातक साबित हो रहा है। 20 जून से 12 सितंबर तक राज्य में 4,465 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का नुकसान हो चुका है। इस अवधि में 386 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से 168 लोग सड़क हादसों में मारे गए हैं। इसके अलावा 451 लोग घायल हुए हैं और 41 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
सैकड़ों सड़कें और बिजली आपूर्ति योजनाएं बंद
प्रदेश भर में भूस्खलन और पेड़ गिरने के कारण सैकड़ों सड़कें बंद हो चुकी हैं। कई क्षेत्रों में बिजली ट्रांसफार्मर और जल आपूर्ति योजनाएं भी ठप हो गई हैं, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बिजली कटौती और पानी की समस्या ने जनजीवन और अधिक प्रभावित कर दिया है।
लगातार बारिश और भूस्खलन ने भरमौर-पठानकोट नेशनल हाईवे की स्थिति भी बिगाड़ दी है। तुन्नूहट्टी, लाहड़ और मैहला के पास शुक्रवार रात हुए भूस्खलन के कारण सड़क पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को रातभर वाहनों में ही रुकना पड़ा।
एनएच मंडल के अधिशासी अभियंता मीत शर्मा ने बताया कि सड़क पर गिरे पेड़ और भारी मलबे के कारण रास्ता अवरुद्ध हो गया था। मशीनरी और श्रमिकों की मदद से सड़क खोलने का कार्य जारी है, लेकिन भारी बारिश से काम में देरी हो रही है।
मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने राज्य में लगातार बारिश की संभावना जताई है। विभाग ने 19 सितंबर तक के लिए पूर्वानुमान जारी किया है, जिसके तहत 13 और 14 सितंबर को कई क्षेत्रों में भारी बारिश और आंधी-तूफान की संभावना है।
इसके चलते मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। शिमला, कांगड़ा, पालमपुर और जोगिंद्रनगर में शनिवार सुबह से भारी बारिश दर्ज की गई, जबकि कुछ क्षेत्रों में धूप और बादलों का मिश्रित मौसम देखने को मिला।
राहत और बचाव कार्य में जुटा प्रशासन
प्रदेश सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें राहत कार्य में तेजी से जुटी हुई हैं। प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला जा रहा है। एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन मिलकर मलबा हटाने और राहत सामग्री पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और सुरक्षित स्थानों पर ही रहें।
हिमाचल प्रदेश में जारी बारिश और भूस्खलन ने राज्य को संकट में डाल दिया है। बिलासपुर में बादल फटने से जहां स्थानीय लोग भयभीत हैं, वहीं धर्मपुर और अन्य जिलों में भी खतरा बढ़ता जा रहा है। राज्य सरकार और प्रशासन राहत और बचाव कार्यों में पूरी ताकत से जुटे हैं, लेकिन मौसम विभाग के लगातार अलर्ट ने स्थिति की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। फिलहाल प्रदेश की जनता से सावधानी बरतने और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।
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