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हरिद्वार जिले में अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए शासन के निर्देशों के अनुपालन में खनन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। जिला खनन अधिकारी मोहम्मद काजिम रजा ने जानकारी दी कि जनपद में किसी भी प्रकार का अवैध खनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी। इसी क्रम में खनन विभाग की टीम ने तहसील लक्सर के ग्राम नेहन्दपुर और महतौली में औचक निरीक्षण करते हुए तीन स्टोन क्रेशरों को सीज कर दिया।
खनन विभाग को दूरभाष पर लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ क्षेत्रों में नियमों की अनदेखी करते हुए अवैध खनन किया जा रहा है। इन शिकायतों की जांच के लिए विभागीय दल को सक्रिय किया गया और जिला खनन अधिकारी के नेतृत्व में कार्रवाई शुरू की गई। टीम ने ग्राम नेहन्दपुर में स्थित मै0 लिमरा स्टोन क्रेशर, ग्राम महतौली में स्थित मै0 दून स्टोन क्रेशर और श्री साईं स्टॉक पर छापेमारी की। औचक निरीक्षण में यह पाया गया कि निर्धारित मानकों और अनुमति के विपरीत खनन और क्रशिंग का कार्य हो रहा था। इसी आधार पर तीनों स्टोन क्रेशरों को मौके पर पैमाइश करते हुए सीज कर दिया गया और उनकी ई-रवन्ना आईडी को अस्थाई रूप से निलंबित कर दिया गया।

खनन विभाग का मानना है कि अवैध खनन न केवल प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन करता है, बल्कि पर्यावरण और आसपास के गांवों पर भी गंभीर असर डालता है। गंगा और उसकी सहायक नदियों में लगातार बढ़ रहे अवैध खनन से नदी के बहाव, जल गुणवत्ता और भू-जल स्तर पर बुरा असर पड़ रहा है। यही कारण है कि शासन ने इस मामले में कड़े निर्देश जारी किए हैं और खनन विभाग ने भी सख्त रवैया अपनाया है।
हरिद्वार जिले के लक्सर क्षेत्र में अवैध खनन की शिकायतें लंबे समय से आ रही थीं। ग्रामीणों ने कई बार शिकायत दर्ज कराई थी कि खनन माफिया मशीनों से रेत और गिट्टी निकालकर ट्रकों के माध्यम से बाहर भेज रहे हैं। इससे न केवल गांव की सड़कों को नुकसान हो रहा है, बल्कि खेतों की उर्वरता पर भी असर पड़ रहा है। इन शिकायतों की पुष्टि विभाग ने मौके पर जाकर की और पाया कि तीन स्टोन क्रेशर बिना अनुमति के खनन और स्टॉकिंग कर रहे हैं।
खनन विभाग की इस कार्रवाई से इलाके में हड़कंप मच गया है। जिन खनन माफियाओं को लगता था कि वे नियमों को ताक पर रखकर मनमानी कर सकते हैं, उनके लिए यह एक बड़ा संदेश है। जिला खनन अधिकारी ने साफ कहा है कि शासन की मंशा स्पष्ट है – प्रदेश में कहीं भी अवैध खनन नहीं होने दिया जाएगा। विभागीय टीमें लगातार निरीक्षण कर रही हैं और आगे भी जहां कहीं से शिकायत मिलेगी वहां सख्त कदम उठाए जाएंगे।

खनन विभाग ने साथ ही यह भी चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में कोई भी स्टोन क्रेशर या खननकर्ता बिना अनुमति कार्य करता पाया गया तो उसके खिलाफ न केवल प्रशासनिक कार्रवाई होगी बल्कि जुर्माने और आपराधिक मुकदमे भी दर्ज किए जाएंगे। यह कार्रवाई शासन के उस संकल्प को भी दर्शाती है जिसमें प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
हरिद्वार जिले में गंगा तट और उसके आसपास अवैध खनन लंबे समय से चुनौती बना हुआ है। कई बार प्रशासन और पुलिस की टीमों ने संयुक्त रूप से अभियान चलाकर अवैध खनन के ट्रक और मशीनें सीज की हैं। बावजूद इसके खनन माफिया सक्रिय हो जाते हैं। लेकिन इस बार खनन विभाग ने जिस तत्परता और सख्ती से कार्रवाई की है उससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि अब अवैध खनन करने वालों के लिए प्रदेश में कोई जगह नहीं बचेगी।
जिला खनन अधिकारी मोहम्मद काजिम रजा ने कहा कि यह कार्रवाई केवल शुरुआत है। विभाग नियमित रूप से निगरानी करेगा और जहां भी शिकायत मिलेगी वहां तुरंत छापेमारी की जाएगी। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि यदि कहीं अवैध खनन दिखाई दे तो तुरंत विभाग को सूचित करें ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

खनन विभाग की इस कार्रवाई का असर न केवल हरिद्वार बल्कि पूरे उत्तराखंड में देखने को मिलेगा। अन्य जिलों के खननकर्ताओं को भी यह संदेश मिल गया है कि शासन और प्रशासन अब ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। उत्तराखंड एक पर्यटन और धार्मिक राज्य है जहां पर्यावरण संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि यहां अवैध खनन को बढ़ावा मिलेगा तो यह न केवल राज्य की प्राकृतिक धरोहर को नुकसान पहुंचाएगा बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी गंभीर संकट खड़ा करेगा।
विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, अवैध खनन से सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व नुकसान होता है। साथ ही नदियों का प्राकृतिक बहाव प्रभावित होता है और भू-क्षरण की समस्या भी बढ़ती है। यही कारण है कि शासन ने खनन विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि चाहे कितने भी प्रभावशाली लोग हों, यदि वे अवैध खनन में लिप्त पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ बिना किसी दबाव के कार्यवाही की जाए। इस पूरी कार्रवाई से यह भी साबित होता है कि तकनीकी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर खनन विभाग अब पहले से ज्यादा सक्रिय है। ई-रवन्ना प्रणाली के माध्यम से अब हर गाड़ी और उसके खनन से जुड़े डेटा की निगरानी की जा रही है। जैसे ही कोई संदिग्ध गतिविधि पाई जाती है, तुरंत अलर्ट जारी होता है और कार्रवाई की जाती है। इसी प्रणाली का लाभ उठाते हुए विभाग ने तीनों स्टोन क्रेशरों की आईडी निलंबित कर दी है ताकि वे आगे कार्य न कर सकें।
स्थानीय लोगों ने खनन विभाग की इस कार्रवाई का स्वागत किया है। उनका कहना है कि लंबे समय से गांवों में भारी वाहन और खनन मशीनें चल रही थीं जिससे शांति भंग हो रही थी और प्रदूषण भी बढ़ रहा था। अब उन्हें उम्मीद है कि अवैध खनन पूरी तरह रुक जाएगा और उनके गांवों में पर्यावरणीय संतुलन फिर से स्थापित होगा। खनन विभाग की इस कड़ी कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हरिद्वार और पूरे उत्तराखंड में अवैध खनन करने वालों के लिए अब कोई जगह नहीं है। शासन की मंशा साफ है कि विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह कार्रवाई आने वाले समय में एक उदाहरण बनेगी और अन्य जिलों के लिए भी मार्गदर्शक होगी।
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